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मंत्री ने बयां की पौड़ी जिले की हकीकत, पानी, पलायन और स्वास्थ्य यहां की प्रमुख समस्या

उत्तराखंड जिले के पौड़ी जिले के 500 गांवों में लोगों के घरों पर ताले लटके हुए हैं। यहां के गांवों से लोगों का पलायन बहुत हो गया है यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। पौड़ी कमिश्नरी है लेकिन यहां की सड़कों की स्थिति बेहद खराब है। भले ही 22 पेयजल योजनाएं बन रही हैं, लेकिन पौड़ी के लोग आज भी पानी के लिए तरस रहे हैं। हर साल यहां पर गर्मियों में पानी की कमी महसूस की जाती है।

पौड़ी जिले में सबसे ज्यादा पलायन हुआ है। यहां की 500 से ज्यादा ग्राम सभाएं वीरान हो गई हैं। यहां के गांव के गांव खाली हो रहे है, यहां के लोग पानी को तरस रहे हैं। परिवहन मंत्री एवं पौड़ी प्रभारी चंदन रामदास ने प्रवास से लौटने के बाद यह हकीकत बयां की। उन्होंने कहा कि वास्तव में प्रदेश में सबसे ज्यादा पलायन पौड़ी जिले में ही हुआ है।

परिवहन मंत्री ने कहा कि 500 से ज्यादा गांवों में लोगों के घरों पर ताले लटके हुए हैं। यह हमारे लिए बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण है। क्योंकि पौड़ी में कमिश्नरी है फिर भी यहां पर विकास जिस तरीके से होना चाहिए था वह नहीं हो रहा है इसके लिए नए आयाम स्थापित करने होंगे। यहां का बेहतर तरीके से विकास करना होगा। उन्होंने कहा कि मैंने खुद देखा है कि पलायन का दंश कितना दर्दनाक है। हम पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी को यहीं रोकेंगे। हमें यहां के युवाओं और नौजवानों के रोजगार के लिए काम करना होगा जिससे कि वह अपनी मातृभूमि में रहकर यहां के विकास के लिए भागीदार बने।

उन्होंने कहा कि पौड़ी की भौगोलिक परिस्थितियां काफी विषम हैं। सड़कों की स्थिति बेहद खराब है। भले ही पेयजल की कई योजनाएं बन रही हैं, लेकिन पौड़ी जिले के लोग आज भी पानी के लिए तरस रहे हैं। पानी के अलावा यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था भी ठीक नहीं है। पहले तो यहां के लोग ही पौड़ी की स्वास्थ्य व्यवस्था को लचर बताते थे लेकिन अब खुद मंत्री चंदन रामदास ने कहा कि पौड़ी में स्वास्थ्य सुविधाएं भी ठीक नहीं हैं। पौड़ी का जिला अस्पताल पीपीपी मोड में संचालित हो रहा है जो कि एक रेफरेल सेंटर बना हुआ है। वहीं, श्रीनगर मेडिकल कॉलेज की स्थिति भी अच्छी नहीं है।

उत्तराखंड में भले ही योजनाएं कागजों में तो बन रही है लेकिन जमीन पर पहुंचते पहुंचते वह दम तोड़ देती है। अभी कुछ साल पहले चिन्डालू ग्राम सभा में पानी की लाइन बिछाई गई थी लेकिन उस लाइन में पिछले दो साल के अंदर केवल 15-20 दिन ही उस गांव में पानी आया है इस पानी की लाइन बिछाने के लिए सरकार ने लाखों रूपये खर्च किये हैं लेकिन अभी तक इस गांव में इस लाइन से पानी नहीं पहुंचा है।

पहले तो गांव में कुछ घरों में पानी के कनेक्शन लगाये गये थे लेकिन एक साल पहले हर घर जल, हर घर नल के तहत पूरे गांव में कनेक्शन बांटे जा चुके हैं लेकिन इन नलों में अभी तक पानी नहीं आया है। यह तो सिर्फ एक गांव की कहानी है उत्तराखंड में ऐसे कई गांव होंगे जहां पर ऐसी समस्यायें आ रही है। इसके लिए यहां के अधिकारी और ठेकेदार जिम्मेदार हैं। अधिकारी और ठेकेदार ऐसी जगह से पानी की व्यवस्था करें जहां पर पानी का स्रोत सही हो और गर्मियों में भी जहां पर पानी की कमी न हो। इसके लिए इन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए तभी सरकारी योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंच सकता है। अगर सरकार ने इन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय नहीं की तो यह योजनाएं केवल कागजों में ही बनकर रह जायेंगी।

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Hill Mail

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