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उत्तराखंड में बढ़ा जंगली जानवरों का आतंक

उत्तराखंड में इस समय जंगली जानवरों का आतंक फैला हुआ है। सरकार को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। कल ही भालू ने एक महिला को गंभीर रूप से घायल कर दिया था आज रामेश्वरी देवी को प्राथमिक उपचार के बाद उनकी स्थिति गंभीर होने पर उन्हें हेलीकॉप्टर से ऋषिकेश एम्स रेफर किया गया।

प्रभारी जिलाधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी डॉ. अभिषेक त्रिपाठी द्वारा वन विभाग के अधिकारियों को भालू प्रभावित क्षेत्रों में भालू के आक्रमण की रोकथाम हेतु तकनीकी टीम सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए। उन्होंने रात्रि व प्रातः नियमित गश्त करने और आवश्यक सुरक्षा उपकरणों के माध्यम से जनमानस की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बताया जा रहा है कि बीती शाम को चारा लेने गयी महिला पर भालू ने अचानक हमला कर दिया। वन विभाग व पुलिस द्वारा सर्च अभियान चलाये जाने के बाद आज सुबह लापता महिला रामेश्वरी देवी जंगल में घायल अवस्था में मिलीं। सर्च अभियान के बाद महिला बामनाथ–पोखरी मोटर मार्ग से करीब ढाई किलोमीटर दूर, 70–80 मीटर खड़ी ढलान पर बांज के पेड़ के पास मिलीं।

पंचायत मंत्री सतपाल महाराज ने राज्य के पर्वतीय जनपदों में जंगली जानवरों के बढ़ते हमलों और उनसे आम जन की सुरक्षा के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। उन्होंने अपने कैम्प कार्यालय पर वन विभाग एवं पंचायतीराज के अधिकारियों के साथ बैठक कर राज्य के पर्वतीय जनपदों में जंगली जानवरों के बढ़ते हमलों पर चिंता जताते हुए आमजन एवं ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश देते हुए कहा कि गढ़वाल एवं अन्य पर्वतीय जनपदों में स्थित ग्राम पंचायतों में बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं जो कि जंगली जानवरों के छुपने की जगह बन गई हैं।

जानवरों के हमलों से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। स्कूली बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। इसके अलावा वर्तमान में शादियों का साया भी चल रहा है इसलिए जरूरी है कि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। उन्होंने पंचायत विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि मनरेगा के तहत अनटाइड फंड से झाड़ियां का शीघ्र कटान किया जाए।

पंचायत मंत्री ने कहा कि जंगली जानवरों के संरक्षण के लिए जो पार्क बने हैं उनमें उन्हें रखने की व्यवस्था की जाए और बड़ी-बड़ी संस्थाओं एवं कंपनियों से उन्हें गोद लेकर उनके रखरखाव एवं खान-पान की व्यवस्था के लिए उनसे अनुरोध किया जाए। उन्होंने कहा कि एक बाघ को पड़कर यदि पार्क में रखा जाता है तो उसके खान-पान एवं रखरखाव पर 20 से 25 लाख रुपए के लगभग वार्षिक खर्च आता है। इसलिए इस तरह की पहल करना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि आमजन की सुरक्षा के लिए घातक बन रहे ऐसे जंगली जानवरों को पड़कर उन्हें संरक्षण देने के लिए वह अंबानी परिवार द्वारा बनाये गये बनतारा से भी अनुरोध करेंगे। इस बैठक में पंचायती राज विभाग के विशेष सचिव पराग मधुकर धकाते, निदेशक पर्यावरण पीसीसीएफ एस.पी. सुबुद्धि और पंचायतीराज निदेशक निधि यादव आदि मौजूद थे।

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Hill Mail

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