बीजेपी ने जब उत्तराखंड में अचानक नेतृत्व परिवर्तन किया तो ऐसा समझा गया कि शायद स्थिति अच्छी न हो या आंतरिक सर्वे में नाराजगी की बातें कही गईं। बताया गया कि अगले साल विधानसभा चुनाव हैं और पार्टी कोई रिस्क नहीं लेना चाहती। वैसे भी सल्ट विधानसभा उपचुनाव सिर पर आ गया था। ऐसे में नए सीएम और नए पार्टी अध्यक्ष के लिए खुद को साबित करने के साथ ही उम्मीदों पर खरा उतरना था।
2 मई को विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी उम्मीदवार महेश जीना की शानदार जीत से पार्टी ने राहत की सांस ली है। सबसे ज्यादा सुकून मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को हुआ होगा क्योंकि उपचुनाव को अगले साल के विधानसभा चुनाव से पहले सेमीफाइनल कहा जा रहा था। कांग्रेस ने भी पूरी ताकत झोंक दी थी।
सल्ट विधानसभा उपचुनाव : बीजेपी के महेश जीना जीते, कांग्रेस बोली – 2022 से पहले मौका गंवा दिया
बीजेपी के लिए एक तरफ कोरोना से मचे कोहराम को संभालना था तो सल्ट सीट भी बरकरार रखनी थी। हालांकि कार्यकाल के शुरुआती दो महीने में सामने आई पहली परीक्षा सीएम तीरथ ने पास कर ली है। उनकी अगुआई में लड़ा गया यह पहला चुनाव था और पार्टी ने परचम लहरा दिया है।
वैसे करीब एक साल के अपने कार्यकाल में सीएम रावत के सामने चुनौतियां कम नहीं हैं। अब उन्हें अपने लिए भी उपचुनाव लड़ना है जिससे वह विधायक बन सकें क्योंकि फिलहाल तो वह पौड़ी सीट से सांसद हैं।
दुश्मनों की अब खैर नहीं, जवानों के हाथों में आ चुका है ‘ब्रह्मास्त्र’
जब उन्हें सीएम बनाया गया था तो कहा गया कि पिछले सीएम के खिलाफ नाराजगी थी। ऐसे में पदभार संभालते ही तीरथ सिंह रावत ने कोरोना संकट पर सबको साथ में भरोसे में लेने की सोची और सर्वदलीय बैठक बुलाई। वर्चुअल बैठक में सभी के विचार सुने गए और एक अच्छा संदेश गया।
कोरोना की दूसरी लहर में प्रदेश में 5 हजार से ज्यादा केस आने लगे हैं। सीएम खुद जमीन पर उतरकर मिशन में जुट गए और अब उन्होंने मंत्रियों को अलग-अलग जिलों का दायित्व सौंपा है। उम्मीद की जा रही हैं कि सख्त कोरोना कर्फ्यू जैसे कदमों से संक्रमण की रफ्तार को एक बार फिर कम किया जा सकेगा और कोरोना पर विजय संभव होगी।


Leave a comment