Friday , 4 September 2026
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हमारी फ़ौज

अब पूरा जीवन समाजसेवा के नाम

उत्तराखंड में समाजसेवा के पर्याय और युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके कर्नल अजय कोठियाल ने सेना से इस्तीफा दे दिया है। अब वह पूरी तरह से समाजसेवा में अपना जीवन समर्पित करना चाहते हैं।

वाई एस बिष्ट, नई दिल्ली

अपने सामाजिक सरोकारों के चलते कर्नल कोठियाल उत्तराखंड में किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। युवाओं को नई दिशा देने में उनके योगदान की चर्चा पूरे देश में होने लगी है। इसके अलावा उत्तराखंड में महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को स्व-रोजगार के लिए प्रेरित करने, पारंपरिक और जैविक खेती से मुंह मोड़ चुके लोगों को फिर इसकी ओर लौटाने, युवाओं को सैन्य भर्ती के लिए तैयार करने जैसे कार्यों के चलते वह उत्तराखंड की प्रतीक शख्सियत बन चुके हैं। केदारनाथ में 2013 की प्रलयंकारी बाढ़ के बाद उसके पुनर्निर्माण के कर्नल कोठियाल का भागीरथ प्रयास एक मिसाल बन चुका है। हर समय समाज के लिए कुछ करने को तत्पर रहने वाले कर्नल कोठियाल ने अब पूरी तरह समाजसेवा में रम जाने का मन बना लिया है। युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय कर्नल कोठियाल ने सेना मुख्यालय को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए अपने दस्तावेज भेज दिए हैं।

कर्नल कोठियाल सेना के एक बेहद सम्मानित अधिकारी हैं। नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के प्रधानाचार्य कर्नल कोठियाल को कीर्ति चक्र, शौर्य चक्र, और विशिष्ट सेवा मेडल से नवाजा जा चुका है। वह दो बार माउंट एवरेस्ट को फतेह कर चुके हैं। कीर्ति चक्र फौज का वह सम्मान है जो शांतिकाल में अद्वितीय शौर्य के लिए दिया जाता है। शौर्य चक्र भी शांतिकाल के दौरान उच्च स्तर का साहस और कर्तव्य परायणता के लिए प्रदान किया जाता है। विशिष्ट सेवा मेडल (वीएसएम) फौज के उन अफसरों को दिया जाता है जिनकी सेवा असाधारण स्तर की रही हो। जाहिर है ऐसे तीन-तीन मेडल पाने वाला अफसर निश्चित ही खास व्यक्तित्व का होगा।

केदारनाथ का भागीरथ

उनकी एक छवि इससे अलग भी है। वह है केदारनाथ को नया स्वरूप प्रदान करने वाले अधिकारी की। कर्नल अजय कोठियाल और उनकी टीम ने वर्ष 2013 की आपदा के दौरान हजारों लोगों को सुरक्षित बचाने का कार्य किया। उत्तरकाशी, गंगोत्री में फंसे लोगों को एनआईएम की टीम ने रेस्क्यू किया। कर्नल कोठियाल को केदारनाथ आपदा के बाद युद्ध स्तर पर पुनर्निर्माण कार्यों को तय समय सीमा में पूरा करने का भी श्रेय जाता है। उन्होंने यह काम तब अपने जिम्मे लिया था जब कोई सरकारी एजेंसी इसके लिए तैयार नहीं थी। तब चार गढ़वाल रेजिमेंट के कर्नल कोठियाल ने यह जिम्मेदारी संभाली और उसे बखूबी निभाया। बारह सौ नेपाली श्रमिकों के साथ टीम कोठियाल ने रात दिन एक करके केदारनाथ धाम की यात्रा के लिए न केवल नया रास्ता तैयार किया, बल्कि केदारधाम को नए स्वरूप में ले आए। उनकी टीम ने यह काम रिकॉर्ड समय में किया है। कर्नल कोठियाल के बारे में कहा जाता है कि वह आपदा के बाद से ही केदारवासी हो गए थे। आज केदारनाथ अपने जिस स्वरूप में है, उसका श्रेय कहीं न कहीं कर्नल कोठियाल के भागीरथ प्रयास को ही जाता है।

युवाओं की प्रेरणा

एक और काम जिसने उन्हें युवाओं में बहुत लोकप्रिय बना दिया है, वह है यूथ फाउंडेशन। उत्तऱाखंड में सेना में भर्ती होने की चाह रखने वालों को कर्नल कोठियाल के यूथ फाउंडेशन की ओर से निशुल्क भर्ती प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके लिए वह शिविर आयोजित करते हैं। युवाओं को सेना के सेवानिवृत्त लोगों की देखरेख में तैयार किया जाता है। यही नहीं प्रशिक्षण के दौरान उनके खाने-पीने, रहने की व्यवस्था यूथ फाउंडेशन ही करता है। वह सैन्य, अर्धसैन्य बलों के लिए युवक और युवतियों दोनों को तैयार करते हैं। अब तक यूथ फाउंडेशन के प्रयासों से 8,000 से ज्यादा युवा सेना का हिस्सा बन चुके हैं। इसके अलावा यूथ फाउंडेशन स्किल डेवलपमेंट के लिए भी लगातार काम कर रहा है। वह युवाओं को समाज के साथ जोड़ने के लिए भी तैयार करते हैं।

Written by
Y S Bisht

लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद कई टीवी प्रोग्राम के लिए काम किया। एशिया डिफेंस न्यूज़ इंटरनेशनल (अडनी) से जुड़े। यह एजेंसी हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, मणिपुरी और असमिया में अपनी सेवाएं देती है। इसके अलावा एशिया डिफेंस न्यूज के नाम से एक मासिक पत्रिका भी निकालती थी। वर्ष 2013 में जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर हिल-मेल वेबसाइट शुरू की। फरवरी 2016 से हिल-मेल में बतौर संपादक कार्यरत। मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल के निवासी हैं।

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