उत्तराखंड में हरीश रावत सरकार ने अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा को मुख्य सचिव पद पर तैनात करने की तैयारी कर ली। लेकिन शर्मा के कई विवादित फैसलों से सरकार खुलकर कुछ भी कहने से अभी बच रही है। वहीं बताया जा रहा है कि
उत्तराखंड में हरीश रावत सरकार ने अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा को मुख्य सचिव पद पर तैनात करने की तैयारी कर ली। लेकिन शर्मा के कई विवादित फैसलों से सरकार खुलकर कुछ भी कहने से अभी बच रही है। वहीं बताया जा रहा है कि शर्मा के उत्तराखंड में मौजूदगी के चलते प्रदेश सरकार को अन्य विकल्पों पर सरकार को अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी है।
मौजूदा मुख्य सचिव एन. रविशंकर 31 जुलाई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उनके उत्तराधिकारी की तलाश में सरकार जुटी थी। इस पद के लिए राकेश शर्मा का नाम सबसे आगे चल रहा था। लेकिन कुछ कारणों से सरकार उनकी ताजपोशी से बचना चाहती थी। पिछली बार भी राकेश शर्मा सबसे आगे चल रहे थे। अचनाक ही एन. रविशंकर केंद्र सरकार की प्रतिनियुक्ति से वापस अपने मूल कैडर उत्तराखंड में आ गए तो सरकार ने उन्हें ही यह कुर्सी सौंप दी।
इस बार भी मामला कुछ ऐसा ही दिख रहा था। सरकार ने पहले तो एस. राजू को तीन माह का सेवा विस्तार देने का विचार किया। यानि 31 अक्टूबर तक उन्हें इस पद पर रखा जा सकता था। अहम बात यह भी है कि इसी तारीख को अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा को भी रिटायर होना है। सचिवालय से एस. राजू को सेवा विस्तार देने का प्रस्ताव तैयार भी हुआ। लेकिन बाद में सीएम ने उसे केंद्र के पास नहीं भेजा। इससे एक बात साफ हो गई कि मौजूदा मुख्य सचिव को सेवा विस्तार नहीं दिया जा रहा है।
इस बीच सरकार ने केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर तैनात अपने अफसरों से भी बातचीत की। बताया जा रहा है कि आईएएस अफसर अमरेंद्र सिन्हा उत्तराखंड आने को तैयार ही नहीं हो रहे हैं। सिन्हा इस समय राकेश शर्मा से वरिष्ठ हैं और अगर वो यहां आते हैं तो उनका मुख्य सचिव बनना तय है। एक अन्य आईएएस राजीव गुप्ता भी उत्तराखंड लौटना नहीं चाहते हैं। अपने अफसरों की न के बाद सरकार ने दूसरे राज्य के अफसरों पर भी निगाह डाली। सूत्रों का कहना है कि यूपी कैडर के रमेश नेगी से भी सरकार की बातचीत हुई। बताया जा रहा है कि बाहर से मुख्य सचिव लाने की स्थिति में अपने कैडर के अफसरों की संभावित नाराजगी को देखते हुए सरकार ने इस मामले से भी अपने हाथ खींच लिए।
एक तरफ सरकार अपनी कोशिशों में लगी थी तो दूसरी तरफ राकेश शर्मा के लिए लाबिंग करने वालों की कमी नहीं थी। बताया जा रहा है कि सरकार कुछ वजहों से राकेश की ताजपोशी से बचना चाहती थी। लेकिन आखिरकार अब इस बात पर सहमति बन गई है कि राकेश शर्मा को ही मुख्य सचिव की कुर्सी सौंपी जाए। ऐसे में राकेश शर्मा एक अगस्त से 31 अक्टूबर तक मुख्य सचिव का काम देखेंगे। सूत्रों का कहना है कि अगर कोई विवाद नहीं हुआ तो सरकार राकेश शर्मा को रिटायर होने के बाद तीन माह का सेवा विस्तार भी दे सकती है।
राकेश शर्मा के बारे में मीडिया में भी खूब चर्चा होती रहती है कि उन्होंने भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया लेकिन उनके बारे में ये भी कहा जाता है कि चारधाम यात्रा और विशेष तौर से केदारनाथ यात्रा को सफल बनाने में भी राकेश शर्मा का महत्वपूर्ण योगदान है। केदारनाथ में पुनर्निर्माण के कार्य का नेतृत्व कर रहे कर्नल अजय कोठियाल ने जब उन्हें बताया कि यहां पर कार्य करने के लिए उनको बड़ी मशीनों की जरूरत है तो उन्होंने केदारनाथ में कार्य को तेज करने के लिए विशालकाय हेलीकाप्टर से केदारनाथ में बड़ी बड़ी मशीने भिजवाई जो कि अपने आप में एक नया रिकार्ड था। इसके बाद केदारनाथ में चल रहे काम में काफी तेजी आ गई है।
चारधाम यात्रा को लेकर मुख्यमंत्री हरीश रावत की ओर से भी अपर मुख्य सचिव को सीधे कहा गया था कि यात्रा को सुगम बनाने के लिए जिस चीज की भी जरूरत हो उसको पूरा किया जाए। केदारनाथ में पुनर्निर्माण का कार्य कर रहे कर्नल कोठियाल को भी मुख्य अपर सचिव का भरपूर सहयोग मिला। मुख्यमंत्री ने अपर मुख्य सचिव को पूरी हिदायत दे रखी थी कि केदारनाथ के पुनर्निर्माण के कार्यों के लिए किसी चीज की कमी नहीं होनी चाहिए। कर्नल कोठियाल को भी पुनर्निर्माण कार्यों के लिए सरकार की ओर से पूरी मदद मिल रहा है। कर्नल कोठियाल की टीम के कठिन परिश्रम और सरकार का भरपूर सहयोग का नतीजा है कि इस साल केदारनाथ यात्रा सुचारू रूप से चल रही है।
हिलमेल ब्यूरो







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