मुख्यमंत्री हरीश रावत ने स्वच्छता अभियान के तहत पर्वतीय क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन सेक्टर में वायबिलिटी गैप फण्डिंग अनुदान को 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने की मांग की। शहरी क्षेत्रों में व्यक्तिगत शौचालयों के लिए निर्धारित प्रति यूनिट केन्द्रांश 4 हजार रूपये
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने स्वच्छता अभियान के तहत पर्वतीय क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन सेक्टर में वायबिलिटी गैप फण्डिंग अनुदान को 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने की मांग की। शहरी क्षेत्रों में व्यक्तिगत शौचालयों के लिए निर्धारित प्रति यूनिट केन्द्रांश 4 हजार रूपये से बढ़ाकर ग्रामीण क्षेत्रों की भांति 12 हजार रूपये करने का सुझाव दिया। इसी प्र्रकार पर्वतीय शहरी क्षेत्रों में सामुदायिक शौचालयों के लिए प्रति यूनिट निर्धारित मानक 65 हजार रूपये से बढ़ाकर 1 लाख 25 हजार रूपये करने की मांग की।
नई दिल्ली के नीति आयोग भवन में स्वच्छ भारत अभियान हेतु गठित मुख्यमंत्रियों के उपसमूह की बैठक में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि पूर्व की केन्द्र सरकारों द्वारा सम्पूर्ण स्वच्छता प्राप्त करने की दिशा में आधारभूत कार्य कर जमीन तैयार कर दी गयी है। अब आवश्यकता मिलकर तैयार की गयी जमीन पर फसल लगाने की है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य सरकार ने जनपद चमोली तथा बागेश्वर को स्वयं के संसाधनों से वर्ष 2016-17 तक खुला शौच मुक्त करने का संकल्प लिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड देश का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। जहां वर्ष भर तीर्थयात्रियों एवं श्रद्धालुओं का आना-जाना होता है। अतः स्वच्छ भारत अभियान के अन्तर्गत ही हरिद्वार, ऋषिकेश व चारधाम यात्रा मार्गांे से गुजरने वाले यात्रियों तथा फ्लोटिंग पोपुलेशन के लिए मार्गों के किनारे एवं धार्मिक स्थलों के समीप यात्री सुविधाएं निर्मित करना आवश्यक है। आंगनवाडी केन्द्रांे पर आने वाले बच्चों के लिए मोबाईल शौचालयों की व्यवस्था की जायंे। कूड़ा बीनने वालों को संस्थागत रूप से ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन की प्रक्रिया से जोड़कर उनके पुनर्वासन की नितान्त आवश्यकता है। भारत सरकार में कैबिनेट सचिव स्तर पर महत्वपूर्ण विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया जाए। प्रत्येक विभाग की भूमिका स्पष्ट हो व स्वच्छता के लिए बजट आवंटन तथा उसका उपभोग भी स्पष्ट हो।
स्वच्छ भारत मिशन को सस्टेनेबल बनाने के लिए सुझाव देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विकेन्द्रीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन की नीति अपनाये जाने की आवश्यकता है। औद्योगिक शहरी क्षेत्रों में जल प्रदूषण की गंभीर समस्या के दृष्टिगत उन क्षेत्रों के लिए डिसेंट्रलाईज्ड वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट प्लांट स्वच्छ भारत अभियान के अन्तर्गत निर्मित किये जायें। औद्योगिक क्षेत्रों की भांति ही उपनगरीय क्षेत्रों में भी डिसेंट्रलाईज्ड वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट प्लांट स्वच्छ भारत अभियान के तहत निर्मित किये जायें तथा स्वच्छीकृत जल का कृषि/बागवानी आदि कार्यो हेतु उपयोग किया जाए। इस बैठक में अनेक राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी अपने विचार व्यक्त किये।
हिलमेल ब्यूरो







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