समंदर का शिकारी 300 मीटर नीचे छुपकर दुश्मन के इलाके में निगरानी करता है और मौका मिलने पर दुश्मन के जहाज को चुटकियों में गर्त में मिला देता है। कौन है समंदर का शिकारी? आज हम आपको बतायेंगे भारतीय नौसेना का ऐसा घातक हथियार जिसके
समंदर का शिकारी 300 मीटर नीचे छुपकर दुश्मन के इलाके में निगरानी करता है और मौका मिलने पर दुश्मन के जहाज को चुटकियों में गर्त में मिला देता है। कौन है समंदर का शिकारी? आज हम आपको बतायेंगे भारतीय नौसेना का ऐसा घातक हथियार जिसके बारे में लोगों को मालूम नहीं है। कैसे ये समंदर का शिकारी दुश्मन के एक बड़े युद्धपोत को सिर्फ एक मिसाइल हमले से मिनटों में समंदर के नीचे कैसे दफन कर देता है। समंदर का शिकारी यानि पनडुब्बी। पनडुब्बी भारतीय नौसेना के पास देश की समुद्री सरहद पर निगरानी करने का एक सबसे कारगर हथियार है। पनडुब्बी एक ऐसा जहाज है जो समंदर की गहराइयों में रहकर अपने काम को अंजाम देता है। अपनी पहचान छुपाकर काम करना ही पनडुब्बी का मुख्य काम है। इंडिया टीवी संवाददाता मनजीत नेगी ने पहली बार समंदर के 300 मीटर नीचे एक पनडुब्बी पर पूरा दिन गुजारा और उस खास मिशन का हिस्सा बनें जिसमें ये पनडुब्बी टेलीविजन पर पहली बार दुश्मन के जहाज को चुटकियों में गर्त में मिला देगी।
भारतीय नौसेना लम्बे समय से समंदर में निगरानी के लिए पनडुब्बी का इस्तेमाल कर रही है। मौजूदा समय में भारतीय नौसेना के पास दर्जनभर से ज्यादा पनडुब्बी हैं। पनडुब्बी दो तरह की हैं एक पारम्परिक पनडुब्बी यानी डीजल से चलने वाली पनडुब्बी और दूसरी परमाणु ऊर्जा से चलने वाली। पिछले साल भारतीय नौसेना के बेड़े में पहली परमाणु पनडुब्बी आईएनएस चक्र शामिल हो चुकी है। इसके अलावा भारत आने वाले दिनों में स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी अरिहंत बना रहा है। फ्रांस के सहयोग से भारत डीजल से चलने वाली छह स्कॉरपीन पनडुब्बियां भी बनाने में जुटा हुआ है। हम पहुँचे नौसेना की महत्वपूर्ण पूर्वी कमान के मुख्यालय विशाखापत्तनम पोर्ट। नौसेना की पूर्वी कमान बंगाल की खाड़ी से लेकर हिन्द महासागर तक की करीब 3000 किलोमीटर लम्बी समुद्री सीमा की निगरानी करती है। भारतीय नौसेना बंगाल की खाड़ी से लेकर अरब सागर तक समंदर में अपनी ताकत बढ़ा रही है जिससे चीन की बढ़ती नौसैनिक शक्ति का मुकाबला किया जा सके।
पनडुब्बी पर सारी तैयारी के बाद हम भी तैयार थे इस रोमांचक सफर पर जाने के लिए। अब हम पनडुब्बी के प्रेशर हल की तरफ बढ़ रहे हैं। समंदर में 300 मीटर नीचे जाने से पहले सतह पर सारी तैयारियों को ठीक से जायजा लिया जाता है। पनडुब्बी की सारी मशीनरी को ठीक से चेक किया जाता है। अब ये समंदर का शिकारी 300 मीटर गहरे समंदर में उतरने के लिए तैयार है। पनडुब्बी के अन्दर जाने के रास्ते को कॉनिंग टावर कहा जाता है। यहाँ पर मौजूद इस ढक्कन यानि अपर लिड के बंद हो जाने के बाद पनडुब्बी के अन्दर मौजूद 80 नौसैनिक डेढ़ महीने के लिए बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट जाते हैं। पनडुब्बी नौसेना में सबसे महंगा जहाज होता है। हम अब पनडुब्बी के अन्दर पहुँच चुके हैं। हम इस वक्त पनडुब्बी के कंट्रोल रूम में मौजूद