द अल्टीमेट हिमालय माउंटेन टरेन बाइकिंग चैलेंज हिल-मेल ब्यूरो, देहरादून रोमांच और साहसिक पर्यटन के शौकीनों के लिए इससे बेहतर और क्या हो सकता है। हिमालय की वादियों में साइकिल की सवारी। शुद्ध हवा। साफ़ पानी। यदि आप दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों में हैं, तो इस
द अल्टीमेट हिमालय माउंटेन टरेन बाइकिंग चैलेंज
हिल-मेल ब्यूरो, देहरादून
रोमांच और साहसिक पर्यटन के शौकीनों के लिए इससे बेहतर और क्या हो सकता है। हिमालय की वादियों में साइकिल की सवारी। शुद्ध हवा। साफ़ पानी। यदि आप दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों में हैं, तो इस रोमांच के बारे में ज़रा सोचिए।
– 8 जिले
– 564 किलोमीटर
– 87 बाइकर्स
– 75 पुरुष
– 12 महिलाएं
– 22 अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी
उत्तराखंड में इस तरह के साहसिक पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। इन्हीं संभावनाओं को तलाशनेराज्य को एडवेंचर टूरिज़्म की दिशा में आगे ले जाने और पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए, साइक्लिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के साथ मिलकर पर्यटन विभाग माउंटेन बाइकिंग का आयोजन करता है।
द अल्टीमेट हिमालय माउंटेन टरेन बाइकिंग चैलेंज का ये चौथा वर्ष है। माउंटेन बाइकिंग में देश-विदेश के 87 बाइकर्स ने हिस्सा लिया। जिसमेंजर्मनी, इंडोनेशिया, ईरान, मलेशिया, नेपाल, श्रीलंका, सिंगापुर और थाईलैंड के 13 पुरुष अंतर्राष्ट्रीय साइक्लिस्ट और 9 अंतर्राष्ट्रीय महिला साइक्लिस्ट शामिल हैं। इसके अलावा देश के 62 पुरुष साइक्लिस्ट और 3 महिला साइक्लिस्ट शामिल हैं। साइकिल सवार 18 से 26 अप्रैल तक रोमांच और रफ़्तार के इस सफ़र में शामिल रहे। साइकिल सवारों के जत्थे नैनीताल से शुरू मसूरी तक राज्य के आठ जिलों में 564 किलोमीटर का सफ़र तय किया। हर पड़ाव पर साइकिल सवारों का जबरदस्त स्वागत किया गया रैली मार्ग पर एंबुलेंस और सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतज़ाम किए गए।
नैनीताल में इस अभियान के शुरू होने के दिन आसमान में बादल छाए थे, लेकिन साइकिल सवारों के हौसले बुलंद थे, सुरक्षा मानकों को पूरा करते हुए, पूरे उत्साह के साथ जत्था अपने अगले पड़ाव की ओर रवाना हो गया। नैनीताल में रैली के उद्घाटन के समय अपर सचिव सी. रविशंकर ने कहा कि राज्य की भौगोलिक परिस्थितियां और नैसर्गिक सौंदर्य रोमांच और उत्साह से भरपूर हैं। इस तरह के आयोजन भविष्य में राज्य को साहसिक पर्यटन का केंद्र बनाने में कामयाब होंगे।
बाइकर्स का उत्साह वर्धन करने के लिए अल्मोड़ा के एसएसपी प्रहलाद मीणा ने भी करीब 85 किलोमीटर तक साइकिल चलाई। अल्मोड़ा से कोसी, दौलाघट, बगवाली पोखर, बिंता, सोमेश्वर होते हुए कौसानी तक की यात्रा में उन्होंने भी प्रतिभागियों के साथ साइकिल के पैडल मारे और उनकी हौसला अफ़ज़ाई की।
साइकिल सवारों का जत्था अपने अगले पड़ाव पर जिस भी जिले में पहुंचा, वहां उनके स्वागत में स्थानीय खान-पान और लोकसंस्कृति की छटा देखने को मिली। रुद्रप्रयाग में प्रशासन ने बाइकर्स के स्वागत कार्यक्रम में पांडव नृत्य पेश किया। सभी बाइकर्स को पर्यटन विभाग के सहयोग से पांडव नृत्य दिखाया गया। इस तरह के पौराणिक आयोजन विदेशी मेहमानों को खूब भाए।
पर्यटन, सेहत, तनाव से राहत जैसी कई बेफ़िक्रियों के साथ साइकिल सवार हिमालयी वादियों में रोमांच के सफ़र पर रहे। इस तरह के आयोजनों से साहसिक पर्यटन तो बढ़ेगा ही, पलायन रोकने और स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे। छोटी-छोटी नौकरियों के लिए महानगरों की ओर रुख़ करने वाले युवा अपने ज़िले में इस तरह के पर्यटन व्यवसाय से जुड़ सकते हैं और आमदनी का ज़रिया बना सकते हैं। फिलहाल रोमांच का ये सफ़र जारी है।







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