ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 93 तक पहुंच गया है, जो ‘मॉडरेट’ श्रेणी में आता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ता ट्रैफिक, निर्माण कार्य और ठंड के साथ जमने वाला धुआं प्रदूषण को फिर से बढ़ा रहा है।
वादियों की नगरी, जहां सुबह की ठंडी हवा कभी सुकून देती थी, आज वही हवा धीरे-धीरे भारी होती जा रही है। दीपावली के बाद कुछ दिनों तक जब आसमान साफ़ और नीला दिखा, लोगों को लगा कि अब सांस लेना थोड़ा आसान होगा… लेकिन राहत ज़्यादा दिन टिक नहीं पाई। राजधानी की फिज़ाओं में फिर से धुआं, धूल और धुंध का मिश्रण घुलने लगा है।
ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक देहरादून का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 93 दर्ज किया गया है, जो ‘मॉडरेट’ श्रेणी में आता है, यानी हवा अभी ठीक-ठाक है, लेकिन खतरे की रेखा के पास।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, पीएम 2.5 और पीएम 10 के स्तर लगातार बढ़ रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से निर्माण स्थलों और ट्रैफिक जाम वाले इलाकों में प्रदूषण का असर ज़्यादा देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हवा की गति और गिरी, तो आने वाले दिनों में राजधानी की हवा ‘खराब’ श्रेणी में जा सकती है। ऐसे में प्रशासन को सड़क किनारे पानी का छिड़काव, निर्माण स्थलों पर ढकाव और कचरा जलाने पर रोक जैसे कदम और सख़्ती से लागू करने होंगे।
राजधानी के अलावा हरिद्वार, ऋषिकेश और काशीपुर में भी वायु गुणवत्ता ‘मॉडरेट’ से ऊपर दर्ज की जा रही है।








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