हैं। सिन्धुवीर पनडुब्बी समंदर में अपना मिशन शुरू कर चुकी है। समंदर की गहराई में पनडुब्बी की आँख और कान सोनार सिस्टम होती है। पनडुब्बी के अन्दर सोनार के अलावा संचार का कोई दूसरा सिस्टम काम नही कर पाता है। समंदर की गहराई में ये पता करना बेहद मुश्किल है कि आप दुश्मन की सीमा के कितने नजदीक हैं। अचानक हमें बताया गया की सोनार ने दुश्मन के एक टारगेट को पहचान लिया है। एक बार दुश्मन का टारगेट का अंदाजा लगने पर उसे ठीक से पहचानना होता है।
समंदर की गहराइयों में काम करने वाले नौसैनिकों के लिए एक खास तरह की ड्रेस बनाई जाती है। गहरे समंदर में महानों तक तैनाती के दौरान नौसैनिक नहाते नही हैं। ऐसे में ये खास मेडिकेटेड ड्रेस उनको बीमारी से बचाती है। इस खास ड्रेस को डीआरडीओ की मदद से ओर्डिनेंश फैक्ट्री ने बनाया है। पनडुब्बी में करीब डेढ़ महीने तक तैनाती के दौरान सभी नौसैनिक एक जैसी ड्रेस पहनते हैं। ऑफिसर और जवान सबके लिए एक ही ड्रेस। ड्रेस पर कोई नाम या रैंक नही होता है। पनडुब्बी में सब एक सामान होते हैं। मैंने भी ये खास ड्रेस पहनी। अब हम पनडुब्बी के तीसरे कम्पार्टमेंट में जा रहे हैं। इस कम्पार्टमेंट में नौसैनिक रहते हैं। पनडुब्बी के इस हिस्से में नौसैनिकों का रहना-खाना सब होता है। अब हम पनडुब्बी के अन्दर नौसैनिकों के लिए बनी रसोई में जा रहे हैं। इस छोटी सी रसोई में हर समय 80 नौसैनिकों के लिए ताजा खाना बनता है। अब हम पनडुब्बी में नौसैनिकों के लिए बने केबिन दिखा रहे हैं। रेलवे कम्पार्टमेंट से भी छोटे केबिन में आठ से नौ नौसैनिक रहते हैं। 6 घंटे की नींद और 3-3 घंटे की ड्यूटी के बीच ये नौसैनिक मिलजुल कर रहते हैं। पनडुब्बी के बारे में कहा जाता है कि इसमें काम करने वाला हर नौसैनिक अहम् है क्योंकि एक नौसैनिक की छोटी सी गलती से पूरी पनडुब्बी डूब सकती है। तनाव भरी इस ड्यूटी के बीच ये नौसैनिक हंसने-गाने के लिये समय निकाल लेते हैं।
अब हम पनडुब्बी के सबसे अहम् हिस्से टारपीडो डैक पर मौजूद हैं। टारपीडो डैक पर पनडुब्बी का सारा हथियार और मिसाइल सिस्टम तैनात होता है। दुश्मन के जहाज को यहीं से निशाना बनाया जाता है। समंदर में 25 से 30 किलोमीटर तक मार करने वाली ये टारपीडो कई मायनों में खास है। इसकी लम्बाई 10 मीटर है और इसका वजन 2 टन है। 500 किलोग्राम विस्फोटक के साथ के टारपीडो मिसाइल दुश्मन के बड़े से बड़े युद्धपोत को खत्म कर सकती है। अब ये टारपीडो मिसाइल दुश्मन के युद्धपोत पर हमले के लिए पूरी तरह तैयार है। कमांडर के एक आदेश पर ये मिसाइल दुश्मन के जहाज को समंदर में डुबो देगी। सामने दुश्मन का जहाज है और टारपीडो के एक ही हमले से ये जहाज दो टुकड़ों में तब्दील हो गया। इस शानदार हमले से सभी नौसैनिक खुशी से चिल्ला उठे।
