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बच्चों में क्रांति ला रहे हैं नमन जोशी

सुरेश कापड़ी

कहा जाता है कि प्रतिभा किसी भी उम्र में परिचय की मोहताज नही होती है यह सच साबित कर दिया है चम्पावत जिले के उदयमान बाल साहित्यकार ब्लास्टर नमन जोशी ने, महज 14 वर्ष की आयु में ‘मेड एलियन’ शीर्षक से उपन्यास लिख कर चर्चा में आने वाले नमन जोशी वर्तमान में बाल विधानसभा के विधानसभा अध्यक्ष भी हैं। गांव मे रहने वाले नमन जोशी ने कक्षा 10 में अध्ययन के दौरान ‘मेड एलियन’ उपन्यास लिखा। इसका विमोचन तत्कालीन मुख्यमंत्री माननीय हरीश रावत जी ने किया था। ब्लास्टर नमन जोशी को बचपन से ही किताबों से गहन लगाव है इन्होंने अपने लेखकीय जीवन की शुरुआत तो महज 10 वर्ष की उम्र में ही ‘खौफ गली बदल लें’ से हुई। इसकी रचना के बाद ये बाल कवि सोसियल मीडिया में काफी चर्चाओं में आये। जिससे ये चमकने लगे थे पर अब तलाश थी उस गोताखोर की जो इस हीरे को समुंद्र से तरासे।

हाईस्कूल के छात्र ने लिखा उपन्यास मेड एलियन

‘’मेड एलियन’’ – छोटी सी उम्र में बालक का उपन्यास लिखना हमारे मन मस्तिष्क में यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर इस बालक ने इस पुस्तक में लिखा क्या होगा। क्योंकि स्कूली जीवन रहने के कारण इस बालक ने अभी दुनिया अधिक भी नही देखी थी न ही किसी राजनीतिक पार्टियों से रूबरू थे।

आखिर किस उथल पुथल ने उपन्यास लिखने को किया मझबूर

शीतकालीन अवकाश के दौरान दिल्ली घूमने गए नमन की मुलाकात जब एक ट्रेन में सफर करते मानसिक रूप से बीमार एक बच्चे से हुई तो कक्षा 10 के छात्र नमन के मन में ऐसे उथल पुथल मची कि उसको केंद्र रखकर उपन्यास लिख डाला। यह उपन्यास काफी प्रेरणादायक के साथ पूर्ण रूप से आम जनता को समर्पित हैं।

स्वच्छता और पर्यावरण की चिंता

बलास्टर नमन जोशी को स्वच्छता और पर्यावरण की अहम चिंता है इसलिए उन्होंने अपने उपन्यास की बिक्री से प्राप्त धनराशी का कुछ हिस्सा स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण पर भी खर्च किया। नमन जोशी की पुस्तक मेड एलियन की जो कीमत प्रकाशक ने रखी थी उसका 5 फीसदी पर्यावरण और उसके संरक्षण पर खर्च किया करते थे। उन्होंने कहा कि जो इस पुस्तक को खरीदेगा वो सोच सकता है कि उसने एक पेड़ लगाया।

पलायन का दर्द समेटे हैं पुस्तक ‘जिंदगी तन्हा सी है’

नमन जोशी दूसरा काव्य संग्रह ‘जिंदगी तन्हा सी है’ प्रकाशित करने वाले हैं इस काव्य संग्रह में नमन जोशी ने पूर्ण रूप से उत्तराखंड में पूरी तरह से पलायन हो चुके उन गांव के दर्द को समर्पित किया है जहां अब कोई नही रहता। पुस्तक में सुमाड़ी केदारनाथ, रिसाव, अल्मोड़ा, शहीद मेजर राजेन्द्र अधिकारी के ढूंगा गांव, अल्मोड़ा करौली, चम्पावत, बस्टडी आदि वीरान गावों पर 170 कविताएं लिखी हैं उनकी कविताएं पढ़ने वाले को दिल की गहराइयों से सोचने को विवश कर देती हैं कि वास्तव में पलायन का दर्द क्या है।

कविताओं के माध्यम से सरकार का ध्यान इन वीरान गावों की तरफ आकर्षित करने का प्रयास भी किया गया है इसके अलावा उत्तराखंड के पर्यटन मंदिरों मेलों आदि स्थलों को भी कविताओं के रूप में संजोया गया है।

गरीब तबके के हैं नमन जोशी

कम आयु में ही कई रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज करने वाले बाल कवि के पिता श्री हरीश जोशी बेकरी से अपने घर का खर्चा चलाते हैं। मां रेखा देवी गृहणी है। परिजनों का कहना है कि नमन की बचपन से जाने की जिज्ञासु इससे यहां तक खींच लाई है। अपने मामा के साथ ट्रेन सफर के उस दर्द को उपन्यास का रूप देने की जिद में अड़े नमन के परिवार ने मुश्किल से लेपटॉप जुटाया फिर अन्य लोगों से बात कर उपन्यास का प्रकाशन हुआ। माता रेखा देवी का कहना है कि नमन को फालतू का घूमना और टीबी देखना अधिक पसंद नहीं है। जब सारे लड़के घूमने निकलते हैं तो वो हाथ में कलम लिए कुछ ना कुछ लिखते रहता है।

