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नए स्वरूप में केदारपुरी

देवभूमि में आस्था का उत्सव हिल-मेल ब्यूरो, देहरादून ‘जय बदरी-केदारनाथ, गंगोत्री जय-जय, जमुनोत्री जय-जय, जय बाबा केदार तेरो जन ऊंचो स्थान, हो तने ऊंचो राखी ये देसा कु मान….।’ कुछ ऐसी ही कामना के साथ आस्था का सबसे बड़ा मेला उत्तराखंड की चारधाम यात्रा शुरू

देवभूमि में आस्था का उत्सव

हिल-मेल ब्यूरो, देहरादून

‘जय बदरी-केदारनाथ, गंगोत्री जय-जय, जमुनोत्री जय-जय, जय बाबा केदार तेरो जन ऊंचो स्थान, हो तने ऊंचो राखी ये देसा कु मान….।’ कुछ ऐसी ही कामना के साथ आस्था का सबसे बड़ा मेला उत्तराखंड की चारधाम यात्रा शुरू हो चुकी है। उत्तराखंड के चारों धाम बदरी-केदार, गंगोत्री-यमुनोत्री तीर्थ यात्रियों की चहल पहल से गुंजायमान हैं। शुरुआती पखवाड़े में ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है। यूं तो देवभूमि की हर सुबह मंदिर की घंटियों के साथ शुरू होती है लेकिन चारधाम यात्रा सीजन में देश-दुनिया के तीर्थयात्रियों की मौजूदगी के साथ आस्था का ये माहौल अपने चरम पर पहुंच जाता है। केदारपुरी के भव्य स्वरूप भी भक्तों को विस्मित कर रहा है..।

इस बार की चारधाम यात्रा खास है। भगवान शिव के भक्तों के लिए केदारपुरी का कायाकल्प आंखों को विस्मत करने वाला है। केदारपुरी उस विराट स्वरूप में चमक रही है, जिसकी कल्पना लिए हर शिवभक्त केदारनाथ पहुंचता है। आने वाले कुछ महीनों में केदारनाथ का यह स्वरूप और भव्य हो जायेगा, क्योंकि यहां चल रहे विकास कार्य पूरे हो जाएंगे। 2013 की विनाशकारी बाढ़ के बाद केदारनाथ के पुनर्निमार्ण के लिए किया गया भागीरथ प्रयास अपना रंग दिखाने लगा है।

चारधाम यात्रा की शुरूआत अक्षय तृतीया के दिन 18 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुलने के साथ हुई। मौसम की वजह से पिछले करीब छह महीने से बंद पड़े गंगोत्री मंदिर के कपाट दोपहर एक बजकर15 मिनट पर खोले गएष इससे पहले यमुनोत्री मंदिर के द्वार दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर खुले। भगवान आशुतोष के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल केदारनाथ धाम के कपाट 29 अप्रैल की सुबह 6.15 बजे विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। पहले ही दिन श्रद्धालुओं की संख्या ने रिकार्ड तोड़ दिया। केदारनाथ आपदा के बाद पहली बार पांच हजार से ज्यादा श्रद्धालु कपाट खुलने के अवसर के साक्षी बने। तड़के से ही केदारनाथ धाम में बम-बम भोले और बाबा केदार के जयकारे गूंजते रहे। तड़के चार बजे मंदिर के कपाट खुलने की प्रक्रिया शुरू हुई। सबसे पहले बाबा केदार की चल विग्रह उत्सव डोली को मंदिर में प्रवेश कराया गया। इसके बाद रावल और पुजारी मंदिर के भीतर गए और धार्मिक अनुष्ठान किया। गर्भगृह में विधिवत पूजा-अर्चना हुई। रुद्राभिषेक, जलाभिषेक समेत सभी धार्मिक अनुष्ठान विविधत संपन्न कराने के बाद ठीक सवा छह बजे मंदिर के कपाट भक्तों के दर्शनार्थ खोल दिए गए।

बदरीनाथ धाम के कपाट 30 अप्रैल की सुबह ब्रह्ममुहूर्त में 4:30 बजे पूरे विधिविधान और पूजा अर्चना के साथ दर्शन के लिए खोले गए। देश विदेश से आए हजारों श्रदालुओं ने बदरी-विशाल के जय कारे के साथ अखंड ज्योति के दर्शन किये। कपाट खुलने के अवसर पर परंपरा के मुताबिक, सेना के बैंड की मधुर ध्वनि सुनाई पड़ी। मंदिर समिति के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने बताया कि कपाट खुलने के समय उद्धव और कुबेर जी की मूर्तियों को गर्भ गृह में भगवान बदरी विशाल के साथ विराजमान किया गया। शीतकाल में छह महीने के लिए भगवान बदरी विशाल के साथ विराजमान लक्ष्मी जी को गर्भगृह से बाहर लाकर लक्ष्मी मंदिर में विराजमान किया गया।