मिशन पूरा हो चूका है अब जल्द से जल्द दुश्मन के इस इलाके से बाहर निकलने की तैयारी की जा रही है। इस ऑपरेशन की कामयाबी को सफलता से अंजाम देने के बाद अब पनडुब्बी को वापस ले जाने की कार्यवाही शुरू हो चुकी है। सभी नौसैनिकों के चेहरों पर थोड़ा तनाव है। हम इंजन रूम में आगे बढ़े जहां से सारी पनडुब्बी चलती है। यहाँ पर हमें एक खास हथियार देखने को मिला। जब पनडुब्बी दुश्मन के इलाके में फंस जाय तो उसे चकमा देने के लिए सबमरीन फायर डिकोय रखे गये हैं। जो दुश्मन के हमले के वक्त चकमा देने के काम आते हैं। अब हम आपको पनडुब्बी के और खास पहलू से रूबरू कराते हैं। किसी दुर्घटना या हमले के समय बचाव कैसे किया जाता है। अब हम पनडुब्बी के सबसे निचले हिस्से में हैं। यहाँ पर बाहर निकले का रास्ता बनाया गया है। यहाँ से पनडुब्बी में पानी भरने और पाई निकालने की कार्यवाही की जाती है। इस निचले हिस्से में नौसैनिकों को रेंगकर काम करना पड़ता है। इस खास काम के लिए सभी नौसैनिकों की ड्यूटी लगती है। पनडुब्बी में रात-दिन हर वक्त ड्यूटी करनी पड़ती है।
समंदर की गहराइयों में महीनों तक काम करने से नौसैनिकों को कई तरह की शारीरिक और मानसिक परेशानियाँ झेलनी पड़ती हैं इसके लिए पनडुब्बी में हर वक्त एक छोटा अस्पताल तैनात रहता है। पनडुब्बी में सबसे अहम् बचाव की ट्रेनिंग होती है। इसी लिए नौसेना ने सबमरीन ट्रेनिंग स्कूल बनाया है। पनडुब्बी में बचाव के तीन रास्ते हैं। पनडुब्बी में टारपीडो ट्यूब के जरिये बाहर निकला जाता है। इसके लिए खास तरह की ड्रेस पहनी जाती है। संवाददाता मनजीत नेगी ने भी पनडुब्बी में बचाव की ये खास ड्रेस पहनी। बचाव की इस खास ट्रेनिंग में पास होने के बाद ही कोई भी नौसैनिक सबमरिनर बनता है। ट्रेनिंग का ये पहला सबक होता है। ये पनडुब्बी की सबसे मुश्किल ट्रेनिंग है। अगर आप अच्छे तैराक नहीं हैं तो सबमरीन में काम नहीं कर सकते। मतलब जो पानी से डर वो गया यानी वो सबमरिनर नहीं बन सकता। हम भी इस खास ट्रेनिंग का हिस्सा बने। टारपीडो मिसाइल की ट्यूब मुसीबत के समय बाहर निकलने के काम आती है। टारपीडो ट्यूब की मदद से समंदर की सतह तक आया जाता है। 10 फीट लम्बी इस ट्यूब में रेंगकर आगे बढ़ना होता है। हम एक के बाद एक पनडुब्बी के हर मुश्किल हालात से रूबरू हो रहे थे। 20 मीटर गहरी पनडुब्बी में सात फ्लोर होते हैं। पनडुब्बी में इस एक दिन के सफर के बाद हमारा हौसला जवाब दे रहा था ऐसे में जो नौसैनिक महीनों तक इसमें रहकर देश की समुद्री सीमा की चुपचाप निगरानी करते हैं उनकी हिम्मत की दाद देनी होगी।
भले ही चीन जमीन के बाद अब समंदर में भी अतिक्रमण की रणनीति से भारत को घेर रहा हो लेकिन हमारी तैयारी भी कम नहीं है। समंदर की सतह और नीचे नौसेना की तैयारियों में कोई कमी नहीं है। बड़े युद्धपोत से लेकर पनडुब्बी हर तरह का जहाज नौसेना के बड़े में दुश्मन को जवाब देने के लिए तैयार है। इस समय चीन के पास 630 नौसैनिक लड़ाकू जहाज और लगभग सवा दो लाख नौसैनिक हैं। दूसरी ओर भारत की ताकत इसके पांचवें हिस्से जितनी ही है। चीन के पास 8 एटमी पनडुब्बी हैं और हाल ही में चीन ने अपना पहला विमानवाहक पोत बनाया है। विमानवाहक पोत गोर्शकोव अगले साल तक भारत को मिल सकता है। स्वदेशी विमानवाहक पोत का निर्माण भी चल रहा है। आठ घंटे सिन्धुवीर पनडुब्बी में गुजारने के बाद हम इस भरोसे के साथ लौट रहे थे कि समंदर की इन गहराइयों में भी कोई चुपचाप हमारी समुद्री सरहद की निगेहबानी कर रहा है।
मनजीत नेगी, विशेष संवाददाता इंडिया टीवी, सिन्धुवीर पनडुब्बी विशाखापत्तनम







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