एक अभियान… पहाड़ों की ओर लौटने का, हिलमेल के शानदार उद्घाटन के मौके पर अपने अपने कार्यक्षेत्र में उत्तराखंड का नाम रोशन करने वाले उत्तराखंड के सपूतों को सम्मानित किया गया। इनमें नौसेना प्रमुख एडमिरल डी के जोशी, इंडियन ऑयल कार्पोरेशन के चेयरमैन आर एस बुटोला, कोस्टगार्ड के अतिरिक्त महानिदेशक राजेन्द्र सिंह, गढ़वाल रेजीमेंट के कर्नल अजय कोठियाल और वरिष्ठ पत्रकार व इंडिया टीवी के प्रबंध संपादक विनोद कापड़ी शामिल हैं। उत्तराखंड के इन सपूतों से हम आपका परिचय कराते हैं।
एडमिरल डी के जोशी, नौसेना प्रमुख
पनडुब्बी भेदी युद्ध विशेषज्ञ एडमिरल देवेंद्र कुमार जोशी ने 31 अगस्त 2012 को नए नौसेना प्रमुख के रूप में कार्यभार संभाला। नौसेना की पश्चिमी कमान के कमांडर रहे जोशी ने ऐसे समय नौसेना का प्रभार संभाला है जब यह दो विमानवाहक पोतों के संचालन और बड़ी संख्या में युद्धपोत, लंबी दूरी तक निगरानी रखने वाले विमानों और पनडुब्बियों को शामिल करने के लिए तैयार है।
एडमिरल जोशी अंडमान निकोबार द्वीप कमान और यहां एकीकृत रक्षा स्टाफ मुख्यालय के प्रभारी भी रहे चुके हैं। उन्होंने विजाग स्थित पूर्वी बेड़े का भी नेतृत्व किया है। वर्ष 1974 में नौसेना में शामिल हुए जोशी विमानवाहक पोत आईएनएस विराट, गाइडेड मिसाइल विनाशक रणवीर और आईएनएस कुठार की कमान संभाल चुके हैं। अमेरिका के नेवल वॉर कॉलेज से स्नातक जोशी मुंबई स्थित नेवल वॉरफेयर कॉलेज और नेशनल डिफेंस कॉलेज में अध्ययन कर चुके हैं।
नैनीताल में अयारपाटा स्थित नेवल आफिस के बगल में रहने वाले बालक देवेन्द्र को नेवी अधिकारियों की सफेद चमचमाती वर्दी बहुत आकर्षित करती थी। इसी से उन्हें नेवी में जाने की प्रेरणा मिली। हालांकि तब देवेन्द्र ने भी शायद ही सोचा हो कि एक दिन लोग उन्हें भारतीय नौसेना के मुखिया के रूप में जानेंगे। उनकी पत्नी का नाम चित्रा जोशी है और उनकी दो बेटियां हैं।
आर एस बुटोला, चेयरमैन, इंडियल ऑयल
आर एस बुटोला भारत के सबसे बड़े वाणिज्यिक उद्यम इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष हैं। वे इंडियन ऑयल की ग्रुप कंपनियां चैन्नई पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लि. और आईओटी इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड एनर्जी सर्विसिज लि. और पेट्रोलियम फेडरेशन ऑफ इंडिया (पेट्रोफेड) के भी अध्यक्ष हैं। इंडियन ऑयल में श्री बुटोला ऐसे समय में कंपनी का नेतृत्व कर रहे जब तेल एवं गैस कंपनियों के सामने अभूतपूर्व चुनौतियां हैं। आर एस बुटोला अपनी कार्यकुशलता के लिये राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से सम्मान पा चुके हैं।
उत्तराखंड के पौडी गढ़वाल जिले के मूल निवासी आर एस बुटोला सादा जीवन उच्च विचार के मानने वाले हैं। बुटोला फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज दिल्ली से एमबीए हैं और इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ बैंकर्स (सीएआइआईबी) के प्रमाणित सहयोगी हैं। उनकी सादगी की एक मिसाल ये है कि वो इतने बडे पद पर होने के बावजूद अपनी पत्नी के साथ वसन्तकुंज के अपने छोटे से घर में रहते हैं। वे खास होने के बावजूद आम हैं। ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा की बदौलत आज वे इस मुकाम पर पहुंचे हैं। देश-विदेश की काफी यात्राएं कर चुके बुटोला गंभीर पाठक और सुलझे हुए चिंतक भी हैं। मिलनसार होने के साथ ही उनकी समाजसेवा में भी गहरी रूचि है।
उप महानिदेशक राजेन्द्र सिंह, इंडियन कोस्ट गार्ड
उप महानिदेशक राजेन्द्र सिंह भारतीय तटरक्षक में नियमित रूप से सीधी भर्ती के द्वारा सेवा में आये पहले अफसर हैं, जो 11 जनवरी 2013 को उप महानिदेशक के रैंक में पदोन्नत हुए हैं। तीन दशकों से अधिक अवधि की गौरवपूर्ण सेवा में, फ्लैग अफसर ने विभिन्न महत्वपूर्ण संक्रियात्मक और स्टाफ नियुक्तियों को संभाला है। इनमें अपतटीय गश्ती पोत संग्राम और विवेक, तीव्रगामी गश्ती पोत अमृतकौर एवं अहिल्याबाई की कमान, तटरक्षक मुख्यालय में निदेशक (प्रशासन), निदेशक (योजना) तथा जिला कमांडर, गोवा की नियुक्तियां उल्लेखनीय हैं। महानिरीक्षक के रूप में, इन्होंने पूर्वी और पश्चिमी समुद्री क्षेत्र की भी कमान संभाली, जो सेवा के संक्रियात्मक समुद्री मोर्चे की दो-तिहाई से अधिक की कमान करने को व्यक्त करता है।
