जून 2013 में केदारनाथ में आई आपदा के बाद एक फिर केदार घाटी में रौनक लौट आई है। बर्फ से ढकी केदार घाटी में श्रद्धालुओं के स्वागत की तैयारियां जोर शोर से चल रही हैं। आपदा के बाद ये पहला मौका है जब 6 महीने
जून 2013 में केदारनाथ में आई आपदा के बाद एक फिर केदार घाटी में रौनक लौट आई है। बर्फ से ढकी केदार घाटी में श्रद्धालुओं के स्वागत की तैयारियां जोर शोर से चल रही हैं। आपदा के बाद ये पहला मौका है जब 6 महीने कपाट बंद रहने के बाद पारम्परिक पूजा से भगवान केदार के द्वार अपने भक्तों के लिए खुल गए हैं। केदारनाथ में आई आपदा के दौरान और उसके बाद पिछले डेढ़ साल में मुझे छः बार केदारनाथ जाने का मौका मिला। हाल में 24 अप्रैल को कपाट खुलने के मौके पर जब मैं केदारनाथ पहुंचा तो नजारा बिलकुल बदल गया।
एक तरफ 11,800 फीट ऊँची दुर्गम घाटी में मौजूद केदारनाथ में दुनिया का सबसे बड़ा हैलीकॉप्टर एमआई 26 को उतार कर वायुसेना ने साबित किया कि उनका कोई मुकाबला नहीं है। दूसरी तरफ नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनिंग (निम) के जवान शून्य से 7 डिग्री तापमान में केदारनाथ की रौनक को दोबारा वापस लौटाने के लिये दिनरात पुनर्निर्माण के काम को अंजाम देने में जुटे हैं। केदारनाथ में जून 2013 में आई आपदा के बाद पुनर्निर्माण में सेना और वायुसेना ने नई जान फूंक दी है। तीन से चार फीट बर्फ और शून्य से सात डिग्री नीचे के तापमान में केदारनाथ को फिर से बसाने का काम युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। सबसे पहले सुबह एनआईएम के जवान और मजदूर केदारनाथ के द्वार पर पहुंचकर भगवान शिव से क्षमा याचना करते हैं। उसके बाद मंदिर के आसपास पड़ी बर्फ को हटाने का काम शुरू हो जाता है।
केदारनाथ में आई प्रलय को डेढ़ साल से ज्यादा का वक्त बीत चुका है लेकिन पुनर्निर्माण का काम गति नहीं पकड़ पा रहा था। ऐसे में एनआईएम और वायुसेना के आने से केदारनाथ में काम युद्ध स्तर पर शुरू हो पाया। केदारनाथ में देश का सबसे बड़ी ऊंचाई पर हैलीपैड बनाया गया। यह 492 फीट लम्बा और
164 फीट चैड़ा है। यह दिसम्बर 2014 के आखिरी हफ्ते में बनकर तैयार हुआ है। पिछले आठ महीनों के प्रयासों के बाद एमआई-26 ने समुद्र तल से 11 हजार 660 फीट की ऊंचाई पर केदारनाथ में सफलतापूर्वक लैंडिंग किया। जब हैलीकॉप्टर की लैंडिंग कराई गई, उस समय वहां का तापमान माइनस 4 डिग्री सेल्सियस था। दुनिया के सबसे बड़े हैलीकॉप्टर एमआई 26 की मदद से 2 जेसीबी मशीन, 3 बड़े पोकलैंड एस्केवेटर, 5 डम्पर ट्रक, 1 हाइड्रा क्रेन और एक स्नो ब्लोअर केदारनाथ पहुँचाया गया। इस विशालकाय हैलीकॉप्टर ने 16 चक्कर लगाकर 150 टन का सामान 11,600 फीट ऊँचे केदारनाथ भेजकर एक नया रिकार्ड कायम किया। एमआई 26 हैलीकॉप्टर के सीओ विंग कमांडर जी एस तुंग ने बताया कि केदारनाथ की संकरी घाटी में बर्फवारी के बीच कभी भी हैलीकॉप्टर उड़ान नहीं भरते हैं लेकिन पहली बार कपाट बंद होने के बाद केदारनाथ में एमआई 26 और छोटे प्राइवेट हैलीकॉप्टर जोखिम उठाकर उड़ान भर रहे हैं। यहां पर हैलीकॉप्टर पायलट की जरा सी चूक भारी पड़ सकती है लेकिन केदारनाथ में हर काम युद्धस्तर पर हो रहा है।
