उत्तराखंड में कानून विश्वविद्यालय का लंबित सपना: जिम्मेदार कौन?

उत्तराखंड में कानून विश्वविद्यालय का लंबित सपना: जिम्मेदार कौन?

उत्तराखंड में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की स्थापना का मामला पिछले छह वर्षों से अधर में लटका हुआ है। 2019 में मंत्रिमंडल द्वारा रानीपोखरी में इसकी स्थापना का निर्णय लिया गया था, लेकिन आज तक जमीन पर कोई ठोस प्रगति नजर नहीं आती।

यह स्थिति राज्य सरकार और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में इस तरह की लापरवाही सीधे-सीधे युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

सरकार ने कई बार आश्वासन दिए, भूमि चयन की बातें हुईं, समितियां बनीं, लेकिन हर बार मामला फाइलों और बैठकों में ही उलझकर रह गया। यह सिर्फ देरी नहीं, बल्कि निर्णय लेने की कमजोर इच्छाशक्ति और प्रशासनिक ढिलाई का उदाहरण है।

अगर शुरुआत में ही स्पष्ट योजना और समयसीमा तय की जाती, तो आज यह स्थिति नहीं होती।

जब देश के अन्य राज्य अपने-अपने विधि विश्वविद्यालयों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाने की दिशा में काम कर रहे हैं, तब उत्तराखंड अब भी बुनियादी ढांचे के लिए जूझ रहा है।

यह विडंबना ही है कि शिक्षा और युवाओं की बात करने वाली सरकार इस अहम परियोजना को प्राथमिकता नहीं दे पा रही।

प्रदेश के छात्र-छात्राओं को बेहतर कानूनी शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता है, जिससे आर्थिक और मानसिक दोनों तरह का दबाव बढ़ता है।

कई प्रतिभाशाली छात्र संसाधनों के अभाव में पीछे छूट जाते हैं, जिसकी जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?

सरकार को अब केवल घोषणाओं और भाषणों से आगे बढ़कर वास्तविक कार्यवाही करनी होगी।

प्रशासन को भी अपनी जिम्मेदारी समझते हुए काम में तेजी लानी होगी और तय समयसीमा के भीतर परिणाम देना होगा। जरूरत है पारदर्शिता की, जवाबदेही की और ठोस निर्णय लेने की।

यदि अब भी यही ढुलमुल रवैया जारी रहा, तो यह मुद्दा केवल एक अधूरी परियोजना नहीं रहेगा, बल्कि जनता के विश्वास पर भी गहरा आघात करेगा।

उत्तराखंड के युवाओं को अब और इंतजार नहीं, बल्कि ठोस कदम और स्पष्ट परिणाम चाहिए।

विज्ञापन

[fvplayer id=”10″]

Latest Posts

  • यमकेश्वर के लाल और उत्तराखंड के गौरव पत्रकार मनजीत नेगी सीडीएस कमेंडेशन पत्र से हुए सम्मानित

    यमकेश्वर के लाल और उत्तराखंड के गौरव पत्रकार मनजीत नेगी सीडीएस कमेंडेशन पत्र से हुए सम्मानित0

    सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने आजतक के कार्यकारी संपादक मनजीत नेगी को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ कमेंडेशन मेडल और प्रशंसा पत्र से किया सम्मानित, आजतक के कार्यकारी संपादक मनजीत नेगी को रक्षा क्षेत्र में उनकी निर्भीक पत्रकारिता के लिए चीफ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ़ कमनडेशन मेडल से सम्मानित किया गया। सीडीएस कमनडेशन मेडल से सम्मानित होने वाले ये देश के एक मात्र रक्षा पत्रकार हैं। सीडीएस ऑफ़ डिफेंस स्टाफ़ जनरल अनिल चौहान ने ३० मई को सेवानिवृत होने से पूर्व कई तीनों सेनाओं के कई अधिकारियों और जवानों को सीडीएस कमनडेशन मेडल से सम्मानित किया। सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने सेनाओं के अलावा समाज के अलग अलग क्षेत्रों में बेहतरीन कार्य करने वाले कुछ चुनिंदा लोगों को सीडीएस कमनडेशन मेडल से सम्मानित किया। मनजीत नेगी उनमें से एक हैं। मनजीत नेगी पत्रकारिता के क्षेत्र में। पिछले 25 साल से कार्यरत हैं।

    READ MORE
  • अंडमान में मानसून की दस्तक, उत्तर भारत में लू का कहर; 22 मई तक हीटवेव का अलर्ट

    अंडमान में मानसून की दस्तक, उत्तर भारत में लू का कहर; 22 मई तक हीटवेव का अलर्ट0

    देश में मौसम ने दो अलग-अलग रंग दिखाने शुरू कर दिए हैं। एक ओर दक्षिण-पश्चिम मानसून ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में दस्तक देकर बारिश की उम्मीद जगा दी है, वहीं दूसरी ओर उत्तर और मध्य भारत के कई राज्य भीषण गर्मी और लू की चपेट में हैं। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में 22 मई तक लू चलने का अलर्ट जारी किया है।

    READ MORE
  • ऑपरेशन सिंदूर का शेर: स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक की वीरता ने दुश्मन के दिल में पैदा किया खौफ

    ऑपरेशन सिंदूर का शेर: स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक की वीरता ने दुश्मन के दिल में पैदा किया खौफ0

    भारतीय वायुसेना के जांबाज योद्धाओं की बहादुरी की कहानियां हमेशा देशवासियों के भीतर गर्व और राष्ट्रभक्ति की भावना जगाती रही हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक की, जिन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान अदम्य साहस, असाधारण नेतृत्व और अद्भुत युद्ध कौशल का परिचय देकर भारतीय वायुसेना का मान बढ़ाया। दुश्मन के इलाके में आधी रात को अंजाम दिए गए इस बेहद जोखिम भरे मिशन में उन्होंने जिस धैर्य और सटीकता के साथ कार्रवाई की, वह आज भारतीय सैन्य इतिहास में वीरता की मिसाल बन चुकी है।

    READ MORE

Follow Us

Previous Next
Close
Test Caption
Test Description goes like this