28 किलोमीटर का संघर्ष: शिक्षा की राह में पहाड़, जंगल और बेटियों का हौसला

28 किलोमीटर का संघर्ष: शिक्षा की राह में पहाड़, जंगल और बेटियों का हौसला

निकटतम स्कूल बंद होने से रोज जान जोखिम में डालकर पढ़ने जाती हैं पैनल गांव की छात्राएं, पहाड़ों में शिक्षा हासिल करना आज भी कई बच्चों के लिए किसी संघर्ष से कम नहीं है। विकासखंड जयहरीखाल के पैनल गांव की बेटियां इसका जीवंत उदाहरण बन चुकी हैं। यहां की छात्राएं प्रतिदिन 28 किलोमीटर पैदल चलकर शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं। गांव से 14 किलोमीटर दूर स्थित राजकीय इंटर कॉलेज मठाली तक पहुंचने के लिए उन्हें दुर्गम पहाड़ी रास्तों, खड़ी चढ़ाइयों और घने जंगलों से होकर गुजरना पड़ता है। शिक्षा के लिए उनका यह संघर्ष अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

ग्रामीणों के अनुसार यह समस्या लयेड़सैंण उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के बंद हो जाने के बाद से और गंभीर हो गई है। करीब पांच वर्ष पहले विद्यालय बंद होने के कारण आसपास के गांवों के छात्र-छात्राओं को दूरस्थ विद्यालयों में पढ़ाई के लिए जाना पड़ रहा है। इसका सबसे अधिक असर बालिकाओं पर पड़ा है, जिन्हें हर दिन कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।

कांग्रेस नेता रघुबीर बिष्ट ने क्षेत्र भ्रमण के दौरान इस समस्या को गंभीर बताते हुए कहा कि सरकार और क्षेत्रीय विधायक की उदासीनता के कारण लयेड़सैंण विद्यालय बंद हुआ। उन्होंने कहा कि यदि विद्यालय को समय रहते संचालित रखा जाता तो बच्चों को इतनी कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ता। उनका कहना है कि पैनल गांव और आसपास के क्षेत्रों के बच्चों को अब अपनी जान जोखिम में डालकर शिक्षा ग्रहण करनी पड़ रही है।

ग्रामीण बताते हैं कि छात्र-छात्राएं रोज सुबह जल्दी घर से निकलते हैं और करीब तीन घंटे पैदल चलकर विद्यालय पहुंचते हैं। वापसी में भी उन्हें उतनी ही दूरी तय करनी पड़ती है। बरसात और सर्दियों के मौसम में यह रास्ता और भी खतरनाक हो जाता है। कई स्थानों पर रास्ते फिसलन भरे हैं, जबकि जंगलों में जंगली जानवरों का भी डर बना रहता है। इसके बावजूद बच्चों का पढ़ाई के प्रति उत्साह कम नहीं हुआ है।

ग्रामीण चंद्रमोहन जदली ने बताया कि पैनल गांव की छह बालिकाएं और कुछ बालक प्रतिदिन इसी कठिन रास्ते से होकर विद्यालय जाते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों के हौसले को देखकर गर्व होता है, लेकिन यह स्थिति बेहद चिंताजनक भी है। शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधा के लिए बच्चों को इतना संघर्ष करना पड़े, यह सरकार और प्रशासन के लिए गंभीर सवाल खड़े करता है।

ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि लयेड़सैंण विद्यालय को शीघ्र दोबारा शुरू किया जाए ताकि बच्चों को राहत मिल सके। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो क्षेत्र में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था की यह तस्वीर बताती है कि आज भी कई गांव बुनियादी सुविधाओं से दूर हैं। बावजूद इसके, पैनल गांव की बेटियां अपने सपनों को पाने के लिए हर दिन पहाड़ जैसी कठिनाइयों को पार कर रही हैं। उनका यह संघर्ष केवल शिक्षा का नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य की उम्मीद का भी प्रतीक बन गया है।

Hill Mail
ADMINISTRATOR
PROFILE

विज्ञापन

[fvplayer id=”10″]

Latest Posts

  • यमकेश्वर के लाल और उत्तराखंड के गौरव पत्रकार मनजीत नेगी सीडीएस कमेंडेशन पत्र से हुए सम्मानित

    यमकेश्वर के लाल और उत्तराखंड के गौरव पत्रकार मनजीत नेगी सीडीएस कमेंडेशन पत्र से हुए सम्मानित0

    सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने आजतक के कार्यकारी संपादक मनजीत नेगी को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ कमेंडेशन मेडल और प्रशंसा पत्र से किया सम्मानित, आजतक के कार्यकारी संपादक मनजीत नेगी को रक्षा क्षेत्र में उनकी निर्भीक पत्रकारिता के लिए चीफ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ़ कमनडेशन मेडल से सम्मानित किया गया। सीडीएस कमनडेशन मेडल से सम्मानित होने वाले ये देश के एक मात्र रक्षा पत्रकार हैं। सीडीएस ऑफ़ डिफेंस स्टाफ़ जनरल अनिल चौहान ने ३० मई को सेवानिवृत होने से पूर्व कई तीनों सेनाओं के कई अधिकारियों और जवानों को सीडीएस कमनडेशन मेडल से सम्मानित किया। सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने सेनाओं के अलावा समाज के अलग अलग क्षेत्रों में बेहतरीन कार्य करने वाले कुछ चुनिंदा लोगों को सीडीएस कमनडेशन मेडल से सम्मानित किया। मनजीत नेगी उनमें से एक हैं। मनजीत नेगी पत्रकारिता के क्षेत्र में। पिछले 25 साल से कार्यरत हैं।

    READ MORE
  • अंडमान में मानसून की दस्तक, उत्तर भारत में लू का कहर; 22 मई तक हीटवेव का अलर्ट

    अंडमान में मानसून की दस्तक, उत्तर भारत में लू का कहर; 22 मई तक हीटवेव का अलर्ट0

    देश में मौसम ने दो अलग-अलग रंग दिखाने शुरू कर दिए हैं। एक ओर दक्षिण-पश्चिम मानसून ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में दस्तक देकर बारिश की उम्मीद जगा दी है, वहीं दूसरी ओर उत्तर और मध्य भारत के कई राज्य भीषण गर्मी और लू की चपेट में हैं। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में 22 मई तक लू चलने का अलर्ट जारी किया है।

    READ MORE
  • ऑपरेशन सिंदूर का शेर: स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक की वीरता ने दुश्मन के दिल में पैदा किया खौफ

    ऑपरेशन सिंदूर का शेर: स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक की वीरता ने दुश्मन के दिल में पैदा किया खौफ0

    भारतीय वायुसेना के जांबाज योद्धाओं की बहादुरी की कहानियां हमेशा देशवासियों के भीतर गर्व और राष्ट्रभक्ति की भावना जगाती रही हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक की, जिन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान अदम्य साहस, असाधारण नेतृत्व और अद्भुत युद्ध कौशल का परिचय देकर भारतीय वायुसेना का मान बढ़ाया। दुश्मन के इलाके में आधी रात को अंजाम दिए गए इस बेहद जोखिम भरे मिशन में उन्होंने जिस धैर्य और सटीकता के साथ कार्रवाई की, वह आज भारतीय सैन्य इतिहास में वीरता की मिसाल बन चुकी है।

    READ MORE

Follow Us

Previous Next
Close
Test Caption
Test Description goes like this