वर्ष 2013 में हिमालयी राज्य उत्तराखंड को प्रकृति की विनाशलीला का सामना करना पड़ा। जान-माल की व्यापक हानि के साथ राज्य ने कुदरत के कहर का सबसे वीभत्स रूप देखा। विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ पर्यटन के प्रमुख केंद्र केदारनाथ और समूची केदारघाटी को व्यापक नुकसान
वर्ष 2013 में हिमालयी राज्य उत्तराखंड को प्रकृति की विनाशलीला का सामना करना पड़ा। जान-माल की व्यापक हानि के साथ राज्य ने कुदरत के कहर का सबसे वीभत्स रूप देखा। विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ पर्यटन के प्रमुख केंद्र केदारनाथ और समूची केदारघाटी को व्यापक नुकसान पहुंचा। फिर शुरू हुआ केदारनाथ को उसका पुराना स्वरूप लौटाने का मिशन। कुछ उत्साही लोगों की दिन-रात की मेहनत रंग लाई और ढाई वर्ष के अंतराल में ही केदारनाथ का कायाकल्प नजर आने लगा है।
ऐसे ही लोगों का सम्मान करने, केदारनाथ के पुनर्निर्माण और वहां पर्यटन की संभावनाओं पर प्रकाश डालने के लिए दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में 30 जनवरी 2016 को ‘केदारनाथ टूरिज्म समिट 2016’ का आयोजन किया गया।
इस समिट में बड़ी संख्या में प्रवासी उत्तराखंडी, प्रबुद्धजन, आपदा विशेषज्ञ, आपदा के समय सेना के राहत व बचाव अभियान का नेतृत्व करने वाले शीर्ष सैन्य अधिकारी, उत्तराखंड में विभिन्न सरोकारों से जुड़े लोग, मीडियाकर्मी और विश्लेषक शामिल हुए।
मुख्य अतिथि केंद्रीय पर्यटन मंत्री श्री महेश शर्मा और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री हरीश रावत ने समिट का विधिवत उद्घाटन किया। इस मौके पर केदारनाथ के पुनर्निर्माण से जुड़े उत्तराखंड के सभी आला अधिकारी मौजूद थे। इनमें प्रधान मुख्य सचिव श्री राकेश शर्मा, लोक निर्माण सचिव श्री अमित नेगी, पर्यटन सचिव श्री शैलेश बगोली, नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) के प्रिंसिपल कर्नल अजय कोठियाल और रूद्रप्रयाग के जिलाधिकारी श्री राघव लांगर शामिल थे।
इस दौरान केदारनाथ और आसपास के इलाकों में राज्य सरकार द्वारा किए गए कार्यों की विस्तार से जानकारी दी गई। राज्य के प्रधान मुख्य सचिव राकेश शर्मा ने केदारनाथ में अब तक किए गए कार्यों और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई पहलों की जानकारी देते हुए कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों ने भी विस्तार से अपने कामकाज का ब्यौरा पेश किया।
उत्तराखंड में भविष्य की संभावनाओं का खाका खींचते हुए इंडिया फाउंडेशन के निदेशक श्री शौर्य डोभाल ने राज्य की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने पर जोर दिया। समिट में आपदा के खतरे से बचते हुए पर्यटन की संभावनाओं पर एक पैनल परिचर्चा भी आयोजित की गई।
इसमें उधमपुर में एमजीजीएस मेजर जनरल एनसी बधानी, उत्तराखंड लोक निर्माण विभाग में सचिव श्री अमित नेगी, पर्यटन सचिव श्री शैलेश बगोली, नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) के प्रिंसिपल कर्नल अजय कोठियाल, रूद्रप्रयाग के जिलाधिकारी श्री राघव लांगर और पर्यटन विशेषज्ञ श्री सागर आहलूवालिया ने हिस्सा लिया। इस दौरान लोगों ने विशेषज्ञों से सवाल-जवाब भी किए।
अपने संबोधन में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने लोगों को केदारनाथ की महिमा और सुविधा के लिहाज़ से राज्य सरकार द्वारा किए गए कार्यों से अवगत कराया। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे न सिर्फ चारधाम और धार्मिक स्थलों के दर्शन के लिए उत्तराखंड की यात्रा करें बल्कि प्रकृति के नैसर्गिक रूप को देखने के लिए भी राज्य में आएं। उन्होंने उत्तराखंड के प्रवासियों से राज्य में विकास कार्यों से जुड़ने और योजनाओं को प्रचारित करने की अपील की। उन्होंने तमाम प्रबुद्धजनों से राज्य सरकार को अपने सुझाव देने का भी आग्रह किया।
केंद्रीय पर्यटन मंत्री महेश शर्मा ने कहा कि आपदा के बाद पुनर्निर्माण के लिए घोषित की गई सहायता राशि का एक बड़ा हिस्सा अवमुक्त किया जा चुका है। उन्होंने आश्वासन दिया कि निकट भविष्य में भी केंद्र सरकार भविष्य में केदारनाथ के पुनर्निर्माण और राज्य में पर्यटन के विकास के लिए राज्य सरकार को हरसंभव मदद उपलब्ध कराएगी।
समारोह के दौरान केदारनाथ के उत्थान और पुनर्निर्माण को लेकर एक डॉक्यूमेंट्री भी रिलीज़ की गई। इस डॉक्यूमेंट्री में जाने माने फ़िल्म अभिनेता हेमंत पांडेय ने अहम भूमिका निभाई है। इसके साथ ही उत्तराखंड के विकास और सरोकारों को समर्पित ‘हिलमेल पत्रिका’ का भी विमोचन किया गया। समिट के दौरान केदारनाथ में चलाए जा रहे पुनर्निर्माण कार्यो पर एक चित्र प्रदर्शनी भी रखी गई थी।
कार्यक्रम के अंत में उत्तराखंड और देश के दूसरे हिस्सों में बेहतरीन काम करने वालों को हिलमेल फाउंडेशन की ओर से ‘हिलरत्न सम्मान’ प्रदान किया गया। इनमें कई प्रशासनिक अधिकारी, सैन्य अधिकारी, पत्रकार और समाजसेवी शामिल थे।







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