—–जब मंत्री अमृता रावत भड़क उठी!!!!!!!!!! मैंने यमुना व टौंस घाटी (…रवांई कल आज और कल) नामक एक पुस्तक का सम्पादन किया है… मैंने उत्तराखंड के कई नेताओं को इसकी प्रतियां भी भेंट की यद्यपि इस के प्रति उत्सुक आम लोगों ने किताब की जमकर
—–जब मंत्री अमृता रावत भड़क उठी!!!!!!!!!!
मैंने यमुना व टौंस घाटी (…रवांई कल आज और कल) नामक एक पुस्तक का सम्पादन किया है… मैंने उत्तराखंड के कई नेताओं को इसकी प्रतियां भी भेंट की यद्यपि इस के प्रति उत्सुक आम लोगों ने किताब की जमकर खरीद की और इसका पहला प्रिंट हाथों हाथ बिक गया।
मुझे उत्तराखंड के एक बेहद ईमानदार अधिकारी ने राय दी कि आप इस इस किताब को अमृता जी को दिखा दीजिये यह पर्यटन व संस्कृति विभाग के लिए बेहद उपयोगी हो सकती है। वे खुद भी इन विभागों में काम कर चुके हैं ….
इन विभागों के मंत्री अमृता रावत जी के प्रति मेरे मन में फाफी सम्मान था वे अपने पति सतपाल महाराज के साथ मंच पर प्रवचन करती हैं और उन पर उत्तराखंड के अधिकांश नेताओं की तरह भ्रष्टाचार के आरोप भी सुनाई नही दिये।
मैं बड़े उत्साह से पहली बार अपनी किताब के साथ सचिवालय स्थित उनके कार्यालय उनसे मिला और उनसे किताब के बारे में बात की, उन्होंने बिना देखे ही किताब मेज पर रख दी। बोली, उत्तराखंड में तो काफी लोग किताबें लिख रहे हैं ? मैंने कहा, कि उत्तराखंड की जानकारी वाली किताबे तो विभाग को खरीदनी चाहिए ताकि बाहर से आने वाला पर्यटक यहाँ के बारे में जान सके। नही हमने ऐसा कोई नियम अभी तक नहीं बनाया है।
मैंने कहा, संस्कृति विभाग भी तो ऐसी किताबें खरीदता होगा ?
नहीं, वहां कोई पुस्तकालय नहीं है।
अमृता जी ने मेरी किताब व आवेदन अपने पी ए की ओर खिसका दी। इस पर मैंने पुस्तक वापस माँगते हुए कहा की जब नियम ही नहीं है तो मेरी किताब मुझे लौटा दीजिये ?
…….मैंने इसका कूड़ेदान में जाने का भविष्य देख लिया था।
मेरे किताब वापस माँगने पर मंत्री जी भड़क गयी, बोली आप जब एक किताब भी नहीं दे सकते—तो आप जा सकते हैं। मैंने विनम्रता से कहा, जब नियम ही नहीं है तो मैंने सोचा एक किताब बर्बाद करने से क्या फायदा ?
बस इसी पर अमृता जी भड़क गयी। बोली मुझे नहीं लेनी आपकी किताब–ले जाईये इसे–लगा जैसे ये उत्तराखंड राज्य का मंत्रालय नहीं उनका निजी घर हो और उनसे कोई जबरदस्ती भीख मांग रहा हो….. उन्हें पता नही कि मैं तीन दशक से पत्रकारिता में हूँ और यथा शक्ति ईमानदारी से अपना काम कर रहा हूँ—मेरे मन में उनकी ईमानदार छवि है… कोई और मंत्री होता तो बात बहुत दूर तक जा सकती थी—मैं उनके व्यवहार से बेहद आहात हुआ—उम्मीद है कि उत्तराखंड के मंत्री उत्तराखंड के आम नागरिक से कैसा व्यवहार करना है इसे सीखेंगे वरना हिमाचल जाकर वहां के प्रतिनिधियों से सीख कर आयें!! मैं तीन साल तक हिन्दुस्तान अखबार का हिमाचल प्रदेश का ब्यूरो चीफ रहा हूँ वहां के मंत्री व नौकरशाह प्रदेश के आम नागरिक से भड़काना तो छोड़िये ऊँची जुबान से भी बात नहीं करते…… और पूरी बात बेहद प्यार से समझाते हैं……….।
बिजेन्द्र रावत







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