इनको राष्ट्रपति तटरक्षक पदक (पीटीएम) और तटरक्षक (टीएम) से सम्मानित किया जा चुका है। राजेन्द्र सिंह जी उत्तराखंड के चकराता के रहने वाले हैं। इनका विवाह श्रीमती उर्मिला सिंह से हुआ और इनकी दो पुत्रियां हैं।
कर्नल अजय कोठियाल
कर्नल अजय कोठियाल के नेतृत्व में इंडियन आर्मी महिला एक्सपीडिशन दल ने पिछले साल 26 मई को सर्वोच्च पर्वत शिखर माउंट एवरेस्ट पर सफल आरोहण किया था। अभियान दल में भारतीय सेना की सात महिला अफसर भी शामिल थीं। माउंट एवरेस्ट फतह करने के लिए भारतीय सेना की ओर से पहली बार महिला अफसरों के लिए पर्वतारोहण अभियान चलाया गया था। खास बात यह कि दून निवासी कर्नल अजय कोठियाल के नेतृत्व में भारतीय सेना के जिन 17 जांबाज पर्वतारोहियों (महिला व पुरुष) ने दुनिया के सर्वोच्च पर्वत शिखर पर सफल आरोहण किया, उनमें अकेले उत्तराखंड के ही सात जांबाज शामिल थे।
चैथी गढ़वाल राईफल्स में तैनात कर्नल अजय कोठियाल को विशिष्ट सेवा मेडल (वीएसएम) से सम्मानित किया जा चुका है। कर्नल कोठियाल को यह सम्मान विश्व की आठ सबसे ऊंची चोटियों में से एक मनास्लु को फतह करने के लिए दिया गया है। कर्नल कोठियाल को जम्मू-कश्मीर के पीर पंजाल क्षेत्र में एक मुठभेड़ में सात आतंकवादियों को मार गिराने के लिए दूसरे बड़े वीरता पुरस्कार कीर्ति चक्र से भी नवाजा जा चुका है। मुठभेड़ के दौरान उनके पैरों में लगे छर्रे अभी भी नही निकल पाए हैं।
कर्नल कोठियाल टिहरी जिले के नरेंद्र नगर इलाके के रहने वाले हैं। उनकी वीरता और देश भक्ति के लिए उन्हें कीर्ति चक्र के अलावा 2004 में शौर्य चक्र से भी सम्मानित किया जा चुका है। बीएसएफ से आई.जी. के पद से सेवानिवृत्त हुए उनके पिता एस एस कोठियाल का कहना है कि इतने सम्मान पाने वाले वे उत्तराखंड के पहले फौजी अधिकारी हैं।
विनोद कापड़ी, मैनेजिंग एडिटर, इंडिया टीवी
विनोद कापड़ी इंडिया टीवी के मैनेजिंग एडिटर है। हिंदी टीवी न्यूज की दुनिया में जाना पहचाना नाम है। विनोद कापड़ी को टीआरपी का खिलाडी माना जाता है। जनता की नब्ज पहचानने और टीवी न्यूज को नयी पहचान देने में उनका बडा हाथ है। ये विनोद जी की काबलियत ही है जिसके चलते उन्होने 3 बडे चैनलों को नंबर तक पहुचाया है। पहले जी न्यूज फिर स्टार न्यूज और अब इंडिया टीवी।
उत्तराखंड में पिथौरागढ़ के रहने वाले कापड़ी जी बरेली में पले बढ़े। उन्होंने पत्रकारिता की शुरूआत अमर उजाला से की और उसके बाद दिल्ली आकर जी न्यूज के साथ अपना सफर शुरू किया। संवाददाता के पद से शुरू हुआ उनका सफर जी न्यूज के आउट पुट हैड तक पहुंचा। बाद में वो स्टार न्यूज गये और वहां भी लबीं पारी खेलने के बाद उन्होंने इंडिया टीवी के मैनेजिंग एडिटर के तौर पर अपनी पारी शुरू की, जो बदस्तूर जारी है।
टीवी में विजुअल की महत्ता को समझने की काबलियत ही विनोद कापड़ी की सफलता की कहानी है। किसी मामूली सी लगने वाली खबर का ट्रीटमैंट किस तरह उसको देश की सबसे बडी खबर बना सकता है ये समझ हिंदी टीवी के नये पत्रकारों को विनोद कापडी जी की देन मानी जाती है। कई उदाहरण हैं जो उनका डंका बजाते है-गुडिया प्रकरण हो या काल कपाल महाकाल जैसी डाक्यूमैंट्री या मुबई की बाढ़ जैसे कई घटनाओं ने उनका लोहा मनवाया। उनके आलोचक भी काम करने की उनकी लगन और मेहनत के कायल हैं।
हिलमेल की तरफ से उत्तराखंड के इन सभी सपूतों को हिलरत्न सम्मान के साथ ही उनके उज्जवल भविष्य के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं।


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