नम आंखों से गांव को निहारते रहे डोभाल

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल 21 और 22 जून को दो दिन के निजी दौरे पर पौड़ी गढ़वाल पहुंचे। वह 23 साल बाद अपने पैतृक गांव घीड़ी में कुल देवता की पूजा में शिरकत करने पहुंचे थे। इससे पहले सर्किट हाउस में पत्रकारों से अनौपचारिक

Ajit Doval 1राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल 21 और 22 जून को दो दिन के निजी दौरे पर पौड़ी गढ़वाल पहुंचे। वह 23 साल बाद अपने पैतृक गांव घीड़ी में कुल देवता की पूजा में शिरकत करने पहुंचे थे। इससे पहले सर्किट हाउस में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में श्री डोभाल उत्तराखंड में विकास की धीमी रफ्तार पर व्यथित दिखे। उन्होंने कहा, राज्य का जितना विकास होना चाहिए उम्मीद के मुताबिक उतना नहीं हुआ। गांवों से हो रहे पलायन के पीछे इसे भी वह एक कारक के रूप में देखते हैं। अजीत डोभाल बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले व्यक्ति हैं।

श्री डोभाल 21 जून को सड़क मार्ग से पौड़ी पहुंचे। मीडिया और उनके पैतृक गांव के कुछ लोग पहले से ही वहां मौजूद थे। उन्होंने किसी को निराश नहीं किया। गार्ड ऑफ ऑनर के बाद वह मौजूद लोगों से गर्मजोशी से मिले तो मीडिया के आग्रह पर उनसे भी मुखातिब हुए। हालांकि, रक्षा जैसे मसले से उन्होंने खुद को अलग रखा। बोले, मैं निजी यात्रा पर हूं, इस समय ऐसे मुद्दों पर कुछ कहना ठीक नहीं है। अलबत्ता, श्री डोभाल ने खुद कोajit-dobhal-53a599b9517ac_exlst उत्तराखंड के साथ गहराई से जरूर जोड़ा। उन्होंने कहा कि मैं अपनी मां की गोद में आया हूं, यहां आकर काफी सुकून मिल रहा है।

सर्किट हाउस में मुलाकात के लिए पहुंचे इलाके के लोगों से उन्होंने हिंदी में कम, गढ़वाली में ज्यादा बातें कर उत्तराखंड के करीबी होने का एहसास कराया। बड़े ओहदे पर होने के बाद भी श्री डोभाल की सादगी और अपनी माटी से गहरा जुड़ाव देख आगवानी को पहुंचे अफसर भी उनके कायल हुए।

उनके आने की खबर के बाद से ही गांव के लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। जैसे ही डोभाल गांव पहुंचे ग्रामीणों ने पारंपरिक तरीके से उनका स्वागत किया। वह अपने पैतृक गांव घीड़ी पहुंचने पर भावुक हो उठे। डोभाल कुछ देर तक नम आंखों से गांव को निहारते रहे। इस दौरान सैकड़ों ग्रामीणों के साथ उन्होंने कुलदेवी बाल कुंवारी के मंदिर में पूजा-अर्चना की। तकरीबन दो घंटे यहां ठहरने के बाद वह दिल्ली रवाना हो गए। वह इससे पहले 1991 में गांव आए थे।

दरअसल, बाल कुवांरीAjit Doval 2 घीड़ी के निवासियों की कुलदेवी हैं और प्रत्येक वर्ष जून में कुलदेवी की पूजा अर्चना की जाती है। बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने कुलदेवी की पूजा को पहुंचे, खास बात इस बार यह रही कि पूजा अर्चना के लिए देवी के दर पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डोभाल भी आए। पत्नी, बेटा, बहू और दो पोतियों संग सालों बाद गांव आए। पूजा अर्चना के दौरान कई बार डोभाल की आंखें छलक आई।

पूजा अर्चना के बाद उन्होंने ग्रामीणों से मुलाकात की। उनकी कुशलक्षेम पूछी और गांव के बारे में अपनी जिज्ञासा शांत की। इस दौरान उन्होंने बच्चों को दुलार किया तो बुजर्गो से आशीर्वाद लिया। हमउम्र के साथ दोस्ताना सुलूक किया। ग्रामीण इस बात से गौरवान्वित अनुभव कर रहे थे कि उनके गांव का लाल आज इतने बड़े ओहदे पर है। तकरीबन दो घंटे गांव में रुकने के बाद वह दिajit-dobhal-at-his-native-village-53a6c52fdddec_exlstल्ली के लिए रवाना हो गए। कई क्षेत्रवासियों से उन्होंने क्षेत्र के हालात की जानकारी हासिल की।

अजित डोभाल के 22 जून को अपने पैतृक गांव घीड़ी आने की खबर के बाद लोनिवि भी हरकत में आया। उसने गांव को जाने वाले मोटर मार्ग का डामरीकरण कार्य तेजी से शुरू कर दिया। वहीं, प्रशासन के लोग और गौचर से आए आइटीबीपी के अधिकारी भी गांव का जायजा लेने पहुंचे। प्रशासन के पास उनके आगमन का कोई फोटोकाल नहीं था, लेकिन जैसे ही उनके गांव आने की खबर लगी सब अधिकारी हरकत में आ गये।

हिलमेल ब्यूरो

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