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भक्तों के बिना केदारनगरी में पसरा सन्नाटा

मौसम की केदारनाथ यात्रा पर पड़ रही बुरी मार
बाबा केदार को है भक्तों का इंतज़ार
रुद्रप्रयाग। जहां घंटों तक भक्त बाबा केदार के दर्शनों का इंतज़ार करते थे, वहीं इन दिनों बाबा केदार को भक्तों के आने का इंतज़ार है। लगातार हो रही बारिश का केदारनाथ धाम की यात्रा पर बुरा असर पड़ रहा है। बीते दिनों से हो रही बारिश के कारण बाबा के दर पर सन्नाटा पसरा हुआ है। बाबा के दर्शनों के लिए जहां लम्बी लाइन लगती थी, आज वहां भक्तों के बिना विरानी छाई हुई है।
केदारनाथ धाम की यात्रा पर मौसम की बुरी मार पड़ी है। पिछले दिनों जहां हज़ारों की संख्या में यात्री पहुंच रहे थे और बाबा का दरबार भक्तों की चहल कदमी से गुलजार था, वहीं अब सुनसान नज़र आ रहा है। नाममात्र के भक्त बाबा केदारनाथ के दरबार में पहुंच रहे हैं। एक सप्ताह से मौसम की बेरुखी के कारण यात्रियों की आवाजाही बंद हुई है।

बारिश के बीच केदारनाथ भेजे गए तीर्थयात्री
रुद्रप्रयाग। यात्रा पर रोक हटने के बाद सोमवार को बारिश के बीच केदारनाथ धाम की यात्रा को सुचारू किया गया। सोनप्रयाग से लगभग पांच हज़ार भक्त केदारनाथ धाम भेजे गए। बीते दिनों से लगातार मूसलाधार बारिश जारी है। बारिश के चलते केदारनाथ धाम की यात्रा को 24 घंटे के लिए बंद किया गया था, लेकिन सोमवार सुबह बारिश के बीच यात्रा को शुरू किया गया। सोनप्रयाग में इंतज़ार कर रहे पांच हज़ार से अधिक यात्रियों को पैदल यात्रा मार्ग से केदारनाथ धाम भेजा गया। अलकनंदा एवं मंदाकिनी नदी का जलस्तर में भी लगातार वृद्धि हो रही है। नदी किनारे रह रहे लोग अलर्ट मोड पर हैं। केदारनाथ पैदल यात्रा मार्ग पर अतिरिक्त सुरक्षा जवानों को तैनात किया गया है। डेंजर जोन पर यात्रियों को सुरक्षा जवान रास्ता पार करवा रहे हैं।

जान हथेली पर रखकर बाबा के दर पर पहुंच रहे भक्त,
रुद्रप्रयाग। केदारनाथ धाम की यात्रा पर मौसम का बुरा असर पड़ रहा है। यात्रा मार्ग के सोनप्रयाग व मुनकटिया में पहाड़ी से लगातार भूस्खलन जारी है, जिस कारण तीर्थयात्रियों को सोनप्रयाग से छः किमी पैदल चलकर गौरीकुुंड पहुंचना पड़ रहा है, जबकि उन्हें केदारनाथ धाम पहुंचने के लिए 24 किमी का सफर तय करना पड़ रहा है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण गौरीकुंड से केदारनाथ के बीच जगह-जगह पैदल मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया है तो गदेरे भी उफान पर आ गए हैं। पैदल मार्ग के कई स्थानों पर मलबा और बोल्डर आ रहा है, जबकि जंगलचट्टी, भीमबली, लिनचोली सहित अन्य कई ऐसे स्थान हैं, जहां पर आवाजाही करना खतरे से खाली नहीं है। तीर्थयात्री जान हथेली पर रखकर बाबा केदारनाथ की यात्रा कर रहे हैं।

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Hill Mail

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