दर्शन के लिए आने वाले तीर्थ यात्रियों की संख्या देखकर लगता ही नहीं कि 2013 में इस हिमालयी सूबे को इतनी बड़ी आपदा का सामना करना पड़ा था। बदरीनाथ के कपाट खुलने के बाद 3 मई तक दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 59,461 के आंकड़े को पार कर गई। केदारनाथ धाम में इस समय तक 51,856 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। दो मई तक गंगोत्री में 32,818 श्रद्धालु और यमुनोत्री में 34,830 श्रद्धालु दर्शन कर चुके थे। बदरीनाथ में दो दिन में ही पचास हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने दर्शन किए ये अपने आप में बड़ी बात है।

बदरी-केदार मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह ने बताया कि कपाट खुलने के दिन केदारनाथ धाम में पांच हजार से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे। 2013 की आपदा के बाद यह पहला मौका था जब कपाट खुलने के दिन इतनी संख्या में यात्री केदारनाथ पहुंचे। उन्होंने बताया कि दुनिया में सुरक्षित चारधाम यात्रा का संदेश गया है। इससे श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि हो रही है। वर्ष 2017 में 4.09 लाख भक्तों ने गंगोत्री, 3.92 लाख ने यमुनोत्री और 4.71 लाख ने केदारनाथ और 8.85 लाख ने बदरीनाथ धाम के दर्शन किए। उत्तराखंड सरकार को उम्मीद है कि श्रद्धालुओं का यह आंकड़ा इस बार 30 लाख तक पहुंच सकता है। जून 2013 की आपदा के बाद यात्रियों की संख्या का रिकार्ड इस बार टूटने की उम्मीद है।

बदल गई केदारनाथ धाम की सूरत

केदारनाथ दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए इस बार काफी कुछ चीजें बदली हुई मिल रही हैं। पिछले वर्ष अक्तूबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केदारनाथ को भव्य रूप देने के लिए कई योजनाओं का शिलान्यास किया था। इसके बाद कर्नल अजय कोठियाल की अगुवाई वाली नेहरू पर्वतारोहण संस्थान की टीम ने मंदिर परिसर का कायाकल्प कर दिया है। मंदिर का परिसर पहले से कहीं ज्यादा बड़ा हो गया है। धाम के प्रवेश मार्ग की विशेष साज-सज्जा की गई है। केदारघाटी की सुरक्षा के लिए मंदाकिनी नदी के किनारे सुरक्षा दीवारें खड़ी की जा रही हैं। पुजारियों के आवास स्थानीय वास्तुकला के साथ बनाए जा रहे हैं।यात्रियों के ठहरने की भी उचित व्यवस्था की गई है।

मेडिकल सहायता के लिए खास व्यवस्था

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के अनुसार, चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं को राज्य में कहीं भी आने-जाऩे और रहने के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने को राज्य सरकार पूरी तरह प्रयासरत है। यात्रा मार्गो पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मेडिकल रिलीफ पोस्ट, चिकित्सा इकाइयां, एम्बुलेंस, ब्लड बैंक, ट्रामा सेंटर आदि की समुचित व्यवस्था की गई है। इसके तहत केदारनाथ एवं यमुनोत्री के पैदल यात्रा मार्गों पर प्रत्येक एक किमी पर डॉक्टरों की व्यवस्था की गई है।अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में श्रद्धालुओं को हृदय से सम्बन्धित समस्याओं के त्वरित निदान के लिएबद्रीनाथ धाम में ‘‘हाइपरबेरिक ऑक्सीजन चैंबर’’ लगाया गया है। केदारनाथ, गंगोत्री एवं यमुनोत्री में भी यह व्यवस्था शुरू होने वाली है। स्वास्थ्य विभाग को स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल गाइडलाइन का अनुपालन करने के निर्देश दिए गए हैं। यात्रा मार्ग पर किसी भी तरह की दुर्घटना होने पर विशेष त्वरित राहत दल की व्यवस्था की गई है। पीड़ितों को निकट अस्पताल अथवा आवश्यकतानुसार जौलीग्रांट एयरपोर्ट तक ले जाने हेतु मुफ्त वाहन उपलब्ध है। हेल्पलाइन नम्बर-104 के माध्यम से चारधाम यात्रा मार्गों पर श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।

