जम्मू कश्मीर में पिछले कुछ दिनों में हुई भीषण वारिश के कारण यहां का जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। भीषण बाढ़ से मची तबाही के बीच सेना और एनडीआरएफ मिलकर अब तक करीब एक लाख से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचा चुकी
जम्मू कश्मीर में पिछले कुछ दिनों में हुई भीषण वारिश के कारण यहां का जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। भीषण बाढ़ से मची तबाही के बीच सेना और एनडीआरएफ मिलकर अब तक करीब एक लाख से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचा चुकी है। हालांकि लाखों लोगों को अब भी यहां मदद का इंतजार है।
इसी बीच सेनाध्यक्ष ने भी साफ कर दिया है कि जब तक सेना के जवान आपदा में फंसे आखिरी व्यक्ति को सुरक्षित नहीं निकाल लेती है तब तक वे बैरक में वापस नहीं लौटेंगे। यह वक्तव्य प्रमाण है कि भारतीय सेना ने किस संकल्प-शक्ति के साथ खुद को बचाव कार्यों में झोंका है। सेना के लगभग 30 हजार जवान इन कार्याें में लगे हुए हैं जिनमें से 21 हजार जवान श्रीनगर में और 9 हजार जवान जम्मू क्षेत्र में नियुक्त हैं।
जम्मू-कश्मीर के लोग अवश्य ही भारतीय सेना के शुक्रगुजार होंगे। फिलहाल वहां प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहे लाखों लोगों के लिए उम्मीद की किरण सिर्फ सेना के जवान ही हैं। राज्य में अचानक तेज बारिश से बाढ़ का जैसा कहर टूटा, वहां की कई पीढ़ियों ने वैसा नहीं देखा था। पानी सेना की छावनियों में भी भरा। मगर सैन्य अधिकारियों और जवानों ने अपनी फिक्र नहीं की।
वायु सेना के हेलीकॉप्टर और विमान दिन रात एक कर बाढ़ में फंसे लोगों को निकालने में लगे हुए हैं। भारतीय वायु सेना के बारह एएन-32, चार आईएल-76, पांच सी-130जे और दो सी-17 परिवहन विमान के साथ लगभग 60 विमानों और हेलीकाॅप्टरों को राहत और बचाव कार्य में लगाया गया है।
सेना ने राहत एवं बचाव अभियान के लिए अपनी 329 टुकडियां तैनात की हंै। जिनमें से 244 श्रीनगर क्षेत्र में और 85 जम्मू क्षेत्र में तैनात की गई है। इसके अलावा सेना बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुएं जैसे पानी, बिस्कुट और कम्बल बांट रही है। सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवाओं की 80 मेडिकल टीमें बाढ़ प्रभावित लोगों के उपचार में जुटी हैं। इसके अलावा नौसेना के मरीन कमांडो भी राहत कार्यों में लगे हुए है।
बाढ़ प्रभावितों के लिए विमान के जरिए खाना, पानी और औषधियां पहुंचाई जा रहा है तथा राज्य के विभिन्न हिस्सों में राहत शिविर लगाए गए हैं। भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टरों और विमानों ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कई टन राहत सामग्री गिराई है।
बचाव अभियान में मदद करने के लिए नई दिल्ली से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में इंजीनियर टास्क फोर्स भेजी गई है। ये अपने साथ नौकाएं और जीवन रक्षक उपकरण ले गये। नई दिल्ली में आईडीएस के मुख्यालय में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और पल-पल की जानकारी दी जा रही है।
रिपोर्टों से पता चला है कि कुछ अलगाववादी तत्व सेना द्वारा किये जा रहे राहत कार्यों में बाधा डालने के कोशिश में लगे हुए हैं और सेना और उसके उपकरणों को नुकसान पहुंचा रहे हंै। राज्य सरकार को चाहिए कि सेना द्वारा किए जा रहे राहत कार्य को सफल बनाने में वह सेना की मदद करे। जिससे कि इन शरारती तत्वों को सबक सिखाया जा सके और जो लोग इस आपदा से प्रभावित हुए हैं उन्हें मदद मिल सके।
