जम्मू कश्मीर में आतंकवाद जो कि समाप्ति की ओर था लगता है एक बार फिर से अपने पैर पसारने लग गया है अभी कुछ दिनों पहले खबर मिली कि बड़ी संख्या में युवा फिर से आतंक के रास्ते पर चल रहे हैं। कश्मीर घाटी में
जम्मू कश्मीर में आतंकवाद जो कि समाप्ति की ओर था लगता है एक बार फिर से अपने पैर पसारने लग गया है अभी कुछ दिनों पहले खबर मिली कि बड़ी संख्या में युवा फिर से आतंक के रास्ते पर चल रहे हैं। कश्मीर घाटी में दम तोड़ चुका आतंकवाद खाड़ी देशों से आ रहे हवाला के पैसे से फिर फन उठाने लगा है। माना जा रहा है कि बड़ी संख्या में कश्मीर नौजवान जेहाद की राह पकड़ रहे हैं। बीते कुछ महीनों के दौरान 15 से 25 साल के लगभग 50 लड़के आतंकी गुटों में शामिल हुए हैं। इन हालात को देखते हुए विभिन्न सुरक्षा विशेषज्ञ भी इसको एक चेतावनी के रूप में देख रहे हैं और उनका मानना है कि भविष्य में इनसे बड़ी समस्या पैदा हो सकती है।
हालांकि राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी सार्वजनिक तौर पर यही कहते हैं कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और आतंकवाद अब समाप्त हो चुका है, लेकिन दबी आवाज में वे भी इस हकीकत को स्वीकार करते हैं। आतंकी नए लड़कों की भर्ती कर रहे हैं। दक्षिणी कश्मीर में त्राल, बाटापोरा, पंजगांव और यारीपोरा में हिज्बुल मुजाहिद्दीन पैठ बना रहा है, जबकि पलहालन से लेकर सोपोर तक में हिज्ब के साथ जैश व लश्कर अपने लिए लड़कों की भर्ती कर रहे हैं। खुफिया सूचनाओं के मुताबिक अवंतीपुरा से 15, कुलगाम से नौ, शोपियां से सात, अनंतनाग से आठ, उत्तरी कश्मीर से 11 व अन्य कस्बों से लगभग आठ लड़के लापता हुए हैं और यह सभी आतंकी बन चुके हैं और माना जा रहा है कि वादी में आतंकवाद का नेतृत्व इन्हीं लड़कों के हाथ में हैं।
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, आतंकवाद को जिंदा करने में हवाला कारोबार भी अहम रोल अदा कर रहा है। सरहद पार से नशीले पदार्थो की तस्करी के जरिए जुटाया जा रहा पैसा और खाड़ी देशों से आ रहा हवाला के पैसे का इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को फिर से हवा देने के लिए हो रहा है। कुछ लोग इस सिलसिले में पकड़े भी गए हैं, लेकिन उससे यह नेटवर्क पूरी तरह तबाह नहीं हुआ है। जम्मू कश्मीर में लगे सुरक्षा बलों को काफी सतर्क रहना होगा ताकि आतंकवाद फिर से अपने पैर न फैला सके।
पाकिस्तान अपने नापाक इरादों को पूरा करने के लिए, जम्मू कश्मीर को कई सालों से निशाना बनाता रहा है। पाकिस्तान में आई.एस.आई. के समर्थन वाले गैर-सरकारी संगठनों का मकसद, जम्मू कश्मीर के माहौल में अस्थिरता पैदा करना है। आई.एस.आई. और अंतर्राष्ट्रीय अपराधी दाउद इब्राहीम, इस इलाके से यह कारोबार चला रहे हैं। भारत में नशीली दवाओं की तस्करी का धंधा, ‘डी कम्पनी’ द्वारा चलाया जाता है। और फिर, तालिबान, जमात-उद-दावा, लश्कर-ए-तैयबा और हिज़बुल मुजाहिदीन के धन का मुख्य स्रोत अफीम की कालाबाजारी है। भारत में विशाल नार्कोटिक्स कारोबार से भी इन संगठनों को धन प्राप्त होता है।
