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मेक इन इंडिया’ को नई उड़ान: वडोदरा से जल्द उड़ान भरेगा भारत में बना पहला C-295 सैन्य विमान

भारत सरकार ने वर्ष 2021 में एयरबस डिफेंस एंड स्पेस, स्पेन के साथ 56 C-295 विमानों की खरीद के लिए लगभग 21,935 करोड़ रुपये का समझौता किया था। इस परियोजना के तहत शुरुआती 16 विमान स्पेन से तैयार अवस्था में भारत भेजे जा रहे हैं, जबकि बाकी 40 विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। इन विमानों का निर्माण और अंतिम असेंबली गुजरात के वडोदरा स्थित टाटा-एयरबस फैसिलिटी में हो रही है।

यह पहला अवसर है जब कोई निजी भारतीय कंपनी पूर्ण स्तर पर सैन्य विमान निर्माण कर रही है। विशेषज्ञ इसे भारतीय रक्षा उद्योग में ऐतिहासिक बदलाव मान रहे हैं। इससे पहले लड़ाकू और सैन्य विमानों के निर्माण का कार्य मुख्य रूप से HAL तक सीमित था। अब निजी क्षेत्र की भागीदारी से रक्षा उत्पादन में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और तकनीकी क्षमता में भी विस्तार होगा।

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें वडोदरा प्लांट से लगभग तैयार C-295 विमान को हैंगर से बाहर लाते देखा गया। हालांकि टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स या भारत सरकार की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई, लेकिन इससे यह संकेत जरूर मिला कि परियोजना निर्धारित समय से पहले आगे बढ़ रही है। विदेश मंत्री S. Jaishankar ने भी जनवरी 2026 में कहा था कि पहला “मेड इन इंडिया” C-295 सितंबर 2026 से पहले रोलआउट हो सकता है।

भारतीय वायुसेना के लिए यह विमान बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। C-295 एक आधुनिक सैन्य परिवहन विमान है, जो 5 से 10 टन तक का भार ले जाने में सक्षम है। इसमें पीछे की ओर रैंप डोर दी गई है, जिससे सैनिकों और सैन्य उपकरणों को तेजी से उतारा जा सकता है। यह विमान पैराट्रूपर्स की तैनाती, राहत एवं बचाव कार्य, आपदा प्रबंधन और सीमावर्ती इलाकों में रसद पहुंचाने जैसे मिशनों में उपयोगी साबित होगा।

C-295 की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह छोटे और कच्चे रनवे पर भी आसानी से उड़ान भर सकता है। यही कारण है कि इसे उत्तर-पूर्व, लद्दाख और अंडमान-निकोबार जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात करने की योजना है। यह विमान भारतीय वायुसेना के पुराने एव्रो-748 विमानों की जगह लेगा, जो कई दशकों से सेवा में हैं।

इस परियोजना से भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। जानकारी के अनुसार, C-295 कार्यक्रम के तहत करीब 13 हजार से अधिक पुर्जों और सब-असेंबली का निर्माण भारत में किया जा रहा है। इससे देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSMEs) को भी नई संभावनाएं मिलेंगी। साथ ही बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

टाटा-एयरबस साझेदारी को भारत के रक्षा क्षेत्र में गेमचेंजर माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्पेन के प्रधानमंत्री ने अक्टूबर 2024 में वडोदरा स्थित फाइनल असेंबली लाइन का उद्घाटन किया था। इसके बाद से इस परियोजना की गति लगातार बढ़ती गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना सफल रहती है, तो भविष्य में भारत केवल अपनी जरूरतें ही पूरी नहीं करेगा, बल्कि सैन्य विमानों के वैश्विक निर्यात बाजार में भी मजबूत खिलाड़ी बन सकता है। C-295 का भारत में निर्माण आत्मनिर्भरता, तकनीकी विकास और रणनीतिक मजबूती की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में यह परियोजना भारतीय रक्षा उद्योग की नई पहचान बन सकती है।

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Hill Mail

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