पिछले साल जून में आई भयंकार बाढ़ से तबाह हुआ केदारनाथ अब जल्दी ही नए रंग-रूप में आ जाएगा। भारतीय भू वैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) ने अपनी अंतिम अध्ययन रिपोर्ट राज्य सरकार सौंप दी। रिपोर्ट के अनुसार मंदिर को कोई खतरा नहीं है और अब सरकार
पिछले साल जून में आई भयंकार बाढ़ से तबाह हुआ केदारनाथ अब जल्दी ही नए रंग-रूप में आ जाएगा। भारतीय भू वैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) ने अपनी अंतिम अध्ययन रिपोर्ट राज्य सरकार सौंप दी। रिपोर्ट के अनुसार मंदिर को कोई खतरा नहीं है और अब सरकार केदारनाथ का पुनर्निर्माण कर सकेगी।
केदारनाथ में मलबा हटाने के लिए ग्रीन ब्लास्टिंग का प्रयोग करने का सुझाव दिया गया है। भू वैज्ञानिकों की टीम ने सिफारिश की है कि केदारनाथ के खतरनाक हालात को देखते हुए नई टाउनशिप दक्षिणी हिस्से में बनाई जाए। टीम ने चट्टानी मलबे पर टाउनशिप बनाने के लिए ‘ग्रीन ब्लास्टिंग’ टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल करने की सलाह दी है।
पहली बार भारत में पहाड़ों और चट्टानों को तोड़ने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके तहत चट्टानों को तोड़ने के लिए डायनामाइट के बजाय केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही जीएसआई टीम ने राज्य सरकार को सलाह दी है कि वह केदारनाथ टाउन में किसी भी तरह के अन्य कंस्ट्रक्शन की अनुमति न दे।
जीएसआई के निदेशक डा. वीके शर्मा ने बताया कि 16 जून को केदारनाथ में आयी आपदा प्राकृतिक आपदा थी। अध्ययन के बाद हमने सरकार को सुझाव दिया है कि केदारनाथ मंदिर के दक्षिणी छोर पर क्षतिग्रस्त इमारतों को तोड़कर नए सिरे से टाउनशिप बनाई जाए। केदारनाथ मंदिर के आसपास की चट्टानों में दरारें आई हुईं हैं, इनकी तुरंत मरम्मत की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आपदा के बाद मंदाकिनी नदी का मार्ग बदल गया और वह पूर्व की ओर सरस्वती नदी में मिल गई। यह एक अनोखी प्राकृतिक घटना है। उसके भू-वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर सुझाव दिया कि नदी की धारा को फिर से चैनलाइज किया जाए, नदी के मुहानों को मजबूत किया जाए।
राज्य सरकार के सचिव सुभाष कुमार ने कहा कि रिपोर्ट की सिफारिशों के आधार पर पुनर्निर्माण का काम किया जाएगा। अगले तीन साल के लिए बनाई गई पुनर्निर्माण की योजना के दौरान भी जीएसआई की गाइडलाइन के अनुसार काम किया जाएगा।
अपनी अध्ययन रिपोर्ट में जीएसआई की टीम ने रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ मंदिर के दक्षिणी छोर पर टाउनशिप बनाने के लिए समतल जगह को चिंहिंत किया है। इस हिस्से में अभी कुछ ध्वस्त इमारते हैं और अभी तक इस जमीन का कुछ हिस्सा हैलिपेड के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है और बाकी खाली है।
जीएसआई ने पांच जिलों रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, पिथौरागढ और बागेश्वर का अध्ययन किया। 21 विशेषज्ञों ने भूगर्भीय स्थितियों के बारे में यह रिपोर्ट तैयार की। इस अध्ययन के दौरान पांच जिलों में सक्रिय 274 लैंडस्लाइड का भी अध्ययन किया गया।
लगभग 1000 किमी लंबे क्षेत्र का सर्वेक्षण कार्य किया गया, जिसमें 67 प्रभावित ग्रामों और अवस्थापना संबंधी भूवैज्ञानिक आंकड़े तैयार किये गये। अध्ययन के दौरान मंदाकिनी घाटी में स्थित केदारनाथ मंदिर और उसके आस-पास के क्षेत्रों पर विशेष बल दिया गया।
हिलमेल ब्यूरो







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