जम्मू कश्मीर में एलओसी पर लगातार फायरिंग और दो भारतीय जवानों के शहीद होने के बाद पकिस्तान की नापाक साजिश बेनकाब हो चुकी है। सरहद पर सेना और बीएसएफ के जवानों ने चैकसी कई गुना बढ़ा दी है। मुझे एलओसी और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर जवानों
जम्मू कश्मीर में एलओसी पर लगातार फायरिंग और दो भारतीय जवानों के शहीद होने के बाद पकिस्तान की नापाक साजिश बेनकाब हो चुकी है। सरहद पर सेना और बीएसएफ के जवानों ने चैकसी कई गुना बढ़ा दी है। मुझे एलओसी और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर जवानों की चैकसी को देखने का मौका मिला। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बीएसएफ के जवानों के साथ रातभर पेट्रोलिंग के दौरान पता चला कि पाकिस्तानी सेना एलओसी पर फायरिंग की आड़ में अब भारत-पाक के बीच आईबी यानि अंतरराष्ट्रीय सीमा पर घुसपैठ तेज करने की फिराक में है। पिछले कुछ सालों से जम्मू में आईबी पर शांति है। बीएसएफ महानिरीक्षक राजीव कृष्णा ने बताया कि पाकिस्तानी सेना के इस खास प्लान का मकसद किसी बड़ी वारदात को अंजाम देना है।
मैंने जम्मू से लगने वाली अंतराष्ट्रीय सीमा पर बीएसएफ के जवानों के साथ पूरी रात नाईट पेट्रोलिंग की। हमनें अपना सफर जम्मू से शुरू किया। हमारा मिशन पाकिस्तान से लगने वाली अंतराष्ट्रीय सीमा पर मौजूद बीएसएफ की अग्रिम चैकियों तक जाना था। हम जम्मू के आरएसपूरा सेक्टर में मौजूद तीन अग्रिम चैकियों पर जाने के लिए आगे बढे। ये चैकियां थी खरखोला, अल्ला माई की कोठी और सुचेतगढ़। रात में बारिश के बीच हम बीएसएफ के ट्रक में सवार सरहद पर लगी फेंसिंग के साथ-साथ आगे बढ़ रहे थे। हम सबसे पहले पंहुचे खरखोला पोस्ट जो पाकिस्तान की सीमा के साथ जीरो लाइन पर मौजूद है। सामने पाकिस्तान की चैकियां साफ-साफ देखी जा सकती हैं। जैसे जैसे अँधेरा बढ़ता जा रहा था इन चैकियों पर जवान रात की निगरानी की तैयारी में लगे थे। अब हम रात के खाने के लिए जवानों के साथ हो गए। सरहद पर जब सामने दुश्मन मौजूद हो तो बंकर के अन्दर बैठकर खाना खाने का मजा ही कुछ अलग है। अब मोर्चे पर जाने की तैयारी हो चुकी है।
चंद कदम दूर पर दुश्मन के सामने तैनात होने से पहले कंपनी कमांडर जवानों को कुछ खास हिदायत देता है। ये खास हिदायत है कि सरहद पर हालात गर्म हैं। दुश्मन इसका फायदा उठा सकता है। ये खराब मौसम दुश्मन के लिए मददगार हो सकता है। ऐसे में ज्यादा चैकन्ना रहने की जरुरत है। अब हम पंहुचे हैं। एएमके यानि अल्ला माई की कोठी पोस्ट पर। रात के लगभग 8 बजे घुप अँधेरे में ये टुकड़ी अपने मोर्चे पर तैनाती के लिए आगे बढ़ रही है। थोड़ी ही देर में सबने अपना-अपना मोर्चा संभाल लिया। अब सामने सिर्फ एक ही चीज नजर आ रही है फेंसिंग के पार दुश्मन की हरकत। सरहद पर मोर्चे कई तरह के हैं। कुछ जवान बंकर के अन्दर से निगरानी कर रहे हैं तो कुछ जवान ऊँचें पोस्ट से दुश्मन पर नजर रख रहे हैं। हर जवान आधुनिक हथियारों और निगरानी यंत्रों से लैस है। बारिश, कड़ाके की ठण्ड हर तरह के मौसम में तैनात इस जवान को कोई चिंता नहीं है। इसका एक ही लक्ष्य है कि सरहद के उस पार से कोई दुश्मन हमारी सीमा को न लाँघ सके।
अकेले जम्मू में 200 किमी अंतराष्ट्रीय सीमा पर बीएसएफ के 15 हजार से ज्यादा जवान दिन रात तैनात हैं। इसके साथ एलओसी पर भी बीएसएफ के 5 हजार से ज्यादा जवान सेना के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर देश की हिफाजत कर रहे हैं। मेंढर के जिस इलाके में भारत के 2 जवान शहीद हुए वहां बीएसएफ भी तैनात है। जम्मू अंतराष्ट्रीय सीमा पर कई जगह फेंसिंग नहीं है ऐसी जगह इन जवानों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। अग्रिम मोर्चे की दो चैकियों का जायजा लेने के बाद रात के 11 बजे हम पाकिस्तान के सियालकोट शहर से मात्र 11 किमी दूर सुचेतगढ़ पोस्ट की तरफ चल पड़े। यहाँ का नजारा भी जोश भर देने वाला था। जवान पूरी तरह से मुश्तैद होकर सरहद की निगरानी में लगे हैं। यहाँ पर जवान फेंसिंग से सटकर पेट्रोलिंग कर रहे हैं। बुलेटपुरूफ जैकेट और और रायफल दुश्मन की तरफ तानकर जवान मुस्तैद है। सरहद पर दिन या रात के वक्त सीमापार से किसी बड़े हमले और बारूदी सुरंग से निपटने के लिए बख्तरबंद गाडी भी जरुरी है। बख्तरबंद गाडी के अन्दर से जवान सरहद के पार निशाना साध रहे हैं। खासतौर से जबसे एलओसी पर पाकिस्तानी सेना ने गोलाबारी की है यहाँ चैकसी ज्यादा बढ़ गयी है। सीमापार से घुसपैठियों को रोकने के लिए सरहद पर लगाई गयी ये फेंसिंग भी खास है। लेकिन जवान पूरी रात पेट्रोलिंग करके दुश्मन को कोई मौका नहीं देना चाहता। अब जबकि पाक आर्मी कारगिल पार्ट-2 की हिमाकत कर सकती है ऐसे में कड़ी निगरानी जरुरी है। रात के 2 बजने वाले हैं लेकिन इन जवानों की आँखों से नींद बहुत दूर है।
अगली सुबह फिर हमनें भारी बर्फवारी के बीच राजौरी से एलओसी की एक फॉरवर्ड पोस्ट पर बीएसएफ के जवानों के साथ पूरे दिन पेट्रोलिंग की। हमारा मकसद कई फीट बर्फ और शून्य से नीचे के तापमान के बीच मेंढ़र में एलओसी की एक फॉरवर्ड पोस्ट पर तैनात बीएसएफ के जवानों का हाल जानना था। हमने राजौरी में बीएसएफ के एक कैम्प से चलना शुरू किया। राजौरी से बीएसएफ के ट्रक में करीब दो घंटे का सफर तय करते हुए हम मेंढ़र में कृष्णा घाटी की तरफ बढ़ रहे थे। रास्ते में भारी बर्फवारी की वजह से कई जगह हमारी गाड़ी बर्फ में फंस गयी। जवानों को बर्फ में फंसे ट्रक को निकालने में काफी मशकक्त करनी पड़ी। अब हम धीरे धीरे एलओसी के नजदीक ऐसे इलाके में पंहुचे जो कुछ साल पहले सीमापार से घुसपैठ का गढ़ था। ये इलाका है थानामंडी यहाँ पर सेना का एक बड़ा कैंप और हैलिपैड है। सेना के जवान हैलिपैड से बर्फ साफ करते नजर आ रहे थे।
दो घंटे का सफर तय करने के बाद अब सड़क का रास्ता भरी बर्फवारी के कारण बंद हो गया था। अब एलओसी की एक फॉरवर्ड पोस्ट तक पंहुचने के लिए इससे आगे का रास्ता हमें पैदल ही तय करना है। आगे बर्फ से ढकी इस ऊँची पहाड़ी पर हमें पैदल 1 घंटे का रास्ता चढना है। सेना और बीएसएफ के जवानों को एलओसी पर मौजूद कई अग्रिम चैकियों तक पंहुचने के लिए 4 से 5 घंटे का वक्त लगता है। बीएसएफ जवानों की पेट्रोलिंग टुकड़ी बड़ी सावधानी के साथ आगे बढ़ रही थी क्योंकि अब हम दुश्मन के निशाने पर थे। एलओसी पर भारत और पाकिस्तान की अग्रिम चैकियां नजर आने लगी। इन इलाकों में पाकिस्तानी सेना फायरिंग करके आतंकवादियों को घुसपैठ में मदद करती है। जवान पूरी तरह से सजग होकर आगे बढ़ रहे थे।
पैदल करीब एक घंटे का सफर तय करने के बाद अब हम बीएसएफ की एक अग्रिम चैकी पर पहुँचने वाले थे। रास्ता और मुश्किल होता जा रहा था। अब हम पाकिस्तानी सेना की फायरिंग रेंज में आ चुके थे। यहाँ पर कई तरह के खतरे हैं एक तरफ सामने से फायरिंग तो दूसरी तरफ बर्फ में दबी बारूदी सुरंग का खतरा। अभी इसी हफ्ते इस इलाके में एक बारूदी सुरंग के फटने से बीएसएफ के दो जवान घायल हो गये थे। आखिरकार गिरते पड़ते हम बीएसएफ की एक अग्रिम चैकी के नजदीक पहुँच गये। हमारी सांस में सांस आई। हमारे पैर और कदम जवाब देने लगे। लेकिन इन बहादुर जवानों का हौसला देखकर हमनें हिम्मत जुटाई और आगे बढे। आखिरकार हम एक अग्रिम चैकी तक पंहुचने में कामयाब रहे। जवानों के साथ गर्म चाय पीकर जान में जान आई। इस अग्रिम चैकी पर जवान बंकर के अन्दर और बाहर से निगरानी कर रहे हैं तो कुछ जवान ऊँचें पोस्ट से दुश्मन पर नजर रख रहे हैं।
कई फीट बर्फ में तैनात इन जवानों को कोई चिंता नहीं है। इनका एक ही लक्ष्य है कि सरहद के उस पार से कोई दुश्मन हमारी सीमा को न लाँघ सके। सरहद पर निगरानी का ये सिलसिला यूँ ही पूरी रात और दिन चलता है। गलती के लिए कोई जगह नहीं है। इन जवानों को बस अपने कम्पनी कमांडर की हिदायत याद है कि सरहद पर हालात गर्म हैं। दुश्मन इसका फायदा उठा सकता है। ऐसे में ज्यादा चैकन्ना रहने की जरुरत है।
मनजीत नेगी – लेखक इंडिया टीवी में विशेष संवाददाता हैं।







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