गढ़वाल राइफल्स की 127 इन्फैंट्री बटालियन (टीए) को मिला मुख्यमंत्री प्रशंसा पुरस्कार

गढ़वाल राइफल्स की 127 इन्फैंट्री बटालियन (टीए) को मिला मुख्यमंत्री प्रशंसा पुरस्कार

उत्तराखंड की शांत वादियों और घने जंगलों के बीच एक ऐसी कहानी आकार ले रही है, जो केवल पर्यावरण संरक्षण की नहीं, बल्कि समर्पण, अनुशासन और सामूहिक जिम्मेदारी की मिसाल है। 127 इन्फैंट्री बटालियन (टीए) (ईको), गढ़वाल राइफल्स ने अपने अथक प्रयासों से यह साबित किया है कि सेना केवल सीमाओं की रक्षा ही नहीं करती, बल्कि प्रकृति और भविष्य की भी संरक्षक है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा वर्ष 2025–26 के लिए 127 इन्फैंट्री बटालियन (टीए) (ईको) को प्रशंसा पुरस्कार से  सम्मानित किया गया। यह सम्मान 25 अप्रैल 2026 को आयोजित एक विशेष समारोह में यूनिट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल प्रत्युल थ​पलियाल और सूबेदार मेजर रघुबीर सिंह ने प्राप्त किया। यह अवसर न केवल बटालियन के लिए, बल्कि पूरे गढ़वाल क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण बन गया।

9.5 लाख से अधिक पौधे लगाए

इस सम्मान के पीछे सबसे बड़ा कारण रहा बटालियन का व्यापक वृक्षारोपण अभियान। 9.5 लाख से अधिक पौधे लगाना कोई साधारण उपलब्धि नहीं है खासकर तब, जब यह कार्य पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में किया गया हो। हर पौधे के पीछे सैनिकों की मेहनत, योजना और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता जुड़ी हुई है।

इन पौधों के माध्यम से न केवल हरित आवरण बढ़ाया गया, बल्कि जल संरक्षण, मिट्टी के कटाव को रोकने और जैव विविधता को सहेजने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया गया।

‘भागीदारी और जिम्मेदारी’: एक जनआंदोलन

इस बटालियन की विशेषता केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं रही। उन्होंने ‘भागीदारी और जिम्मेदारी’ जैसे अभियान की शुरुआत की, जिसने पर्यावरण संरक्षण को एक जनआंदोलन का रूप दिया।

स्थानीय गांवों, युवाओं और स्कूलों को इस अभियान से जोड़कर यह संदेश दिया गया कि प्रकृति की रक्षा केवल किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। इस पहल ने लोगों के सोचने के तरीके में बदलाव लाया अब वे केवल दर्शक नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदार बन चुके हैं।

सेना की बदलती भूमिका: सीमाओं से पर्यावरण तक

भारतीय सेना की यह पहल दिखाती है कि आधुनिक समय में सेना की भूमिका कितनी व्यापक हो चुकी है। जहां एक ओर सैनिक देश की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, वहीं दूसरी ओर वे पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने और समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

गढ़वाल की इस बटालियन ने यह साबित किया है कि अनुशासन और समर्पण के साथ यदि सही दिशा में प्रयास किए जाएं, तो बड़े बदलाव संभव हैं।

स्थानीय प्रभाव और भविष्य की उम्मीद

इस पहल का प्रभाव अब स्थानीय स्तर पर स्पष्ट दिखाई देने लगा है। जहां पहले बंजर भूमि थी, वहां अब हरियाली पनप रही है। गांवों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ी है और लोग स्वयं आगे आकर इस मिशन में योगदान दे रहे हैं।

यह सम्मान केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि एक प्रेरणा है अन्य संस्थाओं और समुदायों के लिए भी, कि वे इस दिशा में आगे बढ़ें।

एक हरित भविष्य की ओर

127 इन्फैंट्री बटालियन (टीए) (ईको), गढ़वाल राइफल्स की यह उपलब्धि बताती है कि जब कर्तव्य और प्रतिबद्धता का मेल होता है, तो परिणाम केवल सफलता नहीं, बल्कि स्थायी बदलाव के रूप में सामने आते हैं।

यह कहानी सिर्फ एक पुरस्कार की नहीं, बल्कि उस सोच की है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित, संतुलित और हरित भविष्य सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही है।

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