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विश्व पर्यावरण दिवस – विकास और आधुनिकता की दौड़ में पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए

हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है ताकि लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा हो और वह अपने आसपास के पर्यावरण को बचाने का काम सही तरीके से कर सकें। आजकल बड़े बड़े शहरों में बढ़ता तापमान और प्रदूषित होती हवा से यहां के सब लोग परेशान है। पर्यावरण की समस्या से हमारे बड़े शहर ही नहीं बल्कि छोटे शहरों में भी बहुत बुरा असर पड़ रहा है।

हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है ताकि लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा हो और वह अपने आसपास के पर्यावरण को बचाने का काम सही तरीके से कर सकें। आजकल बड़े बड़े शहरों में बढ़ता तापमान और प्रदूषित होती हवा से यहां के सब लोग परेशान है। पर्यावरण की समस्या से हमारे बड़े शहर ही नहीं बल्कि छोटे शहरों में भी बहुत बुरा असर पड़ रहा है। पर्यावरण दूषित होने के कारण यह कई बीमारियों को जन्म देता है। इससे मनुष्य ही नहीं बल्कि जीव जन्तुओं पर भी बुरा असर पड़ रहा है। जैसे जैसे पर्यावरण दूषित होता जा रहा है वैसे वैसे पृथ्वी में कई प्रकार के जीव जंतु भी विलुप्त हो रहे हैं और यह हम सब लोगों के लिए अच्छी बात नहीं हैं।

हम विकास और आधुनिकता की दौड़ में पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे हम सब लोग लगातार प्रकृति से दूर होते जा रहे हैं। अब हमें झरना, नदी, झील और जंगल देखने के लिए बहुत दूर जाना पड़ता है। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का खामियाजा हम समय-समय पर भुगत भी रहे हैं। कहीं धरती में पानी सूख रहा है तो कहीं की जमीन आग उगल रही है। कभी बहुत बाढ़ आ जाती है तो कभी बादल फटने लगते हैं। ये सब क्लाइमेट चेंज की वजह से ही हो रहा है और अगर हम लोगों ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले समय में यह एक भारी तबाही के रूप में हमारे सामने आ सकती है।

वायु प्रदूषण होने से लोगों को सांस से जुड़े कई तरह के बीमारियां हो रही हैं कई लोग तो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। जल प्रदूषण से भी कई प्रकार के रोग उत्पन्न हो रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से साल 1972 में वैश्विक स्तर पर पर्यावरण प्रदूषण की समस्या और चिंता की वजह से विश्व पर्यावरण दिवस मनाने की नींव रखी गई थी। इसकी शुरुआत स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में हुई थी। यहां दुनिया का पहला पर्यावरण सम्मेलन आयोजित किया गया था, जिसमें 119 देश शामिल हुए थे।

इस सम्मेलन के बाद हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाए जाने का संकल्प लिया गया था। विश्व पर्यावरण दिवस का उद्देश्य दुनियाभर के नागरिकों को पर्यावरण प्रदूषण की चिंताओं से अवगत कराना और प्रकृति और पर्यावरण को लेकर जागरूक करना था। इसके अलावा प्रकृति और जीव जंतुओं के बीच संतुलन बनाये रखना भी था लेकिन समय के साथ साथ हम लोग ऐसा नहीं कर रहे हैं जिससे कि पृथ्वी का पर्यावरण का संतुलन बिगड़ रहा है।

अगर लोगों ने समय के साथ इसको सही नहीं किया तो आने वाले समय में यह समस्या एक विकराल रूप ले सकती है और इससे आमजन मानस को बहुत नुकसान हो सकता है।

Written by
Y S Bisht

लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद कई टीवी प्रोग्राम के लिए काम किया। एशिया डिफेंस न्यूज़ इंटरनेशनल (अडनी) से जुड़े। यह एजेंसी हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, मणिपुरी और असमिया में अपनी सेवाएं देती है। इसके अलावा एशिया डिफेंस न्यूज के नाम से एक मासिक पत्रिका भी निकालती थी। वर्ष 2013 में जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर हिल-मेल वेबसाइट शुरू की। फरवरी 2016 से हिल-मेल में बतौर संपादक कार्यरत। मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल के निवासी हैं।

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