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निरंजनपुर मंडी बंद, अब देहरादून पांच दिन ही खुलेगा, दो दिन फुल लॉकडाउन

उत्तराखंड में लगातार बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के मामलों को देखते हुए राज्य सरकार ने कई अहम फैसले लिए हैं। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा है कि देहरादून के हालात को देखते हुए निरंजनपुर मंडी को बंद कर रहे हैं। सप्ताह में दो दिन देहरादून को पूर्णतः बंद करने का आदेश भी दिया जा चुका है। इन दो दिनों में देहरादून को सैनिटाइज किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिया है कि कोरोना संक्रमण के मामलों को देखते हुए देहरादून की निरंजनपुर सब्जी मंडी को बंद कर वैकल्पिक व्यवस्था कर ली जाए।

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उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के कोरोना संक्रमित की मृत्यु पर आश्रित को एक लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कंटेनमेंट जोन में दिशानिर्देशों का पालन सख्ती से कराने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि फिजिकल डिस्टेंसिंग यानी दो गज की दूरी की शर्त, मास्क की अनिवार्यता के लिए लोगों को लगातार जागरूक किया जाए। जो लोग इनका पालन न करें, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। इसके लिए फील्ड सर्विलांस पर विशेष ध्यान दिया जाए।

वीडियो कांफ्रेंसिग से राज्य में में कोविड-19 की स्थिति की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि क्वारंटाइन सेंटर में आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। होम क्वारंटाइन का मानकों के अनुरूप पालन हो रहा है या नहीं, इस पर लगातार चेकिंग भी की जाए। आकस्मिक निरीक्षण किए जाएं। गांवों में क्वारंटाइन फैसिलिटी पर विशेष ध्यान दिया जाए। इसके लिए ग्राम प्रधानों को निर्देशानुसार धनराशि दी जाए। कोविड केयर सेंटर में प्रशिक्षित स्टाफ व अन्य आवश्यक उपकरणों की व्यवस्था हो।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राशन की कालाबाजारी किसी भी हाल में नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित करने हुए कहा है कि कितना भी बड़ा अधिकारी सिफारिश करे, किसी की सिफारिश सुनने की जरूरत नहीं है। हम तक सिर्फ आरोपित को अंदर करने की खबर ही आनी चाहिए। हर जरूरतमंद व्यक्ति तक राशन पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि

उन्होंने कहा कि हमें त्वरित रोजगार और आजीविका सृजन के लिए खेती, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य को प्राथमिकता देनी होगी। हाल ही में किसानों के लिए केन्द्र सरकार द्वारा कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं, इनका लाभ किसानों तक पहुंचाने के लिए कार्य योजना बनाई जाए। स्थानीय मांग का अध्ययन कर लिया जाए और उनकी आपूर्ति स्थानीय संसाधनों से ही पूरा कराए जाने की कोशिश की जाए। स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय लोगों को किस प्रकार रोजगार उपलब्ध कराया जा सकता है, इस पर फोकस किया जाए।

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