औली स्थित विदेशी प्रशिक्षण केंद्र में आयोजित उद्घाटन समारोह में अमेरिकी सेना की 14वीं इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल अमरेश गुंजन और अमेरिकी 11वीं एयरबोर्न डिवीजन की पहली इन्फैंट्री ब्रिगेड कॉम्बैट टीम के कमांडर कर्नल बेंजामिन जैकमैन ने प्रतिभागी दलों को संबोधित किया। इस दौरान दोनों देशों के सैनिकों के बीच संयुक्त प्रशिक्षण और परिचालन अनुभव साझा करने की प्रक्रिया शुरू हुई।
यह सैन्य अभ्यास केवल औली तक सीमित नहीं है। इसके कुछ हिस्से राजस्थान स्थित महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में भी समानांतर रूप से आयोजित किए जा रहे हैं। अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों में प्रशिक्षण के जरिए दोनों सेनाएं विभिन्न परिचालन वातावरण में संयुक्त अभियान चलाने की क्षमता को बेहतर बनाने पर काम करेंगी। अभ्यास में पैदल सेना आधारित अभियानों पर विशेष जोर दिया गया है।
संयुक्त अभ्यास का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच अंतर-संचालनीयता बढ़ाना है। इसके तहत सैनिकों को संयुक्त योजना बनाने, अभियान की रूपरेखा तैयार करने और जरूरत के अनुसार मिलकर कार्रवाई करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही दोनों देशों की सेनाओं के बीच रणनीति, तकनीक और प्रक्रियाओं से जुड़े अनुभवों का आदान-प्रदान भी होगा।
इस बार अभ्यास में आधुनिक तकनीक को विशेष महत्व दिया गया है। प्रशिक्षण के दौरान निगरानी और टोही के लिए ड्रोन तथा स्वायत्त प्रणालियों का इस्तेमाल किया जाएगा। इन तकनीकों के जरिए कठिन पर्वतीय क्षेत्रों में गतिविधियों पर नजर रखने, सूचनाएं जुटाने और अभियान की योजना को अधिक प्रभावी बनाने के तरीकों का अभ्यास होगा। महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आधुनिक हथियार प्रणालियों का प्रदर्शन भी प्रस्तावित है।
अभ्यास के दौरान दोनों देशों के विषय विशेषज्ञ उभरती सैन्य तकनीकों और बहु-क्षेत्रीय युद्ध के बदलते स्वरूप पर भी विचार साझा करेंगे। इससे सैनिकों और अधिकारियों को आधुनिक युद्धक्षेत्र में तकनीक की भूमिका, निगरानी व्यवस्था तथा विभिन्न संसाधनों के समन्वित इस्तेमाल को समझने का अवसर मिलेगा।
रक्षा जनसंपर्क अधिकारी, देहरादून, उत्तराखंड लेफ्टिनेंट कर्नल चेतन सिंह कबसूड़ी के अनुसार, यह अभ्यास दोनों सेनाओं को रणनीति, तकनीक और प्रक्रियाओं को साझा करने का अवसर देता है। इससे विभिन्न भूभागों और परिचालन वातावरण में समन्वित सैन्य अभियानों को अंजाम देने की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलती है।
भारत और अमेरिका के बीच ‘युद्ध अभ्यास’ श्रृंखला नियमित सैन्य सहयोग का हिस्सा है। हर संस्करण में दोनों सेनाएं संयुक्त प्रशिक्षण के माध्यम से अपनी प्रक्रियाओं और क्षमताओं को परखती हैं। औली जैसे ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्र में होने वाला प्रशिक्षण भारतीय सेना के लिए हिमालयी भूभाग की परिस्थितियों के अनुरूप अभ्यास का अवसर देता है, जबकि अमेरिकी सैनिकों को भी चुनौतीपूर्ण पर्वतीय वातावरण में संयुक्त संचालन का अनुभव मिलता है।
इस अभ्यास के दौरान सैनिकों के बीच पेशेवर अनुभवों का आदान-प्रदान, संयुक्त कार्रवाई की समझ और आधुनिक उपकरणों के उपयोग पर प्रशिक्षण प्रमुख गतिविधियों में शामिल रहेंगे और अनुभव साझा होंगे।


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