राजधानी की पहाड़ी हवा, जिसे कभी लोग सबसे साफ और ताज़ा माना करते थे, इन दिनों तेजी से प्रदूषित होती जा रही है। शहर में एयर क्वालिटी को लेकर जो तस्वीर सामने आई है, वह चिंता बढ़ाने वाली है। निजी एयर क्वालिटी वेबसाइटों पर देहरादून का AQI 171 तक दर्ज किया गया, जो “खराब” श्रेणी में आता है। खास बात यह है कि जब निजी पोर्टल्स हवा की बिगड़ती स्थिति दिखा रहे थे, तब उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेबसाइट और चौक चौराहों पर लगी स्क्रीन पर AQI अपडेट ही नहीं हो रहा था।
निजी आंकड़े बताते हैं कि देहरादून के कई हिस्सों में हवा में पीएम 2.5 की मात्रा बढ़ी है। पीएम 2.5 बेहद खतरनाक माना जाता है क्योंकि यह फेफड़ों की सबसे गहरी सतह तक पहुंच जाता है। डॉक्टरों के अनुसार, लगातार ऐसे वातावरण में रहने से सांस की बीमारियाँ, दमा, एलर्जी और आंखों में जलन जैसी समस्याएँ बढ़ सकती हैं।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की बुलेटिन में शहर का AQI 106 दिखाया गया, जबकि अन्य निजी पोर्टल्स इसे 128 से 171 तक दिखा रहे थे। इस अंतर ने सरकारी मॉनिटरिंग सिस्टम पर सवाल भी उठाए हैं। स्थानीय लोग भी मान रहे हैं कि हवा में धूल और धुआं पहले से ज्यादा महसूस हो रहा है। कई इलाकों में दृश्यता भी हल्की धुंध के कारण प्रभावित दिखी।
विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दियों की शुरुआत के साथ हवा स्थिर हो जाती है, जिससे धूलकण नीचे ही बैठे रहते हैं। ऊपर से तेज़ी से बढ़ते ट्रैफिक, निर्माण कार्यों से उठने वाली महीन धूल और कूड़ा जलाए जाने की घटनाएं समस्या को और बढ़ा देती हैं। यही कारण है कि पिछले कुछ दिनों में देहरादून की हवा लगातार गिरती जा रही है।
उधर, प्रदूषण बोर्ड पर डेटा अपडेट न होने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी कारणों से कुछ मॉनिटरिंग स्टेशनों का डेटा देर से अपलोड हो रहा है, जिसे ठीक किया जा रहा है। फिलहाल शहर में 16 सेंसर सक्रिय बताए गए हैं, लेकिन कई की स्क्रीन पर डेटा दिखाई नहीं दे रहा था।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि सुबह-शाम बाहर निकलते समय मास्क पहनें, बच्चों और बुजुर्गों को धूल भरे इलाकों से बचाएं, और घर के अंदर वेंटिलेशन का विशेष ध्यान रखें। बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए शहर को जल्द ठोस कदम उठाने होंगे, वरना स्थिति और खराब हो सकती है।


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