पूर्व आईबी चीफ अजीत डोभाल को नए नेशनल सिक्यूरिटी एडवाइजर के पद पर नियुक्ति किया गया है। केरल कॉडर के 1968 बैंच के आईपीएस अधिकारी रहे अजीत डोभाल एनडीए सरकार के दौरान आईबी के निदेशक नियुक्त हुए थे। वह 2004-2005 में इस पद पर रहे।
इससे पहले अजीत डोभाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की और उन्हें देश की सुरक्षा चुनौतियों की जानकारी दी। कीर्ति चक्र से सम्मानित होने वाले पहले पुलिस अधिकारी 69 वर्षीय डोभाल ने मोदी के समक्ष देश के अंदर और बाहर मौजूद खतरों के बारे में एक रूपरेखा पेश की।
उन्होंने 1999 में कंधार विमान अपहरण, आईसी 814 के संकट से निबटने में भी अहम भूमिका अदा की थी। वह कर्नाटक सरकार के सुरक्षा सलाहकार भी रह चुके हैं। इन्हें खुफिया हलकों में सर्वश्रेष्ठ दिमाग वाला माना जाता है।
अजीत डोभाल ने मिजोरम में छापेमारी निरोधी अभियान चलाया था और मिजो नेता लालडेंगा के सात में से छह कमांडरों को अपने पक्ष में लाकर मिजो नेता को वार्ता की मेज पर लेकर आए थे। जब खालिस्तान लिबरेशन फ्रंट ने 1991 में रूमानियाई राजनयिक लिवियू रादू का अपहरण कर लिया था तो डोभाल ने उन्हें छुडाने के लिए सफल रणनीति रची थी।
अजीत डोभाल का जन्म 20 जनवरी 1945 को पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड में हुआ। वह गैर सरकारी संस्था विवेकानंद की शाखा विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन के निदेशक हैं। वह बेहद तेज तर्रार अधिकारी माने जाते हैं। उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए उन्हें 1988 में उन्हें कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया जो कि आम तौर पर सैन्य बलों को वीरता के लिए दिया जाता है। इसके अलावा वह भारतीय पुलिस पदक पाने वाले सबसे युवा अधिकारी थे।
हिलमेल ब्यूरो


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