आईटीबीपी अकादमी परिसर में आयोजित इस गौरवशाली समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश एवं मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने परेड की सलामी ली। शानदार मार्च पास्ट, अनुशासन और जोश से भरपूर प्रदर्शन ने समारोह को यादगार बना दिया। प्रशिक्षु अधिकारियों ने कदमताल करते हुए मुख्य अतिथि को सलामी दी और अपने कठिन प्रशिक्षण के दौरान अर्जित कौशल का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम की शुरुआत आईटीबीपी के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर द्वारा मुख्य अतिथि एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों के स्वागत से हुई। इसके बाद युवा अधिकारियों ने परेड में हिस्सा लिया। देश के विभिन्न राज्यों से चयनित होकर आए इन अधिकारियों ने राष्ट्रीय एकता और विविधता की अद्भुत तस्वीर प्रस्तुत की।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने अपने संबोधन में कहा कि आईटीबीपी देश के सबसे कठिन और विशिष्ट सुरक्षा बलों में से एक है। इसके जवान और अधिकारी लगभग 19 हजार फीट की ऊंचाई तथा माइनस 45 डिग्री सेल्सियस तक के अत्यंत कठिन मौसम में तैनात रहकर देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा के साथ-साथ आईटीबीपी आपदा राहत, बचाव कार्य, आंतरिक सुरक्षा, वीआईपी सुरक्षा और राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उन्होंने नवदीक्षित अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि 18 से 50 सप्ताह तक चले कठिन प्रशिक्षण ने उन्हें हर परिस्थिति में कार्य करने के लिए सक्षम बना दिया है। अब उनके कंधों पर देश की सुरक्षा और जनता के विश्वास को बनाए रखने की बड़ी जिम्मेदारी है।
समारोह के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षुओं को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया। 30वें सहायक सेनानी जीडी आधार कोर्स में पवन कुमार मीणा को ‘होम मिनिस्टर स्वॉर्ड ऑफ ऑनर फॉर बेस्ट ऑल राउंड ट्रेनी’ से सम्मानित किया गया। वहीं सचिन को बेस्ट आउटडोर ट्रेनी, कौन्तेय मिश्रा को बेस्ट इंडोर ट्रेनी और अभिषेक मौर्य को बेस्ट स्पोर्ट्स पर्सन ट्रेनी का पुरस्कार मिला। अन्य श्रेणियों में भी कई प्रशिक्षुओं को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का एक भावनात्मक क्षण तब देखने को मिला जब देहरादून के नालापानी निवासी पारस सिंह शाही ने अधिकारी बनने का अपना सपना साकार किया। उनके पिता स्वयं आईटीबीपी में इंस्पेक्टर पद पर कार्यरत हैं और लगभग 40 वर्षों से सेवा दे रहे हैं। बेटे को अधिकारी की वर्दी में देखकर पिता का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। पारस ने कहा कि बचपन से ही उनका सपना सेना में अधिकारी बनने का था, जो आज पूरा हो गया।
समारोह के दौरान ‘ई-अमोघ’ नामक विशेष ई-पत्रिका का भी विमोचन किया गया। इस पत्रिका में प्रशिक्षु अधिकारियों की उपलब्धियों, अनुभवों, प्रशिक्षण के विभिन्न चरणों और अकादमी में आयोजित गतिविधियों को संकलित किया गया है। पत्रिका प्रशिक्षण यात्रा की यादों को सहेजने का एक विशेष प्रयास है।
इस अवसर पर उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता, न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी, न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी, जिला जज प्रेम सिंह खिमाल, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
आईटीबीपी की यह पासिंग आउट परेड केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन नहीं, बल्कि उन युवा अधिकारियों की नई यात्रा की शुरुआत है जो देश की सीमाओं पर कठिन परिस्थितियों में तैनात होकर राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। हिमालय की ऊंचाइयों से लेकर आपदा के मोर्चों तक, ये नए हिमवीर अब देश सेवा के लिए पूरी तरह तैयार हैं।


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