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रक्षा मंत्री का कर्नल कोठियाल के जज्बे को सलाम

निर्मला सीतारमण बोलीं, कर्नल कोठियाल के सेल्फ मोटिवेशन कांसेप्ट को देशभर में फैलाना चाहिए

मनजीत नेगी, देहरादून

नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के प्रिंसिपल कर्नल अजय कोठियाल आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उनके सामाजिक सरोकारों की फेहरिस्त दिन-प्रतिदिन लंबी होती जा रही है। हाल ही में देहरादून में आईएमए और राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) में उत्तराखंड से चयनित होने वाले अभ्यर्थियों के सम्मान समरोह में पहुंची रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण भी यूथ फाउंडेशन के संस्थापक कर्नल अजय कोठियाल की प्रशंसा किए बिना नहीं रह सकीं। सीतारमण ने कहा कि कर्नल कोठियाल के सेल्फ मोटिवेशन कांसेप्ट को देशभर में फैलाना चाहिए कि कैसे वह उत्तराखंड के युवाओं को सेना में भर्ती करने का काम कर रहे हैं। कर्नल कोठियाल के इस बेहतरीन काम से हम सभी को प्रेरणा मिलती है। इस कार्यक्रम में भारतीय सैन्य अकादमी एवं राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में उत्तराखंड से चयनित 140 अभ्यर्थियों को 50-50 हजार रुपये की धनराशि देकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत भी मौजूद थे।

रक्षा मंत्री ने कहा की परमवीर और कई विक्टोरिया क्रॉस विजेता इस देवभूमि उत्तराखंड ने पैदा किए हैं। मंच पर मौजूद थल सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत भी आपके गर्व की एक वजह हो सकते हैं। सेना के लिए इस भूमि से इतना योगदान आपके लिए गर्व की बात है। इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्री ने यूथ फाउंडेशन की लड़कियों और लड़कों के खुखरी डांस की खास तारीफ की और उसे अपने ट्विटर पर भी जारी किया। यूथ फाउंडेशन ने रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा कही गई सभी बातों के लिए उनका धन्यवाद दिया और कहा कि आपकी प्रेरणा हम सभी के लिए बहुमूल्य है।

यूथ फाउंडेशन की भूमिका

केदारनाथ आपदा के बाद पुनर्निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले कर्नल अजय कोठियाल ने जगह-जगह ट्रेनिंग कैंप शुरू किए और उत्तराखंड के सैकड़ों युवाओं को सेना की राह दिखाई है। पिछले 4 सालों में 3000 से ज्यादा स्थानीय युवा गढ़वाल और कुमाऊं रेजिमेंट में भर्ती हो चुके हैं। अब देवभूमि की बेटियां और कश्मीर के युवाओं को देश प्रेम की नई राह दिखा रहे हैं।

महिलाओं को बढ़ाया आगे

सेना में महिलाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है। लड़ाकू विमान उड़ाने से लेकर लड़कियां हर मोर्चे पर हाथ आजमा रही हैं। ऐसे में सेना में करियर बनाने का सपना देख रही पहाड़ की बेटियों को तीन महीने की खास ट्रेनिंग दी जा रही है। सुबह 6 बजे से ट्रेनिंग का सिलसिला शुरू होता है जो देर शाम तक चलता है। चिनअप, रस्सी पर चढ़ना-उतरना और लांग जंप हर तरह के मुश्किल से मुश्किल प्रशिक्षण से सभी को गुजरना है। सेना के पूर्व प्रशिक्षक के साथ ही नेहरू पर्वतारोहण संस्थान की महिला प्रशिक्षक इस कैंप में लड़कियों को ट्रेनिंग दे रही हैं।

शौर्य है जिसकी कीर्ति….

कर्नल अजय कोठियाल 1992 में चौथी गढ़वाल राइफल में बतौर सैन्य अधिकारी शामिल हुए। सीमाओं की हिफाजत में कर्नल अजय कोठियाल ने 7 आंतकियों को भी मार गिराया और खुद भी 2 गोलियां सीने में झेली। उनके वीरता और साहस के लिए उन्हें कीर्ति चक्र, शौर्य चक्र, विशिष्ट सेवा मेडल से भी नवाजा जा चुका है। अब तक वह भारत और नेपाल की 18 चोटियों पर पर्वतारोहण कर चुके हैं और 2001 में भारतीय सेना के पहले दल के सफल एवरेस्ट सबमिट करने का खिताब भी उनके ही नाम है। वह अपनी तनख्वाह से राज्य के बेरोजगार युवाओं के लिए भारतीय सेना में शामिल होने के उद्देश्य से यूथ फाउंडेशन के कैंप चलाते हैं।

Written by
Y S Bisht

लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद कई टीवी प्रोग्राम के लिए काम किया। एशिया डिफेंस न्यूज़ इंटरनेशनल (अडनी) से जुड़े। यह एजेंसी हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, मणिपुरी और असमिया में अपनी सेवाएं देती है। इसके अलावा एशिया डिफेंस न्यूज के नाम से एक मासिक पत्रिका भी निकालती थी। वर्ष 2013 में जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर हिल-मेल वेबसाइट शुरू की। फरवरी 2016 से हिल-मेल में बतौर संपादक कार्यरत। मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल के निवासी हैं।

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