देश प्रदेश में कई अहम जिम्मेदारियां निभा रहे उत्तराखंड के दिग्गज गत दिनों दिल्ली में जुटे और प्रदेश की प्रगति को लेकर चल रहे कार्यक्रमों पर मंथन किया। इस दौरान पलायनए सीमा क्षेत्र में घटती आबादीए बरसात के मौसम में सड़कों की स्थितिए उत्तराखंड में
देश प्रदेश में कई अहम जिम्मेदारियां निभा रहे उत्तराखंड के दिग्गज गत दिनों दिल्ली में जुटे और प्रदेश की प्रगति को लेकर चल रहे कार्यक्रमों पर मंथन किया। इस दौरान पलायनए सीमा क्षेत्र में घटती आबादीए बरसात के मौसम में सड़कों की स्थितिए उत्तराखंड में चीन से लगी सीमा की दिल्ली से नजदीकीए बागवानीए आर्मी मेडिकल कॉलेजए इको-सेंसिटिव जोन और जंगली जानवरों से संबंधित विषयों पर चर्चा हुई।
उत्तराखंड सदन में हुए इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, सेनाप्रमुख बिपिन रावत, एनटीआरओ के प्रमुख आलोक जोशी, कोस्टगार्ड के प्रमुख राजेंद्र सिंह, गेल के सीएमडी बीसी त्रिपाठी, एयर इंडिया के सीएमडी अश्विनी लोहानी, गेल के डायरेक्टर मार्केटिंग गजेंद्र सिंह, ओएनजीसी के डायरेक्टर (एचआर) डीडी मिश्रा, विदेश मंत्रालय में ज्वाइंट सेक्रेटरी आलोक डिमरी, हंस फाउंडेशन के गुरुमाता मंगला एवं उनके पति भोले जी महाराज, उत्तराखंड के मुख्य सचिव एस रामास्वामी, सीएम के पीएस ओम प्रकाश, वरिष्ठ पत्रकार मनजीत नेगी व अन्य गणमान्य लोग शामिल हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बताया कि उनकी सरकार प्रदेश के गरीब तबके के लिए कई कार्यक्रमों की शुरुआत कर रही है। इनमें उन सुझावों को भी शामिल किया गया हैए जो इससे पहले एनएसए डोभाल के आवास पर कुछ माह पूर्व हुई इस तरह की मंत्रणा में सामने आए थे।
दरअसलए नई सरकार बनने के बाद एनएसए डोभाल ने सीएम रावत और उत्तराखंड की प्रबुद्ध शख्सियतों को लंच पर बुलाया था। इस दौरान कई अहम सुझाव नए मुख्यमंत्री को दिए गए थे। इस बार मुख्यमंत्री ने सभी प्रमुख शख्सियतों को उत्तराखंड सदन में भोज पर आमंत्रित किया और उनके द्वारा शुरू किए गए कार्यों की जानकारी दी। निरंतर हो रही इन बैठकों से यह बात उभरकर सामने आई है कि प्रवासी उत्तराखंडी और विशेष रूप से शीर्ष पदों पर बैठे उत्तराखंड के सपूत पहाड़ की स्थिति को लेकर चिंतित हैं। वे उत्तराखंड में संभावनाओं को सही दिशा देने पर लगातार चिंतन कर रहे हैं।
प्रदेश से पलायन की समस्या पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और जरूरी सुविधाओं को बढ़ावा देने के अलावा एक व्यापक योजना शुरू करने पर विचार किया जा रहा है। एनएसए डोभाल ने पहाड़ों पर रोजगार के क्षेत्र में काम किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहाए पहाड़ के विकास और पलायन को रोकने के लिए बिजलीए पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं को गांवों तक पहुंचाना जरूरी है। हल्के.फुल्के अंदाज में एनएसए डोभाल ने कहा कि उनके गांव को जाने वाली सड़क की स्थिति अच्छी नहीं है। पानी की सप्लाई भी बाधित रहती है। इस पर सीएम ने जल्द कदम उठाने का आश्वासन दिया।
वहीं सेना प्रमुख रावत ने श्रीनगर मेडिकल कॉलेज को सेना की निगरानी में देने के मुद्दे पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि सेना के रिटायर्ड डॉक्टरों की मदद से उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को गति दी जा सकती है। जल्द ही प्रदेश सरकार को 40 से ज्यादा रिटायर्ड डॉक्टर मिल जाएंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि यदि उन्हें पहले ही डॉक्टरों की तैनाती की जगह की जानकारी मिल जाएगी तो डॉक्टरों को वहां भेजने में सहूलियत होगी।
कोस्ट गार्ड के डीजी राजेंद्र सिंह ने भर्ती केंद्र के लिए जमीन के मुद्दे पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि कोस्ट गार्ड भर्ती केंद्र के संबंध में रक्षा मंत्रालय को प्रस्ताव भेज दिया गया है। उधरए हंस फाउंडेशन की गुरुमाता मंगला ने राज्य सरकार के साथ मिलकर प्रदेश में कई क्षेत्रों में निवेश करने की बात कही। गेल के सीएमडी बीसी त्रिपाठी ने हरिद्वारए ऋषिकेश और देहरादून में सीएनजी पंप खोलने और घरों में पीएनजी पहुंचाने के लिए सीएम से विचार-विमर्श किया। ओएनजीसी के डायरेक्टर मानव संसाधन डीडी मिश्रा ने सीएम रावत से कहा कि ओएनजीसी उत्तराखंड के विकास के लिए प्रदेश सरकार के साथ मिलकर काम करने को तैयार है।
इसके अलावाए सभी गणमान्य लोगों उत्तराखंड से हो रहे विस्थापन पर एक स्वर में चिंता जताई। हाल की बाढ़ए भूस्खलन के संदर्भ में भी सभी ने अपने-अपने सुझाव रखे। बरसात में भूस्खलन पर कोस्ट गार्ड के प्रमुख राजेंद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश में वृक्षारोपण को बढ़ावा दिए जाने की जरूरत है। साथ ही बागवानी को लेकर विशेष कार्यक्रम शुरू कर रोजगार के अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं। सभी लोगों का मानना था कि उत्तराखंड में अपार संभावनाएं हैं और उन्हें सही दिशा देने की जरूरत है।
हिल – मेल ब्यूरो







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