Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /home1/hillmail/public_html/wp-content/themes/pressroom/shortcodes/single-post.php on line 230

Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /home1/hillmail/public_html/wp-content/themes/pressroom/shortcodes/single-post.php on line 364

Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /home1/hillmail/public_html/wp-content/themes/pressroom/shortcodes/single-post.php on line 364

Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /home1/hillmail/public_html/wp-content/themes/pressroom/shortcodes/single-post.php on line 364

Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /home1/hillmail/public_html/wp-content/themes/pressroom/shortcodes/single-post.php on line 364

Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /home1/hillmail/public_html/wp-content/themes/pressroom/shortcodes/single-post.php on line 364

Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /home1/hillmail/public_html/wp-content/themes/pressroom/shortcodes/single-post.php on line 364

केदारनाथ में पहली बार नए तरीके से तोड़ी जाएंगी चट्टानें

पिछले साल जून में आई भयंकार बाढ़ से तबाह हुआ केदारनाथ अब जल्दी ही नए रंग-रूप में आ जाएगा। भारतीय भू वैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) ने अपनी अंतिम अध्ययन रिपोर्ट राज्य सरकार सौंप दी। रिपोर्ट के अनुसार मंदिर को कोई खतरा नहीं है और अब सरकार

GSI REPORTS 11पिछले साल जून में आई भयंकार बाढ़ से तबाह हुआ केदारनाथ अब जल्दी ही नए रंग-रूप में आ जाएगा। भारतीय भू वैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) ने अपनी अंतिम अध्ययन रिपोर्ट राज्य सरकार सौंप दी। रिपोर्ट के अनुसार मंदिर को कोई खतरा नहीं है और अब सरकार केदारनाथ का पुनर्निर्माण कर सकेगी।

केदारनाथ में मलबा हटाने के लिए ग्रीन ब्लास्टिंग का प्रयोग करने का सुझाव दिया गया है। भू वैज्ञानिकों की टीम ने सिफारिश की है कि केदारनाथ के खतरनाक हालात को देखते हुए नई टाउनशिप दक्षिणी हिस्से में बनाई जाए। टीम ने चट्टानी मलबे पर टाउनशिप बनाने के लिए ‘ग्रीन ब्लास्टिंग’ टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल करने की सलाह दी है।

पहली बार भारत में पहाड़ों और चट्टानों को तोड़ने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके तहत चट्टानों को तोड़ने के लिए डायनामाइट के बजाय केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही जीएसआई टीम ने राज्य सरकार को सलाह दी है कि वह केदारनाथ टाउन में किसी भी तरह के अन्य कंस्ट्रक्शन की अनुमति न दे।

जीएसआई के निदेशक डा. वीके शर्मा ने बताया कि 16 जून को केदारनाथ में आयी आपदा प्राकृतिक आपदा थी। अध्ययन के बाद हमने सरकार को सुझाव दिया है कि केदारनाथ मंदिर के दक्षिणी छोर पर क्षतिग्रस्त इमारतों को तोड़कर नए सिरे से टाउनशिप बनाई जाए। केदारनाथ मंदिर के आसपास की चट्टानों में दरारें आई हुईं हैं, इनकी तुरंत मरम्मत की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि आपदा के बाद मंदाकिनी नदी का मार्ग बदल गया और वह पूर्व की ओर सरस्वती नदी में मिल गई। यह एक अनोखी प्राकृतिक घटना है। उसके भू-वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर सुझाव दिया कि नदी की धारा को फिर से चैनलाइज किया जाए, नदी के मुहानों को मजबूत किया जाए।

राज्य सरकार के सचिव सुभाष कुमार ने कहा कि रिपोर्ट की सिफारिशों के आधार पर पुनर्निर्माण का काम किया जाएगा। अगले तीन साल के लिए बनाई गई पुनर्निर्माण की योजना के दौरान भी जीएसआई की गाइडलाइन के अनुसार काम किया जाएगा।

अपनी अध्ययन रिपोर्ट में जीएसआई की टीम ने रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ मंदिर के दक्षिणी छोर पर टाउनशिप बनाने के लिए समतल जगह को चिंहिंत किया है। इस हिस्से में अभी कुछ ध्वस्त इमारते हैं और अभी तक इस जमीन का कुछ हिस्सा हैलिपेड के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है और बाकी खाली है।

