गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बने एक साल पूरे, CM त्रिवेंद्र ने गिनाए विकास के कार्य

गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बने एक साल पूरे, CM त्रिवेंद्र ने गिनाए विकास के कार्य

अलग राज्य बनाने की मांग तो पूरी हो गई पर पहाड़ की राजधानी पहाड़ में होने की वर्षों से लंबित मांग अधूरी थी। 20 साल हो रहे थे पर सरकारों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जनभावनाओं के अनुरूप गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की घोषणा की। इसके बाद यहां जश्न हुआ था। अब एक साल पूरे हो गए हैं।

गैरसैंण को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की ऐतिहासिक घोषणा को एक साल पूरा हो गया है। आज ही के दिन एक साल पहले त्रिवेंद्र सरकार ने वर्षों से की जा रही लोगों को मांग को पूरा किया था। ऐसे में इस एक साल में हुए विकास कार्यों पर अलग-अलग जानकार अपने तरीके से विश्लेषण कर रहे हैं। अपनी सरकार का आखिरी पूर्ण बजट पेश करने से पहले सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बीते एक साल में गैरसैंण के विकास कार्य सामने रखे।

उन्होंने सिलसिलेवार ट्वीट कर बताया कि हमारी सरकार ने पिछले वर्ष आज ही के दिन शहीदों और राज्य आंदोलनकारियों के सपने को सर्वोच्च सम्मान देकर और जनभावनाओं का आदर करते हुए गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया था। गैरसैंण के चहुंमुखी विकास के लिए हमारी सरकार पूरी तरह से कटिबद्ध है।

सीएम ने आगे कहा कि बीते एक वर्ष में गैरसैंण के विकास के लिए कई कार्य तथा घोषणाएं की गई हैं, जिनमें आगामी दस वर्षों में ₹25 हजार करोड़ की लागत से समूचे राजधानी क्षेत्र का विकास सुनिश्चित करने के लिए एक वृहद् योजना बनाने पर कार्य किया जा रहा है।

उत्तराखंड भाषा विकास संस्थान की स्थापना, चाय विकास बोर्ड मुख्यालय की स्थापना, ओएफसी नेटवर्किंग का विस्तार, पंपिंग/पेयजल पाइपलाइन निर्माण, सीएचसी में 50 बेड्स के सब डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल की स्थापना, ब्लॉक में कोल्ड स्टोरेज एवं फूड प्रोसेसिंग प्लांट को स्वीकृति आदि पर कार्य हो रहा है।

आपको बता दें कि कोरोना काल के बाद आया उत्तराखंड का बजट महत्वपूर्ण है। महामारी के चलते उद्योगों को हुए नुकसान, नौकरियां जाने, पर्यटन थमने, आपदा और तमाम चुनौतियों के बीच यह बजट पेश किया जा रहा है। सरकार के सामने आम जनता को राहत पहुंचाने के साथ ही कोरोना से प्रभावित अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने की चुनौती है।

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