उत्तराखंड लोक सेवा आयोग में डॉ राकेश कुमार करीब डेढ़ वर्ष तक अध्यक्ष रहे हैं। इस दौरान कई परीक्षा का उनके द्वारा सफल संचालन किया गया। परीक्षा आयोजन से लेकर आयोग की व्यवस्था सुधारने में उन्होंने अच्छे प्रयास किया। लेकिन कुछ परीक्षा के पेपर लीक ने आयोग की छवि खराब कर दी। तब जब पेपर लीक मामले की जांच के बीच आयोग के एक अफसर की भूमिका सामने आई तो अध्यक्ष समेत अन्य असहज हो गए। हालांकि अब व्यवस्था में काफी सुधार हो चुका है। लेकिन आयोग पर लगा दाग कभी धुल पायेगा, इसके प्रयास जारी हैं।
सरकार ने जिस तेजी और पारदर्शिता के लिए उत्तराखंड लोक सेवा आयोग को समूह-ग की भर्तियां थमाई थी, उस हिसाब से भर्तियों की रफ्तार धीमी पड़ गई है। हालात ये हैं कि जिन भर्तियों के प्रस्तावों (अधियाचन) में आयोग ने कमियां निकालकर लौटाए थे, वह लौटकर नहीं आए।
समूह-ग की आखिरी भर्ती नवंबर में कनिष्ठ सहायक की निकली थी, जिसके बाद चार माह से आयोग कोई भर्ती नहीं निकाल पाया। अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का पेपर लीक होने के बाद भर्तियों का अभियान चालू रखने के लिए धामी सरकार ने समूह-ग की 18 भर्तियों की जिम्मेदारी राज्य लोक सेवा आयोग को सौंपी थी।


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