भारत-म्यांमार सरहद पर सेना के शहीद 18 जवानों की शहादत का बदला अभी पूरा नहीं हुआ है। इसीलिए 6 डोगरा यूनिट के जवान चांदेल जिले के पार्लोंग इलाके में पिछले एक हफ्ते से बिना थके दिन रात कॉम्बिंग ऑपरेशन चला रहे हैं। 4 जून को
भारत-म्यांमार सरहद पर सेना के शहीद 18 जवानों की शहादत का बदला अभी पूरा नहीं हुआ है। इसीलिए 6 डोगरा यूनिट के जवान चांदेल जिले के पार्लोंग इलाके में पिछले एक हफ्ते से बिना थके दिन रात कॉम्बिंग ऑपरेशन चला रहे हैं। 4 जून को भारत-म्यांमार सरहद पर तैनात 6 डोगरा के जवान छुट्टी पर अपने घर लौट रहे थे। दो ट्रक में सवार ये जवान हंसी खुशी के मौहाल में घर जाने की जल्दी में थे। लेकिन तभी ऊँचे पहाड़ और जंगल का फायदा उठाकर एनएससीएन खापलांग, केवाईकेएल और केसीपी के आतंकवादियों ने घात लगाकर हमला कर दिया। इस हमले में सेना के 18 जवान शहीद हो गए।
आजतक संवाददाता मनजीत नेगी और कैमरामैन मोहसिन 6 डोगरा की एक घातक टुकड़ी के साथ उस इलाके में पहुंचे जहां पर आतंकवादियों ने सेना पर घात लगाकर हमला किया। भारत-म्यांमार सरहद के चांदेल जिले के पार्लोंग इलाके में उस हमले के निशान देखकर किसी का भी दिल दहल सकता है। घने जंगल के बीच सुनसान सड़क पर हमले का शिकार हुए सेना के दोनों ट्रक मौजूद हैं। आतंकी हमला कितना भीषण था ये इन जले हुए ट्रक को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है। दोनों ट्रक लोहे के ढांचे में तब्दील हो चुके हैं। जवानों की ड्रेस और रोजमर्रा का सामान खाक हो चुका है। खाने के बर्तन, चाय और पानी पीने का गिलास, ड्रेस सब कुछ हमले में जल गया है। मणिपुर की राजधानी इम्फाल से करीब 130 किलोमीटर दूर सरहद का ये इलाका काफी दुर्गम है। पूरे रास्ते में असम राइफल और सेना के जवानों की चैकसी है।
पिछले एक हफ्ते से डोगरा और असम राइफल
के जवान इस इलाके में लगातार कॉम्बिंग ऑपरेशन चला रहे हैं। दिल्ली में सेना मुख्यालय के निर्देश पर भले ही ये जवान कैमरे के सामने कुछ भी नहीं बोलने के लिए मजबूर हैं लेकिन इनके इरादों से साफ है कि जब तक ये अपने साथियों की शहादत का बदला नहीं ले लेते ये इस इलाके को छोड़ने को तैयार नहीं हैं। हालांकि 6 डोगरा यूनिट की इस इलाके से बदली हो चुकी है। बख्तरबंद जीप और ट्रक में सवार डोगरा यूनिट के जवान पूरी सावधानी और चैकसी के साथ इस इलाके में अपने साथियों के हत्यारे आतंकवादियों को तलाश रहे हैं। हालांकि भारतीय सेना के स्पेशल फोर्स के जवानों ने म्यांमार की सरहद के अंदर जाकर दर्जनों आतंकवादियों का काम तमाम कर दिया लेकिन 6 डोगरा के इन जवानों का गुस्सा अभी कम नहीं हुआ है। एक गोली एक दुश्मन की तर्ज पर ये आतंकवादियों के सफाये के लिए बेकरार हैं। सेना के कॉम्बिंग ऑपरेशन के डर से पार्लोंग का पूरा गाँव खाली हो चुका है। लोग अपने घरों में ताला लगाकर सुरक्षित स्थानों की ओर चले गए हैं। लोगों को डर है कि कहीं वे सेना और आतंकवादियों की मुठभेड़ का शिकार न हो जायंे।

