उत्तराखंड में पिछले कई दिनों से भारी बारिश और बादल फटने की वजह से जनजीवन अस्तव्यस्त है। इन सब के बीच इंडिया टीवी की टीम ऋषिकेश से 20 किलोमीटर दूर बैरागढ़ गाँव पहुंची। पूरा बैरागढ़ गाँव बादल फटने की वजह से मलबे में दब चुका
उत्तराखंड में पिछले कई दिनों से भारी बारिश और बादल फटने की वजह से जनजीवन अस्तव्यस्त है। इन सब के बीच इंडिया टीवी की टीम ऋषिकेश से 20 किलोमीटर दूर बैरागढ़ गाँव पहुंची। पूरा बैरागढ़ गाँव बादल फटने की वजह से मलबे में दब चुका है। टूटी हुयी सड़क और खतरनाक पहाड़ी चट्टानों को पार करते हुए हम प्रशासन से पहले इन गाँव तक पहुंचे। ऋषिकेश से मोहनचट्टी होते हुए कोटद्वार जाने वाली इस सड़क पर 50 से अधिक गाँव बादल फटने की वजह से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। अकेले यमकेश्वर ब्लॉक में अभी तक करीब 15 लोगों और सैकड़ों मवेशियों के मारे जाने की खबर है।
जब हमने ऋषिकेश से अपना सफर शुरू किया तो कोटद्वार जाने वाली ये सड़क जगह जगह पर टूटी हुई नजर आई। सबसे पहले हम गरुड़चट्टी पहुंचे। ये पूरा गाँव गंगा की सहायक नदी ह्यूँल की चपेट में नजर आया। इस गाँव के भी कई घर बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। पिछले तीन दिनों की तबाही के बाद अब प्रशासन यहां पहुँचने का दावा कर रहा है। लेकिन हकीकत में अभी तक कई गाँव जनजीवन पूरी तरह कटे हुए हैं। यमकेश्वर के एसडीएम दी पी सिंह ने बताया कि राहत और बचाव कार्य में सेना और एनडीआरएफ की मदद ली जा रही है लेकिन राहत और बचाव का काम बहुत सुस्त रफ्तार से चल रहा है।
ऋषिकेश के करीब यमकेश्वर ब्लाक के करीब 150 गाँव बादल फटने और भूस्खलन के कारण भारी तबाही से जूझ रहे हैं। ऋषिकेश चिला बैराज के पास उस जगह पर मौजूद हैं जहां पर अभी भी सैकड़ों लोग जान हथेली पर रखकर नदी पार कर रहे हैं। इस उफनती गंगा की सहायक बीन नदी में पिछले तीन दिनों में 3 लोग और दर्जनों मवेशी बह चुके हैं। पुल न होने की वजह से लोग मजबूरन उफनती नदी पार कर रहे हैं। यमकेश्वर ब्लाक के कई गाँव बादल फटने की वजह से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं लेकिन यहाँ तक जाने का कोई साधन नहीं हैं। सड़क टूटने की वजह से गाँव तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। ऋषिकेश से बद्रीनाथ जाने वाला राजमार्ग और कोटद्वार पौड़ी मार्ग जगह जगह भूस्खलन के कारण बंद हो गया है। प्रशासन ने कुछ इलाकों से लोगों को हैलीकॉप्टर से बचाया है।
जैसे-जैसे हम प्रभावित गाँव की तरफ बढ़ रहे थे हालात और भी खराब नजर आ रहे थे। अब हम अगले गाँव घटटुगाड़ पहुंचे जहां पर हालात और भी खराब हैं। इस गाँव के 10 मकान नदी के बीचों बीच समाये नजर आ रहे हैं। लोगों ने किसी तरह अपनी जान बचाकर पहाड़ के गाँव में शरण ले रखी है। कुछ लोगों को सेना ने रस्सी सहारे निकाला। इसके बाद हम सबसे ज्यादा प्रभावित गाँव बैरागढ़ की तरफ बढ़ रहे थे लेकिन आगे सड़क पूरी तरह से भूस्खलन से टूटी हुई थी। खतरनाक पहाड़ी रास्तों के बीच करीब 5 किलोमीटर का रास्ता हमने पैदल तय किया। इस गाँव का नजारा बेहद भयानक था। हर तरफ बादल फटने से तबाही नजर आ रही है। सड़क पर हर तरफ भारी मलबा जमा हुआ है। इस गाँव से 100 से ज्यादा लोगों को हेलीकॉटर की मदद से बचाया गया। इस गाँव के 50 से ज्यादा घर बादल फटने की वजह से पूरी तरह मलबे में समा गये हैं।
इस पूरे इलाके में प्रशासन के दावे झूठे साबित हो रहे हैं। अभी तक ये गाँव सड़क से पूरी तरह कटे हुए हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित इन गाँव में लोग रोजमर्रा की जरुरत के सामान के लिए जूझ रहे हैं। उत्तराखंड में आई आपदा के सम्बन्ध में मैंने खुद मुख्यमंत्री हरीश रावत को दी ग्राउंड जीरो की जानकारी। मुख्यमंत्री ने जानकारी के आधार पर अधिकारियों को राहत और बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने सबसे ज्यादा प्रभावित यमकेश्वर ब्लाक में लोगों को तुरंत मदद पहुंचाने के निर्देश दिए।







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