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पिता एम्स में वेंटिलेटर पर थे और सीएम योगी उनसे मिली सीख का कर रहे थे पालन

पिता और पुत्र का रिश्ता भावनाओं का होता है। बिना कुछ कहे बातें दिल में उतर जाती हैं। 20 अप्रैल की सुबह जब योगी आदित्यनाथ के पिता दिल्ली स्थित एम्स में वेंटिलेटर पर थे तो सैकड़ों किमी दूर बैठे उनके बेटे और देश के सबसे बड़े सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यूपी की जनता के लिए अपने फर्ज को निभा रहे थे। वह अपने पिता को देखने भी नहीं जा सके। सोमवार सुबह करीब 11 बजे आनंद सिंह बिष्ट ने अंतिम सांस ली।

यूपी को लेकर यह सीएम योगी की प्रतिबद्धता ही तो है कि उन्होंने परिवार से भी ऊपर प्रदेश और जनहित को रखा। पिता की मौत के बाद प्रतिक्रिया में उन्होंने कहा, जीवन में ईमानादारी कठोर परिश्रम और निस्वार्थ भाव से लोक मंगल के लिए समर्पित भाव के साथ कार्य करने का संस्कार बचपन में उन्होंने मुझे दिया।’  उन्होंने परिजनों से अपील की कि लॉकडाउन का पालन करते हुए पिता के अंतिम संस्कार में कम से कम लोग जाएं। मैं नहीं आ पाऊंगा, लॉकडाउन के बाद दर्शनों के लिए आऊंगा। अंतिम वक्त में पिता को देखने न जा पाने की कसक उनके मन में रहीं। उनकी प्रतिक्रिया भावुक करने वाली है।

पिता के अंतिम दर्शनों के लिए जाना चाहता था, नहीं जा सकाः योगी आदित्यनाथ

 

पिता के निधन पर उन्होंने लिखा, ‘पिता के निधन का उन्हें भारी दुख और शोक है। जीवन में ईमानदारी कठोर परिश्रम और निस्वार्थ भाव से लोक मंगल के लिए समर्पित भाव के साथ कार्य करने का संस्कार बचपन में उन्होंने मुझे दिया। अंतिम क्षणों में उनके दर्शन की हार्दिक इच्छा थी लेकिन वैश्विक महामारी कोरोना के खिलाफ देश की लड़ाई को उत्तर प्रदेश की 23 करोड़ जनता के हित में आगे बढ़ाने के कर्तव्यबोध के कारण मैं न कर सका। कल 21 अप्रैल को अंतिम संस्कार में लॉकडाउन की सफलता तथा महामारी को परास्त करने की रणनीति के कारण भाग नहीं ले पा रहा हूं। पूजनीय मां, पूर्वाश्रम के सभी सदस्यों से अपील है कि लॉकडाउन का पालन करते हुए कम से कम लोग अंतिम संस्कार के कार्यक्रम में रहें। पूजनीय पिताजी की स्मृतियों को कोटि-कोटि नमन करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा हूं। लॉकडाउन के बाद दर्शनार्थ आऊंगा।’

 

यूपी के सीएम पद की शपथ लेने पर पिता ने भी कहा था, जनता की सेवा करें

 

सीएम के फर्ज और जनता की सेवा को लेकर उनके पिता की कही वो बात आज लोगों को भी याद आ रही होगी जो उन्होंने योगी आदित्यनाथ के सीएम पद की शपथ लेने के बाद मीडिया के सामने कही थी।

साल था 2017 और तारीख 19 मार्च, लखनऊ में योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री की शपथ ले रहे थे और करीब 600 किमी दूर पौड़ी-गढ़वाल में उनके गांव पंचूर में जश्न मनाया जा रहा था। लोग उनके पिता और मां को बधाइयां दे रहे थे। कुछ लोगों ने पिता को कंधे पर उठा लिया। हर कोई खुश था। लोग योगी की बातें कर रहे थे कि कैसे वह 22 साल की उम्र में गोरखपुर चले गए थे। उनकी बहन ने बताया कि अजय बिष्ट यानी योगी आदित्यनाथ पिताजी से अक्सर कहा कहते थे कि जब वह बड़े हो जाएंगे तो जनता की सेवा करेंगे। उस समय योगी आदित्यनाथ के पिता ने मीडिया के सामने कहा था कि मेरा यही संदेश है कि वह (योगी आदित्यनाथ) सबका साथ, सबका विकास के अजेंडे पर काम करें और जनता की सेवा करें।

पढ़ें: योगी आदित्यनाथ के पिता का निधन

 

सोमवार सुबह योगी ने अपने टॉप 11 अधिकारियों के साथ कोरोना के हालात की समीक्षा की। दरअसल, आपदा के बीच प्रदेशवासियों की स्वास्थ्य सुरक्षा और आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए मुख्यमंत्री के सही समय पर लिए गए सटीक फैसलों का ही परिणाम है कि इतनी बड़ी आबादी वाला प्रदेश कुछ हद तक कोरोना को नियंत्रित करने में कामयाब रहा है। प्रदेश की हर घटना और समस्या पर योगी बराबर नजर बनाए हुए हैं।

सोमवार सुबह कोरोना वायरस आपदा की स्थिति की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कोटा (राजस्थान) से आने वाले सभी बच्चों को होम क्वारंटीन कराना सुनिश्चित कराएं। यह सब तब हो रहा था जब योगी के पिता दिल्ली में गंभीर हालत में भर्ती थे।

यूपी के सीएम ने महाराष्ट्र के पालघर में जूना अखाड़ा के संतों की हत्या को लेकर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से भी बात की। उन्होंने ट्वीट कर बताया कि स्वामी कल्पवृक्ष गिरि जी, स्वामी सुशील गिरि जी व उनके ड्राइवर नीलेश तेलगड़े जी की हत्या के संबंध में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे जी से बात की और घटना के जिम्मेदार तत्वों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हेतु आग्रह किया।

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