इस बीच भले ही म्यांमार इस बात से इनकार कर रहा हो कि उसकी जमीन में आतंकी कैम्प नहीं चल रहे हैं लेकिन मणिपुर पुलिस के महानिदेशक शाहिद अहमद के मुताबिक म्यांमार में ट्रेनिंग कैम्प से निकलकर उग्रवादी मणिपुर सरहद से लगे पहाड़ी इलाकों में हिंसा फैलाने का काम कर रहे हैं। पोरस बॉर्डर होने की वजह से घुसपैठ आसान है। म्यांमार की सीमा के अंदर पिछले कई सालों से आतंकी ट्रेनिंग कैम्प चल रहे हैं। इन कैम्प में मणिपुर, नागालैंड और दूसरे कई राज्यों के उग्रवादियों को ट्रेनिंग दी जा रही है। इस वक्त मणिपुर समेत दूसरे राज्यों में 40 से ज्यादा आतंकी संगठन सक्रिय हैं। ये संगठन एकजुट होकर हमले की फिराक में हैं मणिपुर समेत कई पूर्वोत्तर राज्यों में सक्रिय उग्रवादी संगठन एक बार फिर अपना सर उठा रहे हैं। म्यांमार सरहद के अंदर उग्रवादियों के खिलाफ भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई के बाद मणिपुर समेत सभी पूर्वोत्तर राज्यों में हाई अलर्ट है।
म्यांमार सरहद के अंदर भारतीय सेना की कार्रवाई के बाद मोरे में उग्रवादियों ने ग्रिनेड से पुलिस मुख्यालय पर हमला बोला। इस हमले के बाद से इस पूरे इलाके में हाई अलर्ट है। स्थानीय पुलिस के आला अधिकारी मान रहे हैं कि उग्रवादी संगठन
इस इलाके में दोबारा अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाह रहे हैं। खुफिया जानकारी के मुताबिक एनएससीएन खापलांग, पीएलए, उल्फा समेत कई उग्रवादी संगठन मिलकर किसी बड़े हमले को अंजाम देना चाहते हैं। इन संगठनों के 20 से ज्यादा खूंखार उग्रवादी किसी बड़े हमले की फिराक में हैं।
भारतीय सेना की 6 डोगरा की टुकड़ी पर जानलेवा हमला करने वाले उग्रवादी संगठन एनएससीएन खापलांग ग्रुप का मुख्य साजिशकर्ता स्टार्सन भारतीय सेना की जवाबी कार्यवाही में बचकर भागने में सफल रहा। ऐसे में मास्टर माइंड स्टार्सन एनएससीएन खापलांग ग्रुप के मुखिया एस एस खापलांग के साथ मिलकर किसी बड़े हमले को अंजाम दे सकता है। वहीं दूसरी तरफ सेना के खुफिया सूत्रों के मुताबिक म्यांमार के तामु कस्बे से 70 किलोमीटर दूर कालिमियो के अस्पताल में भारतीय सेना की कार्यवाही में मारे गए 20 से ज्यादा उग्रवादियों के शव रखे हुए हैं जबकि 50 से ज्यादा घायलों का इलाज चल रहा है। लेकिन म्यांमार के विरोध के बाद अब भारतीय सेना इस मामले को ज्यादा तूल नहीं देना चाहती है।
म्यांमार सीमा से किसी भी सम्भावित हमले और घुसपैठ से निपटने के लिए सेना और असम राइफल ने निगरानी कई गुना बढ़ा दी है। लेकिन मणिपुर से लगने वाली म्यांमार की सरहद पूरी तरह से खुली हुई है और फेंसिंग लगाने का काम आधा अधूरा है। लोग मात्र 5 किलोमीटर की फेंसिंग नामात्र के लिए लगाईं गयी है। लोग बिना रोकटोक के सरहद के आरपार जा सकते हैं।
– मनजीत नेगी, चांदेल मणिपुर







Leave a Comment
Your email address will not be published. Required fields are marked with *