समाज के लिए क्या करते है बलास्टर नमन

10 वर्ष की आयु में ’खौफ जब गली बदल लें’ कविता। 14 वर्ष में ’मेड एलियन’ उपन्यास, 17 वर्ष ’जिंदगी तन्हा सी है’ पुस्तक लिखने वाले नमन जोशी दिशा हीन बच्चों के लिए खुद प्रेरणा बनकर स्कूलों व महाविद्यालय में जाकर अनेक कार्यक्रम जैसे हिंदी संवाद, बच्चा क्रांति, बोर्ड से डर नही (बीएसडीएन) दिव्य क्रांति कार्यक्रम के द्वारा बच्चों को सुनते हैं। उनकी समस्याओं को दूर भी करते हैं, इनका कहना है एक बच्चे की क्या समस्या होती है एक बच्चा ही जानता है और बच्चा ही उसका हल निकल सकता है। इसलिए वो बच्चों को उनके अधिकारों से भी परिचय करा रहे हैं। बोर्ड परीक्षा के शुरू होते ही नमन अपने कुछ साथियों को लेकर चल पड़ते हैं। बोर्ड के उन अभ्यार्थियों को समझाने जिन्हें बोर्ड परीक्षा से डर और घबराहट होता है वो इस कार्यक्रम के जरिए शिक्षकों से मदद मांगते हैं और लोगों से अपील भी करते हैं कि जरूरत मंदो की मदद हर सम्भव करनी चाहिए उनका उद्देश्य आगामी बोर्ड परीक्षा में बैठने वाले अभ्यर्थियों को तैयार करना है।

’बाल विधानसभा के विधानसभा अध्यक्ष है बाल साहित्यकार नमन जोशी’ सामाजिक कार्यो में सक्रियता के कारण बाल साहित्यकार नमन जोशी को उत्तराखंड बाल संरक्षण आयोग द्वारा गठित बाल विधानसभा के विधानसभा अध्यक्ष है इनका उद्देश्य है कि 2021 तक हर बच्चे को उनके अधिकारों से रूबरू कराना और उनके क्या कर्तव्य हैं इस सब की पूर्ण जानकारी सभी तक पहुंचाना है। वो अनेक कार्यक्रम में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते हैं वर्तमान में बाल साहित्यकार नमन जोशी हिन्दू विश्वविद्यालय में बीए हिंदी के छात्र हैं।

हिंदूवादी रंग में रंग गया एक बालक

वो कहते हैं ना होनहार बिरवान के होत चिकन बाल दोस्तों। जब बालक अपनी प्रतिभा का धनी होता है तो उसके सामने उसकी निर्धन गरीबी का कोई भी बहाना टिक नहीं सकता है। तुम लाख करो उसे हराने की कोशिश उसे तो जीतने का शौक है। ऐसा ही कुछ होता है चंपावत के नमन के साथ, दोस्तों नमन जोशी अपनी मात्र भाषा हिंदी प्रति इतना सजग हैं कि छोटी सी उम्र (14) में ही उपन्यास लेखन साथ हिंदी भाषा का प्रचार प्रसार करने खुद प्रत्येक विद्यालय में जाकर अपनी कविता के माध्यम से हिंदी का दुःख दर्द को व्यतीत कर कविता में बखान करते हैं। मात्र भाषा हिंदी के प्रति सजगता के साथ वो देश की भक्ति में इतने रम गए हैं कि उनकी रचित कविता उन्ही के कलम से:-

’चाइना तेरी चीनी’ ….

चाइना तेरी चीनी नमकीन हो जाएगी,
हा तेरे घर की बीवी नमकीन हो जाएगी,
तू चाइना नही हिरोशिमा कहलायेगा,
जब मेरी भटकती आत्मा भारत मंे आएगी।
तेरे जैसे कोने भीम ने अकेले उठा लिए,
कराटे की बात करता है बेशर्म,
हमने कितने योगी जुटा लिए,
अरे शर्म कर बुद्ध के देश में तू हमें डरायेगा,
जा थोड़ा खौफ खा विश्व के नक्शे से तू गायब हो जाएगा,
चाइना वाशी तू चीन चु चाई कहना भूल जाएगा,
बस तेरे गले से भारत माता ही आएगा,
बिल्लादेन की नगरी वाले,
तू राम भूमि को क्या समझ पायेगा,
जिस दिन छाती में लात पड़ेगी,
तो जय श्री राम ही कहलायेगा,
सिन्धु में लाल रक्त बहेगा,
भारत की जय तब तू भी कहेगा,
परमाणु बमों की धमकी देकर तू हमें क्या डरायेगा,
बस चुटकी बजाने की देर है यमराज तेरे घर आ जायेगा।

– नमन जोशी बलास्टर (बाल साहित्यकार कवि)

Written by
Y S Bisht

लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद कई टीवी प्रोग्राम के लिए काम किया। एशिया डिफेंस न्यूज़ इंटरनेशनल (अडनी) से जुड़े। यह एजेंसी हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, मणिपुरी और असमिया में अपनी सेवाएं देती है। इसके अलावा एशिया डिफेंस न्यूज के नाम से एक मासिक पत्रिका भी निकालती थी। वर्ष 2013 में जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर हिल-मेल वेबसाइट शुरू की। फरवरी 2016 से हिल-मेल में बतौर संपादक कार्यरत। मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल के निवासी हैं।

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