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तूफान में टूटी टिहरी झील की फ्लोटिंग हट्स, सरकार ने लगाया तत्काल प्रतिबंध

टिहरी झील के डोबरा-चांठी क्षेत्र स्थित सिरांई में शनिवार रात आए तेज आंधी-तूफान ने बड़ा हादसा खड़ा कर दिया। खराब मौसम के चलते झील में स्थापित करीब 20 फ्लोटिंग हट्स के एक्सल ज्वाइंट निकल गए, जिससे ये हट्स दो हिस्सों में बंट गईं। हादसे के समय इनमें ठहरे 30 पर्यटक और सात कर्मचारी गंभीर खतरे में फंस गए।

जानकारी के अनुसार, तेज हवाओं और लहरों के दबाव के कारण फ्लोटिंग हट्स का संतुलन बिगड़ गया। 20 में से 13 हट एक दिशा में और सात दूसरी दिशा में बहने लगीं। अचानक हुए इस घटनाक्रम से पर्यटकों में हड़कंप मच गया और स्थिति बेहद भयावह हो गई। कई लोग रात के अंधेरे में झील के बीच फंसे रहे, जिससे उनकी जान पर बन आई।
घटना की सूचना मिलते ही एसडीआरएफ (राज्य आपदा प्रतिवादन बल) की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद सभी 30 पर्यटकों और सातों कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन इस घटना ने फ्लोटिंग हट्स की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने तत्काल प्रभाव से टिहरी झील में फ्लोटिंग हट्स के संचालन पर रोक लगा दी है। मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने घटना की विस्तृत जांच के आदेश देते हुए टिहरी की जिलाधिकारी निकिता खंडेलवाल से रिपोर्ट तलब की है। साथ ही पर्यटन विभाग को झीलों में संचालित पर्यटन गतिविधियों के लिए सख्त और सुरक्षित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
उधर, प्रभारी जिलाधिकारी वरुणा अग्रवाल ने इस पूरे मामले की जांच के लिए टिहरी एसडीएम की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी गठित की है। इस समिति को चार दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने साफ किया है कि जांच रिपोर्ट आने तक फ्लोटिंग हट्स का संचालन पूरी तरह बंद रहेगा और रिपोर्ट के आधार पर ही आगे कोई निर्णय लिया जाएगा।
यह घटना न केवल पर्यटन व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करती है, बल्कि भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए सख्त नियमों और निगरानी की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है।

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