आखिरकार कई दिनों तक चली जोर-आजमाइश के बाद उत्तराखंड भाजपा को उसका नया प्रदेश अध्यक्ष मिल ही गया। पूर्व मंत्री और वर्तमान में विधानसभा सदस्य तीरथ सिंह रावत को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने उत्तराखंड में पार्टी की कमान सौंप दी। लगता है कि पिछले
आखिरकार कई दिनों तक चली जोर-आजमाइश के बाद उत्तराखंड भाजपा को उसका नया प्रदेश अध्यक्ष मिल ही गया। पूर्व मंत्री और वर्तमान में विधानसभा सदस्य तीरथ सिंह रावत को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने उत्तराखंड में पार्टी की कमान सौंप दी।
लगता है कि पिछले विधानसभा चुनाव में सत्ता से बाहर होने वाली भाजपा ने हार से कोई सबक नहीं लिया क्योंकि तब भी पार्टी की अंदरूनी कलह को ही इसका मुख्य कारण माना गया और अब पार्टी अध्यक्ष बनने के लिए फिर अंदरूनी कलह सामने आ गया है। पार्टी के अंदर यह विभिन्न धु्रव ही रहे, जिनकी वजह से प्रदेश भाजपा के नेता नए प्रदेश अध्यक्ष के रूप में किसी एक नाम पर सर्वानुमति नहीं बना पाए।
उत्तराखंड भाजपा में मुख्यतया तीन दिग्गजों का वर्चस्व रहा है। ये तीनों पूर्व मुख्यमंत्री भी हैं, भुवन चंद्र खंडूड़ी, भगत सिंह कोश्यारी और रमेश पोखरियाल निशंक। राज्य गठन के बाद से प्रदेश भाजपा की पूरी सियासत कमोवेश इन्हीं तीन दिग्गजों के इर्दगिर्द घूमती रही है। इनमें से जब भी कोई दो दिग्गज एक साथ खड़े हुए, वही पार्टी पर हावी नजर आया है।
साफ है कि उत्तराखंड में खासा मजबूत जनाधार रखने वाली भाजपा लगातार अंदरूनी धड़ेबाजी से जूझती आ रही है और इससे पार्टी को नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। तीरथ सिंह रावत के लिए अध्यक्ष का पद एक चुनौतीपूर्ण कार्य है उनको न केवल पार्टी को एक जुट रखना है बल्कि आने वाले पंचायत चुनाव और 2014 के लोकसभा चुनावों में भी अच्छे परिणाम लाकर दिखाना है। तीरथ सिंह रावत ने उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष का पद संभालकर जो कांटों भरा ताज अपने सिर पहना है वह इसमें कितने सफल हो पायेंगे यह तो आने वाला समय ही बतायेगा।
हिलमेल ब्यूरो







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