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ई-रैबार : HAL के पूर्व निदेशक वीएम चमोला ने समझाया, उत्तराखंड में रोजगार के अवसर कहां हैं?

हिल-मेल की पहल 'ई-रैबार' में 29 अप्रैल 2020 को उत्तराखंड में टेक्नोलॉजी का भविष्य और लॉकडाउन के बाद रोजगार के क्षेत्र विषय पर लाइव चर्चा के लिए एचएएल के पूर्व निदेशक (एचआर) वीएम चमोला शामिल हुए। उन्होंने अपने जीवन के कई अनुभवों को साझा करते हुए समझाया कि टेक्नोलॉजी का उत्तराखंड में भविष्य क्या है।

29 अप्रैल को अलग-अलग क्षेत्रों की कई जानीमानी और प्रबुद्ध शख्सियतों ने उत्तराखंड के विकास और इसमें टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को लेकर अपने विचार रखे। लॉकडाउन के हालात का जिक्र करते हुए एचएएल के पूर्व निदेशक (एचआर) वीएम चमोला ने कहा कि हर मुश्किल में एक अवसर छिपा होता है। इसका जीता-जागता उदाहरण तमाम प्लेटफॉर्म पर एक साथ शुरू हुआ हिल-मेल का यह लाइव शो भी है।

उन्होंने कहा कि हर स्टेट की अपनी विशेष जरूरत होती है। पहली विकास से संबंधित और दूसरी गरीबी को दूर करना होती है। स्टेट पॉलिसी में यही दो चीजें प्रमुख रूप से होती हैं। पहाड़ का क्षेत्र होने के कारण हमारे पास कुछ लाभ हैं तो साथ में कुछ परेशानियां भी हैं। आबादी दूर-दूर है, पहाड़ी इलाके हैं जहां पहुंचना आसान नहीं होता है। हालांकि सरकार कई तरह की रियायतें देती हैं लेकिन यह ध्यान में रखना होगा कि तकनीक फोर्स मल्टीप्लायर होती है और हम इसका इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं तो इसका मतलब है कि हम पिछड़ रहे हैं।

करीब चार दशक तक बेंगलुरू और देश के दूसरे हिस्सों में सेवाएं देने के बाद अपने गृहराज्य में आकर बसे वीएम चमोला ने कहा कि उत्तराखंड में कई संगठन और लैब्स हैं, जहां टैलेंट भरा पड़ा है और उसका हम तकनीक के लिहाज से इस्तेमाल कर सकते हैं। उन्होंने उत्तराखंड में रोजगार के अवसर बढ़ाने और गरीबी दूर करने के तरीकों पर भी अपनी बात रखी। चमोला ने कहा कि हमारे यहां इलाके ऐसे हैं, जहां तक पहुंचना आसान नहीं है, इन्फ्रास्ट्रक्टर अभी विकसित नहीं हुआ है। सरकारी योजनाएं चल रही हैं पर उसमें तकनीक को बढ़ाना होगा।

 

उन्होंने कहा कि अगर खेती के हिसाब से ही देखें तो तकनीक का बेहतर इस्तेमाल करते हुए हम यूरोप में पैदा किए जाने वाले फल उत्तराखंड में पैदा कर सकते हैं। जो काम हम पहले महीनों में करते थे, अब टेक्नोलॉजी की मदद से सेकेंडों में करते हैं। उत्तराखंड में अभी इंडस्ट्री विकसित नहीं हो पाई है। हम हर तरह के उद्योग तो नहीं विकसित कर सकते लेकिन जो संसाधन हमारे पास हैं उस दिशा में काम किया जा सकता है। पर्यटन, मत्स्य पालन, एडवेंचर टूरिज्म समेत हर क्षेत्र में तकनीक का इस्तेमाल किया जाना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि कोई हैदराबाद में हो या अमेरिका में उसके टैलंट को उत्तराखंड के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। हम जब भी कभी इंडस्ट्री शुरू करते हैं तो हमें मैपिंग करनी होती है। हम क्या तैयार करेंगे, कहां से कच्चा माल आएगा, उत्पाद को बेचने के लिए मार्केट कहां मिलेगा। अपना अनुभवा साझा करते हुए उन्होंने कहा कि जब हम देहरादून में पढ़ रहे थे तो पढ़ाई काफी अच्छी थी। आज भी अच्छी है। बच्चे यहां से पढ़कर बाहर निकल रहे हैं, वे हमारे लिए असेट हो सकते हैं। एक दर्शक के सवाल के जवाब में वीएम चमोला ने कहा कि टूरिज्म और स्पोर्ट्स ऐसे क्षेत्र हैं, जहां उत्तराखंड में आगे अपार संभावनाएं हैं।

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Hill Mail

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