Home उत्तराखंड न्यूज़ पौड़ी में गुलदार का कहर, चार साल की मासूम को बनाया शिकार; सरकार और वन विभाग पर उठे सवाल
उत्तराखंड न्यूज़पौड़ी गढ़वालसरोकार

पौड़ी में गुलदार का कहर, चार साल की मासूम को बनाया शिकार; सरकार और वन विभाग पर उठे सवाल

उत्तराखंड के कई इलाकों में गुलदार अपना कहर बरपा रहा है। जिससे यहां के लोगों में काफी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यहां पर भी गुलदार का आतंक लंबे समय से बना हुआ है, लेकिन वन विभाग ठोस कार्रवाई करने में नाकाम रहा है।

उत्तराखंड के पौड़ी जिले से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। गढ़वाल वन प्रभाग की पोखड़ा रेंज में एक गुलदार ने चार साल की मासूम बच्ची को घर के बाहर से उठा लिया।

मृतका की पहचान दृष्टि रावत के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि गुरुवार रात वह घर के बाहर खेल रही थी, तभी गुलदार ने उस पर हमला कर उसे उठा ले गया।

परिजनों और ग्रामीणों ने तुरंत तलाश शुरू की। करीब एक किलोमीटर दूर बच्ची का शव बरामद हुआ। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है।

ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में गुलदार का आतंक लंबे समय से बना हुआ है, लेकिन वन विभाग ठोस कार्रवाई करने में नाकाम रहा है।

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। विभाग ने इलाके में गश्त बढ़ाने और पिंजरा लगाने की बात कही है। हालांकि, हर घटना के बाद ही ऐसी कार्रवाई होने पर सवाल उठ रहे हैं।

राज्य सरकार और वन मंत्री की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद न तो स्थायी समाधान निकाला गया है और न ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई की जाती, तो इस मासूम की जान बचाई जा सकती थी। यह घटना वन विभाग की लापरवाही और सरकार की कमजोर नीतियों को उजागर करती है।

घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल और प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।

लोगों का कहना है कि शाम ढलते ही गांवों में बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर परिवारों में भय का माहौल है।

ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि कई बार शिकायतों के बावजूद विभाग ने केवल औपचारिकताएं ही पूरी की हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता भी सवालों के घेरे में है।

यदि जल्द ही ठोस रणनीति नहीं बनाई गई, तो ऐसे हमलों की संख्या बढ़ सकती है। अब जनता केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सख्त और स्थायी समाधान चाहती है।

Written by
Hill Mail

हिल-मेल का प्रयास जनमानस की आवाज को सही स्तर तक पहुंचाना है। हमने कोशिश की है कि हिल-मेल पहाड़ से जुड़े जनमानस के बीच एक मंच और एक अभियान के रूप में आगे बढ़े। हिल-मेल प्रयत्न कर रहा है कि हिमालय के आंचल में रोजाना की घटने वाली सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक और दैवीय घटनाओं की जानकारी जल्दी से जल्दी लोगों को मिलती रहे।

HillMail Magazine – September 2026

HillMail Sep 2026
पत्रिकाओं के सभी अंक देखें

Related Articles

उत्तराखंड में 19 अक्टूबर को महानवमी पर सार्वजनिक अवकाश, मुख्यमंत्री धामी ने दी शुभकामनाएं

उत्तराखंड में शारदीय नवरात्र की महानवमी के अवसर पर सोमवार, 19 अक्टूबर...

पौड़ी में ARTO की बड़ी कार्रवाई, ऐप से बुक की बाइक तो खुली पोल; दो निजी बाइकें सीज

उत्तराखंड के पौड़ी जिले में ऐप आधारित राइड सर्विस के जरिए निजी...