मद्महेश्वर मंदिर की पवित्र उत्सव डोली मंगलवार को शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर से अपने मूल धाम के लिए भव्य धार्मिक परंपराओं और वैदिक रीति-रिवाजों के साथ रवाना हुई। पंचकेदारों में द्वितीय केदार के रूप में पूजित भगवान मद्महेश्वर की डोली यात्रा के शुभारंभ पर पूरा ऊखीमठ क्षेत्र “हर-हर महादेव” और “जय बाबा मद्महेश्वर” के जयघोषों से गूंज उठा। श्रद्धा, आस्था और भक्ति से ओतप्रोत इस अलौकिक दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु, स्थानीय ग्रामीण और तीर्थ पुरोहित उपस्थित रहे।
डोली प्रस्थान से पूर्व प्रातःकाल ओंकारेश्वर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। मंदिर परिसर को फूलों और रंग-बिरंगी सजावट से आकर्षक रूप दिया गया था। पुजारियों और तीर्थ पुरोहितों ने विधिवत षोडशोपचार पूजन संपन्न कराने के बाद भगवान मद्महेश्वर की उत्सव डोली को श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ सजाया। जैसे ही डोली मंदिर प्रांगण से बाहर निकली, भक्तों ने पुष्पवर्षा कर बाबा का स्वागत किया और पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
डोली यात्रा के दौरान पारंपरिक वाद्य यंत्र ढोल-दमाऊ, रणसिंघा और भक्ति गीतों की मधुर धुनों ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। स्थानीय महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में मंगल गीत गाती नजर आईं, जबकि युवा और बुजुर्ग बाबा के जयकारों के साथ यात्रा में शामिल हुए। यात्रा मार्ग पर जगह-जगह ग्रामीणों ने डोली का स्वागत कर प्रसाद वितरण और पूजा-अर्चना की।
भगवान मद्महेश्वर की डोली अपने पहले पड़ाव रांसी गांव पहुंची, जहां ग्रामीणों ने भव्य स्वागत किया। रात्रि विश्राम के दौरान विशेष पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन कर सुख-समृद्धि और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की। रांसी गांव में देर रात तक भक्ति और उत्साह का माहौल बना रहा।
डोली यात्रा बुधवार को दूसरे पैदल पड़ाव गौंडार पहुंचेगी। इसके बाद 21 मई को डोली मद्महेश्वर धाम पहुंचेगी, जहां सुबह 11 बजे भगवान मद्महेश्वर मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे। कपाटोद्घाटन के साथ ही बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के धाम पहुंचने की संभावना है। प्रशासन और मंदिर समिति की ओर से यात्रा व्यवस्थाओं को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
चारधाम यात्रा के साथ पंचकेदार यात्रा का भी विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान मद्महेश्वर के दर्शन के लिए कठिन पैदल यात्रा कर धाम पहुंचते हैं। समुद्र तल से लगभग 11,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित मद्महेश्वर धाम प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक शांति का अद्भुत संगम माना जाता है। मान्यता है कि यहां भगवान शिव के मध्य भाग की पूजा होती है और सच्चे मन से दर्शन करने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
डोली यात्रा के शुभ अवसर पर क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। स्थानीय व्यापारियों और ग्रामीणों में भी विशेष उत्साह नजर आया। श्रद्धालुओं का कहना है कि बाबा मद्महेश्वर की डोली यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपरा और आस्था का जीवंत प्रतीक है। पूरे क्षेत्र में इन दिनों शिवभक्ति की अद्भुत छटा बिखरी हुई है और हर ओर बाबा के जयकारे गूंज रहे हैं।