अधिकारी/फार्मेसिस्ट एवं अन्य पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती कर दी गई है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप वाले लोगों एवं वरिष्ठ नागरिक को आकस्मिक उपचार के लिए इकोस्प्रिन एवं सोर्बिट्रेट दवाओं की व्यवस्था की गई है। अधिक ऊंचाई पर होने वाले रोगों के उपचार के लिए प्रशिक्षित ‘सिक्स सिगमा हेल्थ केयर’द्वारा चारों धाम के यात्रा मार्गों पर 21 जून तक विशिष्ट सेवाएं दी जाएंगी। इस हेल्थ केयर सेंटर द्वारा केदारनाथ धाम में कार्डियोलॉजिस्ट, पल्मोनोलॉजिस्ट की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।
– नितेश झा, सचिव स्वास्थ्य, उत्तराखंड

कुछ मुश्किल ऑल वेदर रोड से

चारधाम यात्रा को सफल बनाने के लिए उत्तराखंड पुलिस ने भी पूरे बंदोबस्त किए हैं। बाहर से आने वाले वाहनों की लगातार सघनता के साथ जांच की जा रही है। यात्रा को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए निर्भीक पुलिस यूनिट बनाई गई है। हालांकि यात्रा की शुरुआत में केदारनाथ मार्ग पर कुछ अव्यवस्थाओं के चलते श्रद्धालुओं को दिक्कतें भी आईं। सोनप्रयाग से गौरीकुंड में पांच किलोमीटर तक वाहन की व्यवस्था न होने से तीर्थयात्रियों को पैदल ही मंदिर तक का सफ़र तय करना पड़ा। घोड़े, खच्चर, डंडी, कुंडी या पालकी की व्यवस्था न होने के चलते श्रद्धालुओं को ये दिक्कतें झेलनी पड़ीं। केदारनाथ मंदिर तक जाने के लिए श्रद्धालुओं को पहले 17 किलोमीटर पैदल चलना होता था। लेकिन सोनप्रयाग से गौरीकुंड तक भी अन्य विकल्प तैयार नहीं हुए जिससे उनका पैदल सफ़र 22 किलोमीटर हो गया। ऑल वेदर रोड के निर्माण के चलते भी यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना करना पड़रहा है। पहले तय किया गया था कि यात्रा के दौरान ऑल वेदर रोड का कार्य रोक दिया जाएगा। लेकिन बाद में सड़क और परिवहन मंत्रालय ने इससे मना कर दिया।

बायोमैट्रिक रजिस्ट्रेशन

पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर ने बताया कि त्रिलोक सिक्योरिटी सिस्टम द्वारा राज्य में निशुल्क बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन किए जा रहे हैं। यात्रा मार्ग पर कुछ होमस्टे भी उपलब्ध हैं और इनके लिये उत्तराखंड टूरिज्म की वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा है।

खुद की तैयारी भी है जरूरी

उत्तराखंड की दुर्गम पहाड़ियों के बीच चारधाम यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं को कुछ मुश्किलों का सामना करना ही पड़ता है। यात्रा को लेकर कुछ सावधानियां खुद से भी बरतें। सबसे पहले तो मौसम की जानकारी जुटाते रहें। कई बार सड़क घंटों के लिए जाम हो जाती है, लिहाजा अपने साथ पैक्ड फूड रखें। पैदल चलने के लिए छड़ी का सहारा बहुत कारगर होगा। सामान्य बीमारियों से जुड़ी दवाइयां भी साथ रखें। फस्ट एड बॉक्स जरूर बनाएं।

आपदा प्रबंधन कंट्रोल रूम नंबर
01352710232
01352710233

चारधाम कंट्रोल रूम के नंबर
01352559898
01352552628
01352552627
01352552626,

टोल फ्री नंबर – 1364

इस बार प्रसाद भी चर्चा में

इस बार चारधाम यात्रा के दौरान प्रसाद भी चर्चा में है। केदारनाथ यात्रा शुरू होने के मात्र चार दिन में ही दस लाख रुपये का स्थानीय प्रसाद बिक चुका है। प्रसाद के एक लाख पैकेट पहले ही तैयार कर केदारनाथ पहुंच चुके हैं। विभिन्न स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं स्थानीय उत्पादों से केदारनाथ का प्रसाद तैयार कर रही हैं। इस प्रसाद को यात्री काफी पसंद कर रहे हैं। केदारनाथ के साथ ही सोनप्रयाग में भी प्रसाद के लिए स्टोर बनाया गया है।
ये है प्रसाद में –

चौलाई के लड्डू, चौलाई का चूरमा, स्थानीय धूप बत्ती, स्थानीय शहद, मंदाकिनी व सरस्वती नदी का जल, बदरी-केदार की फोटो और बाबा केदार की भभूत (हवन कुंड की राख)। यात्रियों को प्रसाद रिंगाल की टोकरी, जूट-कपड़े के बैग और कागज के पैकेट में उपलब्ध कराया जा रहा है।

प्रसाद की कीमत

कागज के पैकेट में: 30 रुपये
जूट व कपड़े का बैग: 65 रुपये
रिंगाल की टोकरी में: 100 रुपये

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