केदारनाथ के बारे में मान्यता है भगवान शिव के द्वार 6 महीने आम लोगों के लिए खुले रहते हैं जबकि सर्दियों में 6 महीने जब कपाट बंद होते हैं तो वे सिर्फ देवी देवताओं को दर्शन देते हैं। लेकिन ये पहला मौका है जब कपाट बंद होने के बाद केदारनाथ में पुनर्निर्माण का काम हो रहा है। एनआईएम के जवान और मजदूर दुनिया के सबसे ऊँचे युद्ध के मैदान सियाचिन की युद्ध रणनीति के तौर पर केदारनाथ में काम कर रहे हैं। इनके पास केदारनाथ मंदिर के दोनों तरफ मौजूद 50 के ज्यादा क्षतिग्रस्त मकानों को तोड़कर पुनर्निर्माण करने का मिशन है। एनआईएम के प्रिंसिपल कर्नल अजय कोठियाल के मुताबिक खून जमा देने वाली ठण्ड के बीच इन जवानों का एक ही मिशन है केदारनाथ को उसके पुराने दिन वापस लौटाना।
एक साल पहले मैंने केदारनाथ मंदिर तक पहुँचने के लिये बनाये नये रास्ते से 19 किलोमीटर का पैदल रास्ता तय किया और देखा कि ये रास्ता कितना मुश्किल भरा है। इससे पहले पैदल रास्ता 14 किलोमीटर लंबा था। पिछले साल तक केदारनाथ का पैदल रास्ता गौरीकुंड से शुरु होता था जो 14 किलोमीटर लंबा था। केदारनाथ मंदिर की यात्रा में रामबाड़ा सबसे अहम पड़ाव है। पैदल यात्रा की असली चुनौती रामबाड़ा से शुरु होती है। नए रास्ते में मंदिर तक पहुँचने के लिये मंदाकनी नदी को पार करना है। लोक निर्माण विभाग और नेहरू इंस्टिट्यूट ऑफ माउंटनियरिंग (निम) के जवानों ने मंदाकनी नदी पर पुल बनाया। ये नया रास्ता काफी कठिन और मुश्किलों से भरा है। अगला पड़ाव गौरीकुंड है। गौरीकुंड में केदारनाथ कि त्रासदी के दौरान काफी तबाही हुई। गौरीकुंड के रास्ते में हमें एक दुर्घटनाग्रस्त हैलीकॉप्टर मिला। केदारनाथ की प्रलय के दौरान तीन हैलीकॉप्टर दुर्घटना के शिकार हुये थे। सबसे बड़ी दुर्घटना वायु सेना के एमआई-17 हैलीकॉप्टर की हुई थी जिसमें 18 लोगों की मौत हो गयी थी। अब हम जंगलचट्टी पहुँच चुके थे केदारनाथ की यात्रा में ये एक अहम पड़ाव है। जंगलचट्टी में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी। अब यहां पर यात्रियों के लिये कुछ अस्थायी शिविर बनाये गये हैं। इस बार यात्रा के नए रूट के साथ केदारनाथ में एग्जिट रूट की भी प्लानिंग की जा रही है। ऐसी जगहों की पहचान की जा रही है जो आपदा की स्थिति में एग्जिट रूट हो सकता है। ऐसी जगहों पर मार्किंग की जा रही है। केदारनाथ में आई आपदा में ज्यादातर मौतें रास्तों में तीर्थयात्रियों के भटकने से हुई थीं। भारी बरसात, बारिश और भूस्खलन होने पर यात्रियों को समझ नहीं आया कि कैसे सुरक्षित जगह पर पहुंचा जाए।
इन सब के बीच केदारनाथ में गणतंत्र दिवस की गूंज सुनाई दे रही है। एनआईएम के जवानों ने केदार घाटी में गणतंत्र दिवस परेड का आयोजन किया। खून जमा देने वाली ठण्ड के बावजूद इन जवानों के जोश में कोई कमी नहीं है। केदारघाटी में बाबा केदार और भारत माता की जय के जयकारे गूंज रहे हैं। एनआईएम के जवानों और वायुसेना के इस जोश और मेहनत से राज्य सरकार गदगद है। इसीलिए राज्य के मुख्यमंत्री हरीश रावत और आला अधिकारी खुद केदारनाथ पहुंचे। मुख्य्मंत्री ने मिशन केदारनाथ के कप्तान व एनआईएम के प्रिंसिपल कर्नल अजय कोठियाल और उनकी टीम का सम्मान किया। पुनर्निर्माण के काम की रफ्तार को देखकर राज्य के प्रशासन को लगता है आपदा के बाद उत्तराखंड में पर्यटन पर जो बुरा प्रभाव पड़ा था वो जल्द दूर हो जाएगा।
मनजीत नेगी, वरिष्ठ संवाददाता, आज तक







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