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“मधुमक्खी बचेगी तो खेती और पर्यावरण बचेगा” – विश्व मधुमक्खी दिवस पर IATR की कार्यशाला

विश्व मधुमक्खी दिवस 2026 के अवसर पर इंस्टिट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर ट्रेनिंग एंड रिसर्च (IATR) द्वारा ‘मधुमक्खी संरक्षण एवं सतत मधुमक्खी पालन’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य मधुमक्खी संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और युवाओं को मधुमक्खी पालन के क्षेत्र में उद्यमिता के लिए प्रेरित करना रहा।

कार्यशाला के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता पद्मश्री ने पर्यावरण संरक्षण में मधुमक्खियों की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मधुमक्खियां केवल शहद उत्पादन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र की संतुलनकर्ता हैं।

उन्होंने अपने संबोधन में कहा, “मधुमक्खी सिर्फ शहद नहीं देती, वह हमारे पूरे पर्यावरण की रक्षक है। लगभग 75 प्रतिशत खाद्य फसलों का परागण मधुमक्खियों के माध्यम से होता है। यदि मधुमक्खियां सुरक्षित रहेंगी तो पहाड़, कृषि और जैव विविधता सभी सुरक्षित रहेंगे। हर युवा को मधुमक्खी संरक्षण को पर्यावरण संरक्षण का मिशन बनाना चाहिए।” उन्होंने छात्रों से ‘पर्यावरण दूत’ बनने का आह्वान भी किया।

कार्यक्रम के दौरान प्रगतिशील मौनपालकों श्री अनिल भट्ट और श्री अनिल भिष्ट को ‘मधु मित्र सम्मान 2026’ से सम्मानित किया गया। दोनों विशेषज्ञों ने आधुनिक मौनपालन तकनीक, मधुमक्खी स्वास्थ्य प्रबंधन और शहद विपणन पर व्याख्यान दिए। इस अवसर पर लगभग 60 कृषि छात्रों के साथ एक संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया।

युवा उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ‘युवा मधु सेवा सम्मान 2026’ के तहत पांच युवा मौनपालकों को भी सम्मानित किया गया, जिनमें सोभिक मंडल, उज्जवल, गौरव, इंदिशा और शानिया शामिल रहे। ये सभी युवा अपने मधुमक्खी पालन उद्यम की शुरुआत करने की दिशा में अग्रसर हैं।

IATR के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने अपने संबोधन में कहा कि मौनपालन अब केवल सहायक व्यवसाय नहीं रहा, बल्कि यह आय, परागण सेवा और निर्यात के बड़े अवसरों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बन चुका है। उन्होंने कहा कि नेशनल बीकीपिंग एंड हनी मिशन के अंतर्गत इस क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि भारत में जहां लगभग 15 करोड़ मधुमक्खी कॉलोनियों की आवश्यकता है, वहीं वर्तमान में केवल लगभग 19 लाख कॉलोनियां ही उपलब्ध हैं, जो इस क्षेत्र में बड़े अवसर को दर्शाता है।

उन्होंने युवाओं से इस क्षेत्र में आगे आने का आह्वान करते हुए कहा कि IATR तकनीकी सहयोग और प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी बताया कि संस्थान की ‘सुंदर मधु वाटिका’ देसी मधुमक्खी प्रजाति Apis Cerana Indica के संरक्षण और संवर्धन पर कार्य कर रही है।

कार्यक्रम में IATR टीम के श्री नवीन नौटियाल, सुश्री लतिका राणा, सुश्री वैशाली थापा, सुमन एवं हाफिज सहित अनेक संकाय सदस्य एवं छात्र उपस्थित रहे।

कार्यशाला का समापन सभी प्रतिभागियों द्वारा मधुमक्खी संरक्षण की शपथ लेने के साथ हुआ।

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Hill Mail

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