हरिद्वार में रहकर अनुराग तोमर ने लॉ की पढ़ाई की। यहां रहकर उन्हें लगता था कि समाज में कई विसंगतियां हैं और नागरिक सुविधाओं का अभाव भी। समाज का एक तबका ऐसा भी है, जो न्याय के लिए मोटी रकम खर्च करने में असमर्थ है। इसको देख अनुराग ने सोचा कि वह लॉ की पढ़ाई के बाद समाज हित, नागरिक सुविधाओं के लिए लड़ेंगे एवं गरीब की मदद जरुर करेंगे। उन्होंने ऐसा कर भी दिखाया। उन्होंने हरिद्वार में मूलभूत सुविधाओं का अभाव, कई सालों तक मास्टर प्लान की स्वीकृति न होने के अलावा सड़कों एवं नागरिकों की सुविधाओं को लेकर उपेंद्र कुमार नामक व्यक्ति की ओर से सुप्रीम कोर्ट में 26 सितंबर 2011 को जनहित याचिका दायर की। इस याचिका पर संज्ञान लेने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से जवाब भी मांगा और निर्देशित भी किया। अनुराग तोमर की माने तो सुप्रीम कोर्ट के डायरेक्शन के बाद सरकार ने तत्काल मास्टर प्लान को हरी झंडी दी। यही नहीं, देहरादून निवासी मनोज कुमार रवि की नियुक्ति डिस्ट्रिक्ट कलेक्ट्रेट में चालक के तौर पर हुई थी। तीन-चार महीने की नियुक्ति के बाद चालक की ड्राइविंग को लेकर सवाल उठने लगे थे। अनुराग ने बताया कि दून के डीएम के निर्देश पर बनी कमेटी ने चालक को अयोग्य माना था। हाईकोर्ट के बाद मामला उनके पास पहुंचा था। इस मामले में वर्ष 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने एक कमेटी का गठन किया गया था। इस कमेटी ने चालक को योग्य माना था, जिसके बाद चालक मनोज को बहाल कर दिया गया। अनुराग बताते हैं कि समाज के प्रत्येक नागरिक को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।


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