मुंबई पर 26ध्11 के आतंकी हमले के 6 साल पूरे होने पर हमनें समुद्री सरहद की एक्सक्लूसिव सुरक्षा पड़ताल की। अरब सागर में कोस्टगार्ड के साथ एक खास निगरानी मिशन में हमनें देखा की समंदर में कोस्टगार्ड ने पिछले 6 सालों में एक मजबूत सुरक्षा
मुंबई पर 26ध्11 के आतंकी हमले के 6 साल पूरे होने पर हमनें समुद्री सरहद की एक्सक्लूसिव सुरक्षा पड़ताल की। अरब सागर में कोस्टगार्ड के साथ एक खास निगरानी मिशन में हमनें देखा की समंदर में कोस्टगार्ड ने पिछले 6 सालों में एक मजबूत सुरक्षा जाल बनाया।
हमनें गोवा से मुंबई तट का सफर तय किया। गोवा तट से कोस्टगार्ड के एक हाई स्पीड इंटरशेप्ट शिप अमल पर सवार होकर हम इस खास मिशन पर निकल पड़े। हमनें समुद्री सुरक्षा की पड़ताल में पाया कि पिछले 6 सालों में समुद्री सरहद पर सुरक्षा को काफी मजबूत बनाया गया है लेकिन सावधानी हटी दुर्घटना घटी के हालात हमेशा बने रहते हैं।
7,500 किलोमीटर में फैले देश के समुद्री तट में 24 किलोमीटर से लेकर 200 तक निगरानी की जिम्मेदारी कोस्ट गार्ड की है। 400 किलोमीटर तक निगरानी कि जिम्मेदारी नेवी के पास है। 26ध्11 के हमले के बाद नौसेना और कोस्ट गार्ड के बीच तालमेल बढ़ाया गया है।
हम नौसेना की हाई स्पीड इंटरशेप्ट शिप अमल पर सवार हो चुके थे। इस हाई स्पीड बोट कि बात की जाय तो इसकी स्पीड 70 किलोमीटर प्रति घंटा है। इस शिप में 5 अधिकारी समेत हथियारों से लैस 33 नौसैनिक सवार हो सकते हैं। इसमें आधुनिक संचार प्रणाली लगी हुई है।
गोवा के समुद्र तट से करीब 20 किलोमीटर दूर नौसैनिकों को मछुवारों की एक संदिग्ध बोट नजर आई। खुफिया रिपोर्ट के आधार पर उस फिशिंग बोट को घेरने कि तैयारी शुरू हो गयी। इस काम के लिए शिप अमल पर मौजूद 2 हाई स्पीड जैमिनी बोट को समंदर में उतारा गया। ये काम काफी खतरों से भरा होता है।
इस काम के लिए कोस्टगार्ड के 5 कमांडो की एक टीम इस खास मिशन को अंजाम देती है। कुछ ही देर में नौसैनिकों ने इस संदिग्ध बोट को अपने कब्जे में ले लिया। बोट कि जांच शुरू हो गयी। सभी लोगों को कब्जे में लेकर जांच की गयी। इस मामले में किसी तरह की कोताही नहीं बरती जा सकती है। काफी देर तक छानबीन के बाद पाया गया कि बोट में कुछ मछुवारों के पास आईकार्ड नहीं है लेकिन वे सभी स्थानीय थे इसलिए उन्हें कुछ आश्वासन के बाद छोड़ दिया गया है।
ऐसे ही हलात में किसी आतंकी के घुसपैठ की सबसे ज्यादा संभावना रहती है। मुम्बई पर 26ध्11 का हमला भी इसी तरह की मछुवारों की एक बोट कुबेर से हुआ था जो कराची से होते हुए गुजरात कोस्ट से मुंबई में दाखिल हुई थी।
करीब 2 घंटे में ये निगरानी और खोजबीन अभियान पूरा हुआ। नेवी, कोस्ट गार्ड और मरीन पुलिस ऐसे खोजी अभियान लगातार चलाती रहती है। क्योंकि तमाम तैयारियों के बावजूद समंदर में सावधानी हटी दुर्घटना घटी के हालात बने रहते हैं।
कोस्टगार्ड के महानिदेशक वाइस एडमिरल अनुराग जी थपलियाल ने बताया कि इसीलिए न सिर्फ हाई स्पीड इंटरशेप्ट शिप बल्कि चेतक हैलिकॉप्टर से भी संदिग्ध बोट की निगरानी की जाती है।
इसके साथ ही नौसेना, कोस्ट गार्ड, मरीन पुलिस और कस्टम ने मिलकर एक रिमोट ऑपरेटिंग ऑपरेशन सेंटर बनाया है। यहाँ पर बड़े-बड़े मॉनिटर लगाए गए हैं। पूरी समुद्री सीमा का डाटा बेस एक साथ जोड़ा गया है। इस सेंटर से समंदर में मौजूद किसी भी शिप से लाइव पूछताछ की जा सकती है।
इसी तरह समुद्री सीमा पर लाइव नजर रखने के लिए कोस्ट गार्ड ने गुजरात से लेकर पश्चिम बंगाल तक लगने वाली पूरी समुद्री सरहद पर 46 शक्तिशाली रडार स्टेशन बनायें हैं। इन रडार कि मदद से समंदर में होने वाली हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।
समंदर में कोस्टगार्ड और नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए गोवा शिपयार्ड में दिनरात नए-नए युद्धपोत बनाये जा रहे हैं। गोवा शिपयार्ड के सीएमडी रियर एडमिरल शेखर मित्तल ने बताया कि मुम्बई पर 26ध्11 के हमले के 6 साल पूरे होने के मौके पर कोस्टगार्ड के लिए एक नया युद्धपोत समर्थ लॉन्च किया जा रहा है। 2350 टन वजनी इस शिप की लम्बाई 105 और चैड़ाई 16 मीटर है। इस शिप को सभी तरह के आधुनिक हथियारों ओए संचार तंत्र से लैस किया गया है। कोस्टगार्ड के लिए आने वाले दिनों में ऐसे 6 युद्धपोत बनाये जा रहे हैं।
नए रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर जो गोवा के मुख्यमंत्री रह चुके उनका मानना है कि मुम्बई पर 26ध्11 के हमले के 6 साल बाद भी समुद्री सुरक्षा अभी पूरी तरह मुकम्म्ल नहीं है।
– मनजीत नेगी, वरिष्ठ रक्षा संवाददाता, गोवा







Leave a Comment
Your email address will not be published. Required fields are marked with *