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भारत की पाकिस्तान को सख्त चेतावनी

पाकिस्तानी सेना के जवानों ने 8 जनवरी को घने कोहरे और जंगल का फायदा उठाते हुए नियंत्रण रेखा पार कर भारतीय सीमा के अंदर दो भारतीय जवानों, लांसनायक हेमराज और सुधाकर सिंह, को जिस तरह से मारा उससे कारगिल संघर्ष के दौरान मारे गये कैप्टन सौरभ कालिया की याद ताजा हो गयी। इस घटना के बाद पूरे देश में पाकिस्तान के खिलाफ आक्रोश का माहौल है। प्रधानमंत्री से लेकर सेनाध्यक्ष ने इस घटना की घोर निंदा की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे में पाकिस्तान के साथ जो शान्ति प्रक्रिया चल रही है उस पर बुरा असर पड़ सकता है। सेना प्रमुख ने भी इस घटना पर अपना विरोध व्यक्त किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय सैनिकों की हत्या और उनके शवों को क्षत-विक्षत करने के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। डॉक्टर मनमोहन सिंह ने कहा कि नियंत्रण रेखा पर ऐसी बर्बर कार्रवाई के बाद पाकिस्तान के साथ संबंध सामान्य नहीं रह सकते। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच शांति प्रक्रिया का भविष्य अब इस पर निर्भर है कि पाकिस्तान क्या उचित कदम उठाता है।

सेना प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह ने कहा है कि नियंत्रण रेखा पर अब पाकिस्तान की ओर से फायरिंग हुई तो उनकी सेना इसका मुहतोड़ जवाब देगी। मीडिया को संबोधित करते हुए जनरल सिंह ने कहा कि पाकिस्तान को जवाब देने के लिए जगह और वक्त उनकी सेना तय करेगी। दो भारतीय जवानों की शहादत के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि उस मामले में पाकिस्तान ने पहले मुआयना कर पूरी तैयारी की थी और इसे एक साजिश के तहत अंजाम दिया गया। सेना प्रमुख ने कहा कि 6 जनवरी के हमले की पूरी जिम्मेदारी पाकिस्तान की थी और इस बारे में उसके सारे आरोप गलत हैं। उनके मुताबिक यह घटना माफी के काबिल नहीं है।

दोनों शहीद जवानों-हेमराज और सुधाकर सिंह के परिवार के प्रति हमदर्दी जताते हुए सेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय सेना उनके साथ है। इस घटना के बाद सेना प्रमुख 16 जनवरी को हेमराज और 18 जनवरी को सुधाकर सिंह के गांव भी गये। उन्होंने कहा कि सेना की ओर से जो भी सहायता होगी वह उनके परिवार को दी जायेगी।

़रक्षा विशेषज्ञ और पूर्व जनरल (रिटायर्ड) शंकर रॉय चैधरी के अनुसार पुश्तिया में सन् 1971 में भी पाकिस्तानी सेना ने ऐसा ही किया था। तब उसने भारतीय सैनिकों की आंखें तक निकाल ली थीं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सेना कई बार अपना अमानवीय चेहरा दिखा चुकी है और हम मुंह से बोलते रहते हैं कि ऐसा नहीं होना चाहिए, नहीं होगा, यह हास्यास्पद है।

नियंत्रण रेखा के बार-बार उल्लंघन करने और अपनी गलती न मानने वाले पाकिस्तान पर आखिरकार भारत का कूटनीतिक दबाव काम आया। उसके बाद 14 जनवरी को पुंछ सेक्टर की नियंत्रण रेखा चकन-दा-बाग में भारतीय सेना की नॉर्दर्न कमांड के ब्रिगेडियर और पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों के बीच बातचीत हुई। इस बातचीत के बाद भी पाकिस्तानी सेना ने पांच बार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया है। पाकिस्तानी सेना ने उड़ी में चरांदा इलाके में और पुंछ में मेंढर में भी छोटे हथियारों से गोलीबारी की और बालनोई इलाके में मोर्टार से हमले किये। पाकिस्तान की ओर से 2009 में 28, 2010 में 44, 2011 में 51 और 2012 में 117 बार युद्धविराम का उल्लंघन किया जा चुका है।

भारत पर युद्ध भड़काने का आरोप लगा रहीं पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार एकाएक नरम पड़ गई हैं। उन्होंने कहा कि वे भारत के साथ बातचीत करना चाहती हैं। हिना रब्बानी खार आजकल अमरीका की यात्रा पर हैं अनुमान लगाया जा रहा है कि खार को अमरीका ने रुख पलटने के लिए राजी किया होगा। दूसरी ओर जिस पाकिस्तानी सेना की ओर से संघर्ष विराम के उल्लंघन की खबरें लगातार आ रही थीं और जो किसी भी सूरत में झुकने को तैयार नहीं दिख रही थी, उसने भी कहा है कि वह संघर्ष विराम की शर्तों का पालन करेगी।

कूटनीतिक स्तर पर या पर्दे के पीछे एकाएक ऐसा क्या हुआ कि पाकिस्तान के तेवर ढीले पड़ गए, इसकी वजह शायद कुछ समय बाद पता चले लेकिन सतह पर जो दिखता है उससे लगता है कि भारत ने एक के एक बाद जो कदम उठाए वह एक बड़ी वजह बना। दूसरी ओर आजकल पाकिस्तान के अंदरूनी हालात काफी खराब चल रहे हैं। वहां पर लगातार हो रहे प्रदर्शन और खून खराबे के कारण वह अपने आंतरिक मामलों में उलझा हुआ है। इस उथल-पुथल कारण वह भारत के खिलाफ अन्य देशों से नाराजगी मोल नहीं लेना चाहता।

वाई एस बिष्ट

Written by
Y S Bisht

लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद कई टीवी प्रोग्राम के लिए काम किया। एशिया डिफेंस न्यूज़ इंटरनेशनल (अडनी) से जुड़े। यह एजेंसी हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, मणिपुरी और असमिया में अपनी सेवाएं देती है। इसके अलावा एशिया डिफेंस न्यूज के नाम से एक मासिक पत्रिका भी निकालती थी। वर्ष 2013 में जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर हिल-मेल वेबसाइट शुरू की। फरवरी 2016 से हिल-मेल में बतौर संपादक कार्यरत। मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल के निवासी हैं।

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