जहां तक जम्मू कश्मीर के लोगों की बात की जाए तो वह सेना को मसीहा के रूप में देख रहे हैं। वह कह रहे हैं कि अगर सेना नहीं होती तो आज हम शायद जीवित नहीं रह पाते। यहां आए सैलाब ने उन लोगों की मानसिकता बदल दी है, जो कभी सेना पर पत्थर बरसाते थे। इस संकट की घड़ी में आज वह सेना को मसीहा मान रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने सशस्त्र बलों और एनडीआरएफ कर्मियों के पूरे समन्वय के साथ किए जा रहे राहत और बचाव कार्य की सराहना की है। प्राकृतिक आपदा का जायजा लेने के लिए खुद 7 सितम्बर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर का दौरा किया। प्रधानमंत्री ने लोगों का दुख-दर्द साझा किया। राज्य के राज्यपाल एनएन वोहरा, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और वरिष्ठ अधिकारियों ने बाढ़ से हुए नुकसान की जानकारी प्रधानमंत्री को दी। इस आपदा के कारण हजारों गांव प्रभावित हैं।
प्रधानमंत्री के जम्मू कश्मीर दौरे से पहले गृह मंत्री ने बाढ़ से हुई तबाही के बारे में प्रधानमंत्री को जानकारी दी थी। उन्होंने बताया कि राज्य के लोग किस बुरी स्थिति से गुजर रहे हैं। हालात की गंभीरता के मद्देनजर प्रधानमंत्री ने कैबिनेट सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संकट की समीक्षा के लिए बैठक की।
प्रधानमंत्री ने आपदा स्थिति का जायजा लेने के बाद कहा कि यह राष्ट्रीय स्तर की आपदा है और केंद्र सरकार संकट की इस घड़ी में राज्य सरकार और वहां की जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। प्रधानमंत्री ने अवलोकन किया कि त्रासदी की विकरालता के मद्देनजर राज्य आपदा राहत कोष के जरिए राज्य सरकार को उपलब्ध कराए जा रहे 11 अरब रुपये पर्याप्त नहीं होंगे।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार बाढ़ राहत और पुनर्वास के लिए राज्य सरकार को 10 अरब रुपये की अतिरिक्त विशेष परियोजना सहायता उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि हालात का समुचित सर्वेक्षण करने के बाद जरूरी हुआ तो अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
इस आपदा में मारे गए प्रत्येक व्यक्ति के निकट संबंधी को 2 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को 50,000 रुपये दिए जाएंगे। यह राशि प्रधानमंत्री राहत कोष से उपलब्ध कराई जाएगी।
केन्द्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने जम्मू और कश्मीर में बाढ़ की स्थिति की समीक्षा करने के बाद राष्ट्रीय आपदा राहत बल (एनडीआरएफ) को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल और टुकड़ियां भेजने का निर्देश दिया। गृह मंत्री ने मंत्रालय को राहत कार्यों के लिए जम्मू और कश्मीर में लगभग 70 नौकाएं भेजने का भी निर्देश दिया है।
राज्य में राहत और बचाव कार्यों की सक्रियतापूर्वक निगरानी और समन्वय करने के लिए श्रीनगर, जम्मू और नई दिल्ली में नियंत्रण कक्षों की स्थापना की गई है। राजनाथ सिंह ने सभी सामाजिक संगठनों और गैर-सरकारी संगठनों से भी जम्मू और कश्मीर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए अपने संसाधन जुटाने की अपील की है।
देश में जब कभी भी कोई प्राकृतिक आपदा आई है इससे निपटने
में सेनाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सेनाओं का काम देश की रक्षा करना होता है और जब भी देश के ऊपर कोई भी खतरा पैदा होता है तो सेना उससे निपटने में कामयाब रही है। चाहे वह बाहरी आक्रमण हो या प्रकृति का कहर। सेनाओं ने हमेशा ही पूरी निष्ठा से अपने कर्तव्यों का निर्वाहन किया है।
पिछले साल उत्तराखंड में भी प्रकृति ने अपना कहर बरपाया था उससे निपटने में भी सेना का अहम् योगदान रहा। इस आपदा के कारण कई सौ लोगों की जाने गई और बड़ी मात्रा में जान माल का नुकसान हुआ।
उस समय कहा गया था कि अगर मौसम विभाग की चेतावनी पर गौर किया जाता तो शायद इतना नुकसान होने से बचा जा सकता था और वही बात अब जम्मू कश्मीर के बारे में भी कही जा रही है। मौसम विभाग की ओर से जो पूर्व चेतावनी दी जाती है उस पर अमल करने की जरूरत है। तभी हम ऐसी प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले भारी जान माल के नुकसान को रोक सकते हैं।
वाई एस बिष्ट








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