राष्ट्रीय युवा संगोष्ठी में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह चौहान, सचिव रामकृष्ण मिशन, नई दिल्ली स्वामी सर्वलोकानन्द, विवेकानन्द केन्द्र के अखिल भारतीय कोषाध्यक्ष प्रवीण दाभोलकर, असम के हाथी पशुचिकित्सक पद्मश्री डॉ. कुषल कोंवर सरमा, अधिष्ठाता कृषि डा. एस.के. कश्यप एवं अधिष्ठाता छात्र कल्याण डा. बृजेश सिंह मंचासीन थे।
डॉ. मनमोहन सिंह चौहान ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में सभी उपस्थित जनों को स्वामी विवेकानन्द जी के 161वीं वर्षगांठ की बधाई देते हुए विवेकानन्द जी के आदर्शों को अपनाने एवं अपने जीवन में स्वाभिमान, समर्पण एवं देश भक्ति तीनों को लेकर विश्वविद्यालय की सेवा करने का सभी से आह्वान किया। उन्होंने देश के युवाओं में जोश्, देश भक्ति एवं स्वाभिमान को जागृत रखने को कहा। उन्होंने बताया कि देश को 2047 तक विकासशील देश से विकसित देश का मार्ग-प्रशस्त करना हमारा लक्ष्य होना चाहिए। उन्हांने कहा कि जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान एवं जय अनुसंधान के सिद्धान पर चलने से ही देश विश्व गुरू बन सकता है। साथ ही उन्होंने युवाओं को कर्तव्यों का पालन करने एवं कठिन कार्य करने के लिए प्रेरित किया तथा इस तरह के कार्यक्रमों के आयोजन से युवाओं के तौर-तरीकों में परिवर्तन लाने सम्भावना व्यक्त की।

कार्यक्रम का संचालन डा. शिवेन्द्र कश्यप द्वारा किया गया तथा उन्होंने कार्यक्रम की रूप-रेखा प्रस्तुत की। कार्यक्रम विवेकानन्द स्वाध्याय मंडल के तत्वावधान में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में एक पुस्तक का विमोचन किया गया तथा साधु बैण्ड के सदस्यों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम के अन्त में को-कॉर्डिनेटर सृष्टि गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में सरिता, राजेन्द्र चड्डा, आर श्री निवासन, जगदीश एवं विवेकानन्द स्वाध्याय मण्डल से जुडे़ सदस्य, विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र एवं विश्वविद्यालय के कुलसचिव, अधिष्ठाता, निदेशकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।


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