जीएसआई ने पांच जिलों रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, पिथौरागढ और बागेश्वर का अध्ययन किया। 21 विशेषज्ञों ने भूगर्भीय स्थितियों के बारे में यह रिपोर्ट तैयार की। इस अध्ययन के दौरान पांच जिलों में सक्रिय 274 लैंडस्लाइड का भी अध्ययन किया गया।

लगभग 1000 किमी लंबे क्षेत्र का सर्वेक्षण कार्य किया गया, जिसमें 67 प्रभावित ग्रामों और अवस्थापना संबंधी भूवैज्ञानिक आंकड़े तैयार किये गये। अध्ययन के दौरान मंदाकिनी घाटी में स्थित केदारनाथ मंदिर और उसके आस-पास के क्षेत्रों पर विशेष बल दिया गया।

हिलमेल ब्यूरो

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked with *

विज्ञापन

[fvplayer id=”10″]

Latest Posts

  • यमकेश्वर के लाल और उत्तराखंड के गौरव पत्रकार मनजीत नेगी सीडीएस कमेंडेशन पत्र से हुए सम्मानित

    यमकेश्वर के लाल और उत्तराखंड के गौरव पत्रकार मनजीत नेगी सीडीएस कमेंडेशन पत्र से हुए सम्मानित0

    सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने आजतक के कार्यकारी संपादक मनजीत नेगी को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ कमेंडेशन मेडल और प्रशंसा पत्र से किया सम्मानित, आजतक के कार्यकारी संपादक मनजीत नेगी को रक्षा क्षेत्र में उनकी निर्भीक पत्रकारिता के लिए चीफ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ़ कमनडेशन मेडल से सम्मानित किया गया। सीडीएस कमनडेशन मेडल से सम्मानित होने वाले ये देश के एक मात्र रक्षा पत्रकार हैं। सीडीएस ऑफ़ डिफेंस स्टाफ़ जनरल अनिल चौहान ने ३० मई को सेवानिवृत होने से पूर्व कई तीनों सेनाओं के कई अधिकारियों और जवानों को सीडीएस कमनडेशन मेडल से सम्मानित किया। सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने सेनाओं के अलावा समाज के अलग अलग क्षेत्रों में बेहतरीन कार्य करने वाले कुछ चुनिंदा लोगों को सीडीएस कमनडेशन मेडल से सम्मानित किया। मनजीत नेगी उनमें से एक हैं। मनजीत नेगी पत्रकारिता के क्षेत्र में। पिछले 25 साल से कार्यरत हैं।

    READ MORE
  • अंडमान में मानसून की दस्तक, उत्तर भारत में लू का कहर; 22 मई तक हीटवेव का अलर्ट

    अंडमान में मानसून की दस्तक, उत्तर भारत में लू का कहर; 22 मई तक हीटवेव का अलर्ट0

    देश में मौसम ने दो अलग-अलग रंग दिखाने शुरू कर दिए हैं। एक ओर दक्षिण-पश्चिम मानसून ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में दस्तक देकर बारिश की उम्मीद जगा दी है, वहीं दूसरी ओर उत्तर और मध्य भारत के कई राज्य भीषण गर्मी और लू की चपेट में हैं। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में 22 मई तक लू चलने का अलर्ट जारी किया है।

    READ MORE
  • ऑपरेशन सिंदूर का शेर: स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक की वीरता ने दुश्मन के दिल में पैदा किया खौफ

    ऑपरेशन सिंदूर का शेर: स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक की वीरता ने दुश्मन के दिल में पैदा किया खौफ0

    भारतीय वायुसेना के जांबाज योद्धाओं की बहादुरी की कहानियां हमेशा देशवासियों के भीतर गर्व और राष्ट्रभक्ति की भावना जगाती रही हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक की, जिन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान अदम्य साहस, असाधारण नेतृत्व और अद्भुत युद्ध कौशल का परिचय देकर भारतीय वायुसेना का मान बढ़ाया। दुश्मन के इलाके में आधी रात को अंजाम दिए गए इस बेहद जोखिम भरे मिशन में उन्होंने जिस धैर्य और सटीकता के साथ कार्रवाई की, वह आज भारतीय सैन्य इतिहास में वीरता की मिसाल बन चुकी है।

    READ MORE

Follow Us

Previous Next
Close
Test Caption
Test Description goes like this