आईटीबीपी के पूर्व एडीजी मनोज सिंह रावत को उत्तराखंड लोक सेवा आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया है। अपर सचिव कर्मेन्द्र सिंह ने राज्यपाल के निर्देश पर मनोज सिंह रावत को सदस्य नियुक्त करने का आदेश जारी किया है।
उत्तराखंड के पौड़ी के रहने वाले आईटीबीपी के पूर्व एडीजी मनोज सिंह रावत को उत्तराखंड लोक सेवा आयोग, हरिद्वार का सदस्य नियुक्त किया गया है। उत्तराखंड शासन के कार्मिक एवं सतर्कता अनुभाग-04 के अपर सचिव कर्मेन्द्र सिंह ने राज्यपाल के निर्देश पर मनोज सिंह रावत को सदस्य नियुक्त करने का आदेश जारी किया है।
मनोज सिंह रावत आईटीबीपी के पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक के पद से कुछ समय पहले ही सेवानिवृत हुए हैं। चीन से सटी सीमाओं पर तनाव भड़ने के बाद भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की चंडीगढ़ में नई कमान बनाई गई थी। इसकी जिम्मेदारी उत्तराखंड के सपूत अतिरिक्त महानिदेशक मनोज सिंह रावत को सौंपी गई थी। चंडीगढ़ में मुख्यालय वाली आईटीबीपी की इस पश्चिमी कमान पर ही लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में चीन के साथ लगती भारत की सीमाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी है।

नई कमान की जिम्मेदारी संभालने वाले एडीजी मनोज सिंह रावत आईटीबीपी के पहले अधिकारी हैं। इस कमान का मकसद आईटीबीपी की ऑपरेशन, प्रशिक्षण क्षमता को बढ़ाना और फील्ड फॉमेर्शंस से संबंधित प्रशासनिक मसलों में सुधार शामिल है। 1986 बैच के आईटीबीपी कैडर के अधिकारी मनोज सिंह रावत के पास भारत और विदेश में फील्ड और प्रशिक्षण का व्यापक अनुभव है। इससे पहले, वह नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में आईटीबीपी की ऑपरेशन ब्रांच की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
मनोज रावत का जन्म पौड़ी गढ़वाल जिले के बोनसाल मल्ला में हुआ। उन्होंने रुहेलखंड यूनिवर्सिटी से मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद असिसटेंट कमांडेंट के तौर पर साल 1986 में आईटीबीपी ज्वाइन की। उन्हें बीएसएफ अकादमी टेकनपुर में सीधे जीओ कोर्स के लिए चुन लिया गया। यहां 9 जुलाई, 1986 से 18 जुलाई, 1987 तक हुई ट्रेनिंग में मनोज रावत को ओवरऑल बेस्ट ट्रेनी चुना गया। इसके बाद वह 37 साल लंबे सेवाकाल में आईटीबीपी के सभी सेंटरों मसलन, शिमला, कुल्लू, बानू, लेह, टिगरी, लुधियाना, गौचर, मसूरी, दिल्ली, तेजपुर, शिलांग और ईटानगर में तैनात रहे।
एडीजी मनोज सिंह रावत को सराहनीय सेवा के लिए साल 2007 में पुलिस मेडल और 2012 में विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक प्रदान किया गया। आईटीबीपी की अधिकांश सीमा चौकियां 9,000 फीट से 18,800 फीट तक की ऊंचाइयों पर स्थित हैं जहां तापमान शून्य से 45 डिग्री सेल्सियस तक नीचे चला जाता है ऐसी विषम परिस्थितियों में ड्यूटी बेहद चुनौतीपूर्ण रहता है।
साल 2012 में मनोज सिंह रावत ने ऐसे समय में कोलंबो में भारतीय उच्चायोग की सुरक्षा में तैनात कमांडो दस्ते का नेतृत्व किया था, जब दोनों देशों के संबंध काफी खराब हो चुके थे। इससे पहले, फील्ड ट्रेनिंग, ऑपरेशन, सीमा की सुरक्षा, खेल और प्रशासन के क्षेत्र में अनुकरणीय प्रदर्शन को देखते हुए साल 2007 में उन्हें एनएसजी में डेप्यूटेशन पर भेजा गया था। एनएसजी में अपने सेवाकाल के दौरान मनोज सिंह रावत ने कई वीआईपी की सुरक्षा जिम्मेदारी निभाई। मनोज सिंह रावत के परिवार में पत्नी ममता रावत के अलावा दो बेटियां हैं।








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