भारत मंे नशीली दवाओं के कारोबार को खत्म करने को उच्चतम प्राथमिकता दी जानी चाहिए, खास तौर से इन दो बातों को ध्यान में रखते हुए – पहली, इस्लामिक स्टेट (आई.एस.) आतंकी संगठन का उदय और भारतीय युवाओं का इसमें शामिल होना, और दूसरी, अल-कायदा प्रमुख, अल ज़वाहिरी का बयान, जिसमें उसने जल्दी ही भारत में अल-कायदा की शाखा खोलने की घोषणा की थी। और उधर, अल-कायदा की ही एक शाखा, नाइजीरिया-स्थित बोको हराम ने दाउद इब्राहीम के साथ समझौता करने के संकेत दिए हैं। यह संगठन नशीली दवाओं के कारोबार में काफी प्रवीण है। इन आतंकी संगठनों के इकट्ठा होने से भारत के लिए चुनौती और बढ़ जाती है।
जम्मू कश्मीर में अभी कुछ समय पहले अलगाववादियों ने रैलियां की थी उन रैलियों में पाकिस्तान और आई एस के झंडे भी लहराये गये थे। दरअसल आई एस युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए अश्लील वीडियो को यू टयूब में डालकर और धन दौलत के माध्यम से अपनी ओर आकर्षित कर रहा है जो कि भारत के लिए एक चिन्ता की बात है। भारत की सुरक्षा एजंेसियों को आई एस, पाकिस्तान के आतंकी संगठनों और अलगाववादियों पर पैनी नज़र रखनी होगी ताकि वह जम्मू कश्मीर में अपने नापाक इरादों में कभी कामयाब न हों।
भारत कई सालों से कहता आ रहा है कि पाकिस्तान के कई क्षेत्र आतंकवादियों की शरणस्थली बने हुए हैं। अब अमेरिका के विदेश विभाग की ताजा रिपोर्ट में भी कहा गया है कि पाकिस्तान के कई इलाके आतंकियों के लिए सुरक्षित शरणस्थली बने हुए हैं। आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के खिलाफ पाकिस्तानी कार्रवाई पर भी प्रश्नचिह्न लगाया गया है। विदेश विभाग की आतंकवाद पर वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान के संघ प्रशासित कबायली क्षेत्र (फाटा), पूर्वोत्तर खैबर पख्तूनख्वा और दक्षिण-पश्चिम बलूचिस्तान ऐसे आतंकियों की पनाहगाह बने हुए हैं जो स्थानीय, क्षेत्रीय और वैश्विक हमलों की फिराक में रहते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, हक्कानी नेटवर्क, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी), लश्कर-ए-झंगवी और अफगान तालिबान जैसे दूसरे आतंकी समूह पाकिस्तान और पूरे क्षेत्र में अपनी गतिविधियों की योजना के लिए इन पनाहगाहों का फायदा उठाते हैं। लश्कर के खिलाफ कार्रवाई पर रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान ने आतंकी गुट के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की क्योंकि देश में इसका संचालन, प्रशिक्षण, रैलियां, दुष्प्रचार एवं धन एकत्र करना जारी है। इसमें कहा गया कि पाकिस्तानी सेना ने पाकिस्तान के भीतर टीटीपी जैसे संगठनों के खिलाफ अभियान चलाए लेकिन उसने लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी समूहों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की।
एक ओर तो अमेरिकी विदेश विभाग अपनी वार्षिक रिपोर्ट में पाकिस्तान को आडे हाथों ले रहा है वहीं दूसरी ओर वह पाकिस्तान की लगातार मदद कर रहा है। भारत शुरू से कहता आ रहा है कि पाकिस्तान आतंकी संगठनों को पनाह देता रहा है और अब यह बात पूरे विश्व के देशों को भी समझ आ रही है। इसके अलावा पूरी विश्व विरादरी को हवाला कारोबार, नशीले पदार्थों की तस्करी और इससे निपटने के उपायों पर भी मिलकर कार्य करने की जरूरत है। जिससे ऐसे देशों और लोगों के विरूद्ध उचित कार्रवाई की जा सके और इससे होने वाले नुकसान से बचा जा सके।
वाई एस बिष्ट, सम्पादक, हिलमेल







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