26 जनवरी के दिन पूरा देश राजपथ पर भारत के गणतंत्र की ताकत को देखता है। इतिहास में ऐसा पहली बार ऐसा हुआ है जब राजपथ पर गणतंत्र दिवस की परेड में तीनों सेनाओं की महिला अधिकारियों का दस्ता शामिल हुआ। इसी कड़ी में इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब केदारनाथ में गणतंत्र मनाया गया। सेना और वायुसेना के जवानों ने भारी बर्फवारी के बीच शून्य से 7 डिग्री नीचे के तापमान में केदारनाथ के पुनर्निर्माण में हाथ बटाते हुए गणतंत्र दिवस मनाया।
एक तरफ 11,800 फीट ऊँची दुर्गम घाटी में मौजूद केदारनाथ में दुनिया का सबसे बड़ा हैलीकॉप्टर एमआई 26 को उतार कर वायुसेना ने साबित किया कि उनका कोई मुकाबला नहीं है। दूसरी तरफ नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनिंग (निम) के जवान शून्य से 7 डिग्री तापमान में केदारनाथ की रौनक को दोबारा वापस लौटाने के लिये दिनरात पुनर्निर्माण के काम को अंजाम देने में जुटे हैं।
केदारनाथ में जून 2013 में आई आपदा के बाद पुनर्निर्माण में सेना और वायुसेना ने नई जान फूंक दी है। तीन से चार फीट बर्फ और शून्य से सात डिग्री नीचे के तापमान में केदारनाथ को फिर से बसाने का काम युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। सबसे प
हले सुबह एनआईएम के जवान और मजदूर केदारनाथ के द्वार पर पहुंचकर भगवान शिव से क्षमा याचना करते हैं। उसके बाद मंदिर के आसपास पड़ी बर्फ को हटाने का काम शुरू हो जाता है।
केदारनाथ में आई प्रलय को डेढ़ साल से ज्यादा का वक्त बीत चुका है लेकिन पुनर्निर्माण का काम गति नहीं पकड़ पा रहा था। ऐसे में एनआईएम और वायुसेना के आने से केदारनाथ में काम युद्ध स्तर पर शुरू हो गया है। दुनिया के सबसे बड़े हैलीकॉप्टर एमआई 26 की मदद से 2 जेसीबी मशीन, 3 बड़े पोकलैंड एस्केवेटर, 5 डम्पर ट्रक, 1 हाइड्रा क्रेन और एक स्नो ब्लोअर केदारनाथ पहुँचाया गया। इस विशालकाय हैलीकॉप्टर ने 16 चक्कर लगाकर 150 टन का सामान 11,600 फीट ऊँचे केदारनाथ भेजकर एक नया रिकार्ड कायम किया।
एमआई 26 हैलीकॉप्टर के सीओ विंग कमांडर जी एस तुंग ने बताया कि केदारनाथ की संकरी घाटी में बर्फवारी के बीच कभी भी हैलीकॉप्टर उड़ान नहीं भरते हैं लेकिन पहली बार कपाट बंद होने के बाद केदारनाथ में एमआई 26 और छोटे प्राइवेट हैलीकॉप्टर जोखिम उठाकर उड़ान भर रहे हैं। यहां पर हैलीकॉप्टर पायलट की जरा सी चूक भारी पड़ सकती है लेकिन केदारनाथ में हर काम युद्धस्तर पर हो रहा है।
केदारनाथ के बारे में मान्यता है भगवान शिव के द्वार 6 महीने आम लोगों के लिए खुले रहते हैं जबकि सर्दियों में 6 महीने जब कपाट बंद होते हैं तो वे सिर्फ देवी देवताओं को दर्शन देते हैं। लेकिन ये पहला मौका है जब कपाट बंद होने के बाद केदारनाथ में पुनर्निर्माण का काम हो रहा है। एनआईएम के जवान और मजदूर दुनिया के सबसे ऊँचे युद्ध के मैदान सियाचिन की युद्ध रणनीति के तौर पर केदारनाथ में काम कर रहे हैं।
इनके पास केदारनाथ मंदिर के दोनों तरफ मौजूद 50 के ज्यादा क्षतिग्रस्त मकानों को तोड़कर पुनर्निर्माण करने का मिशन है। अब तक एनआईएम के जवान 24 से ज्यादा मकान तोड़ चुके हैं। एनआईएम के प्रिंसिपल कर्नल अजय कोठियाल के मुताबिक खू
न जमा देने वाली ठण्ड के बीच इन जवानों का एक ही मिशन है केदारनाथ को उसके पुराने दिन वापस लौटाना।
केदारनाथ मिशन के बीच यहाँ गणतंत्र दिवस की गूंज सुनाई दे रही है। एनआईएम के जवानों ने केदार घाटी में गणतंत्र दिवस परेड का आयोजन किया है। खून जमा देने वाली ठण्ड के बावजूद इन जवानों के जोश में कोई कमी नहीं है। केदारघाटी में बाबा केदार और भारत माता की जय के जयकारे गूंज रहे हैं।
एनआईएम के जवानों और वायुसेना के इस जोश और मेहनत से राज्य सरकार गदगद है। इसीलिए राज्य के मुख्यमंत्री हरीश रावत और आला अधिकारी खुद केदारनाथ पहुंचे। मुख्य्मंत्री ने मिशन केदारनाथ के कप्तान व एनआईएम के प्रिंसिपल कर्नल अजय कोठियाल और वायुसेना की एमआई 26 हैलीकॉप्टर टीम का सम्मान किया।
पुनर्निर्माण के काम की रफ्तार को देखकर राज्य के प्रशासन को लगता है आपदा के बाद उत्तराखंड में पर्यटन पर जो बुरा प्रभाव पड़ा था वो जल्द दूर हो जाएगा। अतिरिक्त मुख्य सचिव राकेश शर्मा का कहना है कि एक बार फिर श्रद्धालु उस प्रलय को भूलकर केदारनाथ का वापस रुख करेंगे।
केदारनाथ में एनआईएम द्वारा युद्धस्तर पर किये जा रहे पुनर्निर्माण के काम को देखकर ऐसा लगता है कि चाहे सरहद की निगरानी करनी हो या किसी आपदा से मुकाबला सेना हर मोर्चे पर तैयार रहती है।
– केदारनाथ से मनजीत नेगी


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